डी टी पी क्या है? (What is DTP ):-
डेस्कटॉप पब्लिशिंग का शाब्दिक अर्थ छापी जाने वाली सामग्री को अपनी मेज पर ही तैयार करना होता है। अर्थात अपनी मेज पर रखे उपकरणो द्वारा ही प्रकाशन का कार्य करना, इसका व्यवहारिक अर्थ है – कम्प्यूटर और उससे जुडे उपकरणो द्वारा प्रकाशन का कार्य करना, दूसरे शब्दो मे इस प्रणाली मे पाठ्य कम्पोज करने, चित्र आदि बनाने से लेकर उन्हे विभिन्न पृष्ठो पर स्थान देने अर्थात सेट करने तक का सारा कार्य अपनी मेज पर रखे कम्प्यूटर मे ही किया जाता है और अंत मे ऐसी मास्टर प्रति लेजर प्रिंटर पर छापकर तैयार कर ली जाती है, जिसे आप किसी छपाई की विधि जैसे ऑफसेट विधि से सीधे कागज पर उतार सकते है और इच्छानुसार कितनी भी प्रतिया छाप सकते है।
डी टी पी की सुविधा व्यवसायिक प्रकाशन ही नही कार्यालय स्वचालन के क्षेत्र मे भी एक प्रमुख उपलब्धि है सभी छोटी बडी कम्पनियां अपने कार्य के बारे मे अनेक प्रकार की सामाग्री जैसे पैम्फलेट, पोस्टर, विज्ञापन, बैलेंसशीट, प्रगति पत्रिका, पुस्तिकाएं आदि प्रतिवर्ष छपवाती है, पहले यह कार्य हस्तचालित टाइप सेंटिंग द्वारा किया जाता था, जिसमे प्रत्येक शब्द हाथ से कंपोज़ करना पडता है और चित्र या ग्राफ का ब्लॉक बनाना पडता है, कम्पोज हो जाने के बाद उसकी जाँच करके उसे छापा जाता है, इस कार्य मे कभी भी पूर्ण संतुष्टि नही मिलती क्योंकि कार्य के बीच मे दस्तावेज मे कोई भी बडा परिवर्तन या सुधार करना संभव नही होता है।
लेकिन डी टी पी की सुविधा उपलब्ध हो जाने से यह कार्य बहुत सरल, विविधापूर्ण और रूचिकर हो गया है इसमे छपाई की सामाग्री पर हमारा पूर्ण नियंत्रण रहता है, हम अक्षरो को मनचाहे आकार और रूप मे ढाल सकते है और पलक झपकते ही उनका टाइपफेस या फॉण्ट बदल सकते है, मनचाहे रंगो के चित्र बनाना उनका आकार बदलना और दस्तावेज मे कही भी स्थापित करना भी बंहुत सरल हो गया है और पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद उनकी मास्टर प्रति छापकर अधिक प्रतियो की छपाई हेतु दी जा सकती है, डीटीपी से प्रकाशन की सारी प्रक्रिया बहुत ही सरल और तेज हो गयी है, जिसके कारण मोटी मोटी पुस्तके भी कुछ ही दिनो मे छापकर तैयार कर दी जाती है आपके हाथो मे जो पुस्तक है, जो पुस्तक है, वह भी डीटीपी प्रणाली द्वारा ही तैयार की गयी है।
डीटीपी के कार्य के लिये मुख्यतः तीन वस्तुओ की आवश्यकता होती हैः एक पर्सनल कम्प्यूटर, एक लेजर प्रिंटर तथा डीटीपी का सॉफ्टवेयर , पर्सनल कम्प्यूटर मे पर्याप्त क्षमता की रैम तथा हार्ड डिस्क एवं माउस अवश्य होने चाहिए, अच्छी छपाई के लिये लेजर प्रिंटर भी आवश्यक है वैसे प्रूफ आदि की छपाई साधारण डॉट मैट्रिक्स प्रिंटरो पर भी की जा सकती है, डीटीपी का वास्तविक कार्य इसके लिये उपयोग किये जाने वाले विशेष सॉफ्टवेयर पैकेजो द्वारा किया जाता है।
संक्षेप मे, अपने डेस्कटॉप कम्प्यूटर की सहायता से पूरी तरह छापने योग्य दस्तावेज तैयार करना ही डेस्कटॉप पब्लिशिंग कहा जाता है, इसके लिये कई प्रकार के प्रोग्राम उपलब्ध है, जिनके द्वारा आप टुकडो मे बंटी हुई सूचनाओ और सामाग्री को आपस मे जोडकर एक संपूर्ण दस्तावेज बना सकते है।
डेस्कटॉप प्रकाशन का उपयोग (Uses of Desktop Publishing) :-
पाठ्य तैयार करना (Creating Text) इस चरण मे सामान्यतया किसी वर्ड प्रोसेसर द्वारा पाठ्य सामग्री तैयार की जाती है, जिसमे टाइप करना, प्रूफ देखना, वर्तनी की जांच करना, सम्पादन करना, संशोधन करना आदि शामिल होता है।
