
चरित्र की पवित्रता🌴
*जब मानव अपनी संतान का जीवन सफल एवं उज्जवल बनाने का प्रयास करता है तब संतान केवल भौतिकवादी रह जाती है। इससे संतान सफल तो हो सकती है लेकिन उसके चरित्र का विकास नहीं होता है।
अगर मानव अपनी संतान को सफल के साथ-साथ चरित्रवान और नैतिक बनाने का प्रयास करता है तो संतान की सफलता तो सुनिश्चित होती ही है, साथ ही उसका चरित्र समाज के लिए अनुकरणीय हो जाता है।
संतान के चारित्रिक गुण उसके उज्जवल भविष्य के निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करते है।
चरित्र की पवित्रता बच्चों में सत्यनिष्ठता, नैतिकता, आत्मविश्वास, आत्म-नियंत्रण, मानवता, धैर्य, सामाजिक संबंधों के मूल्यों को भी समझने में अपना योगदान प्रदान करती है।
सत्यनिष्ठा संतानों में सच बोलने की प्रवृत्ति पैदा करती है। सच बोलने वाली संतान सदैव सिर उठाकर समाज में जीती है। ये बच्चे अपने परिवार तथा समाज के प्रति कर्तव्यों के प्रति समर्पित होते है।
सत्यनिष्ठा के मूल्य का अनुमान तो सिर्फ इसी बात से हो जाता है कि, बड़े से बड़ा कुटिल मानव भी अपने अधीनस्थ सिर्फ धर्मात्मा और सत्यनिष्ठ को ही चाहता है।
बच्चों में आत्मविश्वास, विचारों को , सकारात्मक दृष्टि प्रदान करने के साथ-साथ जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होता है। बच्चों में आत्मविश्वास का उच्च स्तर उन्हें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में मदद करता है | आत्मविश्वास आत्म-संदेह और अपने बारे में नकारात्मक/विनाशकारी विचारों से मुक्त करता है।
संतान में नैतिकता का जन्म उसको दिए गए संस्कारों से होता है। नैतिकता बच्चों को यह सिखाती है की उनका क्या दायित्व हैं, उनका कौन सा व्यवहार सही और कोन सा गलत है, एक अच्छा जीवन कैसे जीना है।
यह नैतिकता संतान को चरित्रवान बनाने के साथ-साथ उन्हें उनके दायित्व के प्रति निष्ठावान बनती है।
नैतिकता संतानों में सही निर्णय लेने की क्षमता को विकसित करती है। संतान द्वारा जीवन में लिए गए सही निर्णय उनके भविष्य को न केवल समृद्धशाली बनाकर सफलता के चरमोत्कर्ष पर पहुंचा देते हैं।
संतान में आत्म-नियंत्रण की क्षमता कामनाओं और भावनाओं को नियंत्रित कर उसे कर्तव्यों के प्रति पूर्ण समर्पित बना देती है। जिसके फलस्वरुप संतान में प्रेम और क्षमा का भाव उत्पन्न हो जाता है।
यही भाव संतान को समाज से जोड़ देता है , संतान का समाज से लगाव परिवार के प्रति व राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव पैदा कर देता है।
“अतः प्रत्येक मानव को अपनी संतान के जीवन को सफल व उज्जवल बनाने के प्रयास के बजाय सफल एवं चरित्रवान बनाने का प्रयास करना चाहिए”।
Dr. Pradeep Uppal Jabalpur
उप्पल सर, मध्य भारत के एक विचारशील सीनियर अध्यापक हैं, जिनके मार्गदर्शन से सैकड़ों बच्चे डॉक्टर और इंजीनियर बन चुके हैं, कई स्कूलों कॉलेज और यूनिवर्सिटी के बोर्ड मेंबर और विद्वत परिषद के सदस्य हैं।
आपने जबलपुर अभियान्त्रिकी महाविद्यालय से वर्ष 1987 में सिविल इंज़िनियरिंग में बीई किया है ।
आप वर्तमान में जबलपुर में निवासरत हैं।



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