- चित्र तैयार करना (Creating Illustrations)
- पेज की डिजाइन बनाना (Designing Page)
- पेज तैयार करना (Making The Page)
- प्रकाशन को छापना (Printing The Publication)
- प्रकाशन के अंतिम रूप देना (Finalizing the Publication)
1- चित्र तैयार करना (Creating Illustrations)
यह कार्य सामान्यतया दो प्रकार से किया जाता है या तो किसी ग्राफिक सॉफ्टवेयर द्वारा आवश्यक चित्र बना लिये जाते है या पहले से बने हुए अथवा छपे हुए चित्र को किसी स्कैनर द्वारा इलैक्ट्राॅनिक डाटा मे बदलकर कम्प्यूटर मे स्टोर कर लिया जाता है इस विधि मे स्कैनर की क्षमता अधिक महत्वपूर्ण होती है आवश्यकता के अनुसार इन दोनो विधियो का उपयोग करके सभी प्रकार के चित्र रेखाचित्र, फोटो आदि तैयार कर लिये जाते है।
2- पेज की डिजाइन बनाना (Designing Page)
इस चरण मे प्रत्येंक पृष्ठ का खाका तैयार किया जाता है इसमे पृष्ठ की लंबाई, चैडाई और चारो ओर छोडे जाने वाले हाशिए तय कर लिये जाते है यह कार्य डीटीपी सॉफ्टवेयर द्वारा करना कही आसान है क्योकि उसमे आप विभिन्न प्रकार की डिजाइने मिनिटो मे बनाकर देख सकते है कि कौन सी डिजाइन आपके लिये सर्वश्रेष्ठ रहेगी।
3- पेज तैयार करना (Making The Page)
यह चरण सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है, वास्तव मे यही डीटीपी का मुख्य चरण है, इनमे समस्त तैयार की हुई सामाग्री को इलेक्ट्रॉनिक पृष्ठ पर अच्छी तरह लगाया जाता है इसमे पाठ्य के फाण्ट आकार तथा चित्रो के आकार के बारे मे निर्णय लिये जाते है और उन्हे इस प्रकार लगाया जाता है कि प्रत्येक प्रष्ठ अधिक अधिक सुन्दर और उपयोगी बने डीटीपी सॉफ्टवेयर द्वारा ऐसा करना बहुत सरल होता है क्योकि इसमे आप अपने कम्प्यूटर की स्क्रीन पर ही किसी पेज को कई प्रकार से लगाकर देख सकते है कि कौन सा प्रकार सबसे अच्छा रहेगा।
4- प्रकाशन को छापना (Printing The Publication)
इस चरण मे इलैक्ट्रांनिक रूप से तैयार किए गए प्रकाशन के सभी पृष्ठो को किसी लेजर प्रिंटर पर छापा जाता है इस चरण मे परम्परागत विधि और डीटीपी विधि मे अंतर साफ मालूम पडता है, क्योकि परम्परागत प्रकाशन मे सामाग्री भातिक रूप मे पहले ही छपी हुई उपलब्ध होती है जबकि डीटीपी मे सामाग्री सबसे बाद मे छापी जाती है।
5- प्रकाशन के अंतिम रूप देना (Finalizing the Publication)
इस चरण मे प्रकाशित दस्तावेज को एक बार पुनः भली प्रकार देखकर उसके खाके और सामाग्री मे यत्र तत्र संशोधन किए जाते है और अंतिम बार छाप कर वह प्रति ऑफसेट छपाई के लिए दे दी जाती है।
डेक्स टॉप पब्लिकेशन के उपयोग (Uses of DTP):-
वर्तमान प्रिन्टिंग तकनीक हमारे जीवन से बहूत गहराई से जुडी हुई हैं। हम रोज विभिन्न प्रिन्ट सामग्री का उपयोग करते हैं। समाचार पत्र, पत्र, बिल आदि विभिन्न प्रिन्ट माध्यम से हम जुडे होते हैं। इन सभी प्रिन्ट की हुई वस्तुओं की डिजाइन बनाने का काम डीटीपी सॉफ्टवेयर में होता हैं। डीटीपी सॉफ्टवेयर की सहायता से सभी प्रकार के दस्तावेज की डिजाइन बनाई जा सकती हैं। प्रत्येक प्रकार के दस्तावेज का ले आउट अलग अलग होता हैं। जैसे किताब का पेज का आकार अलग होता हैं, ब्राउशर के पेज का आकार अलग होता हैं। साधारणत: निम्न दस्तावेज की डिजाइन बनाई जाती हैं –
किताबे, मासिक पत्रिका, समाचार पत्र, निंमत्रण पत्रिका, बिजनेस कार्ड , लेटर हेड, पोस्टकार्ट, विज्ञापन लिफाफे, कैलेंडर, पोस्टर, बिल बुक, कंपनी की सालाना रिर्पोट, आवेदन पत्र, कार्यलयीन नोटीस, बैनर।
डेक्सटॉप पब्लिकेशन के लाभ (Advantages of DTP)
डीटीपी सॉफ्टवेयर का मुख्य काम इच्छित प्रिन्टिंग के कार्य को सही तरीके से एवं तेजी से कम्प्यूटर पर सेट करना हैं। कुछ सॉफ्टवेयर एकल पेज डिजाइनिंग के लिए प्रयोग होते हैं, जैसे कोई पोस्टर की डिजाइन बनाना हैं, या लेटरपैड की डिजाइन बनाना आदि। कुछ सॉफ्टवेयर बहु पेज दस्तावेज के सेटिंग के लिए प्रयोग होते हैं, जैसे किसी किताब की सेटिंग करना आदि।
डीटीपी से सम्बंधित कार्य करने के लिए कई सॉफ्टवेयर होते हैं जिनसे हम किसी भी Document, image को बहुत ही जल्दी और आसानी से तैयार कर सकते हैं जैसे – Adobe Pagemaker Adobe Photoshop, Coral Draw, Adobe in Design, Adobe Frame maker, Page Plus
कम्प्यूटर पर आधारित डेक्स टॉप पब्लिशिंग प्रणाली के निम्न लाभ हैं-
- गति (Speed) :- पुरानी पद्धति की तुलना मे इस प्रणाली में काम बहुत अधिक तेजी से किया जा सकता हैं। इसमें ना सिर्फ नये काम बना सकते हैं, अपितु पहले बनाये गये काम को भी तेजी से सुधार सकते हैं। इसमे टेक्स्ट फॉर्मेटिंग, फोटो में बदलाव करना आदि काम बहुत तेजी से किये जा सकते हैं।
- बदलाव (Changes) :- इस प्रणाली में बनाये गये डॉक्यूमेंट या फाइल में आसानी से सुधार एवं बदलाव कर सकते हैं। इसमें विभिन्न कामों को संग्रहित कर सकते हैं, जिससे उसे किसी भी समय खोल कर उसमें बदलाव कर सके इस प्रणाली में आप मूल डिजाइन को वैसे ही रखते हुए नये बदलाव भी कर सकते हैं। सभी डेक्स टॉप पब्लिकेशन पैकेज मे आपके द्वारा किये गये बदलाव स्क्रीन पर दिखते हैं। आधुनिक इंटरनेट के युग में आप दूरस्थ (remote location) कम्प्यूटर की डिजाइन में भी बदलाव कर सकते हैं।
- पेज सजावट (Page Formatting) :- डेक्स टॉप पब्लिकेशन के बहुत से सॉफ्टवेयर में विभिन्न पेज लेआउट दिये है, तथा बहुत से पेज सजावट के टूल हैं। कम्प्यूटर मे विभिन्न प्रकार के टेक्स्ट के प्रकार, जिन्हें हम font कहते हैं, उपलब्ध रहते हैं। इसमें विभिन्न प्रकार की बार्डर, क्लिप आर्ट पिक्चर, सिम्बल आदि उपलब्ध हैं, उनकी सहायता से बहूत अच्छे तरीके से पेज की फॉरमेटिंग कर सकते हैं।
- कम लागत (Low cost) :- पुराने समय में किसी किताब की कंपोजिंग करने के लिये बहुत अधिक समय लगता था, तथा उसमें बहुत से कुशल व्यक्तियों की आवश्यकता होती थी। यदि किसी काम में चित्र या पिक्चर डालना हो तब कुशल कलाकार की आवश्यकता होती थी। परन्तु आज किसी भी काम को डीटीपी पैकेज की सहायता से बड़ी किताब की भी कंपोजिंग बहुत जल्दी एवं अच्छी तरीके से की जा सकता हैं। डीटीपी पैकेज के कारण कंपोजिंग की लागत बहुत कम हो गई हैं।
- विभिन्न टूल (Various tool):- लगभग सभी डीटीपी पैकेजों में spell check, index, find and replace आदि टूल होते हैं इन टूल की सहायता से कार्य त्रुटि रहित एवं आसान हो गया हैं। यदि किसी व्यक्ति को किसी भाषा की बहुत अधिक जानकारी नही है, तब वह कंपोजिंग का कार्य कर सकता हैं। वर्तमान में कुछ सॉफ्टवेयर में अनुवाद (translation) की भी सुविधा दी गई हैं।
- फान्ट कर्निग (Font Kerning) :- अंग्रेजी भाषा में जब कोई टेक्स्ट टाइप करते हैं, तब उनके कैरेक्टर के बीच की दूरी अलग अलग रहती हैं। यह दूरी उन दो कैरेक्टर के shape पर निर्भर होती हैं। उदाहरण के लिए “TODAY” इस शब्द में “A” और “Y” के बीच अधिक दूरी हैं। इस प्रकार कैरेक्टर की दूरी अलग अलग होती हैं। फान्ट कर्निग सुविधा से हम कैरेक्टर की दूरी सेट कर सकते हैं। इससे टेक्स्ट डाटा अच्छा एवं पढ़ने में सरल हो जाता हैं।
