Wealth redistribution plan of Rahul Gandhi

आपके वारिस को 45%, आपकी सम्पत्ति का शेष 55% कांग्रेस सरकार ज़ब्त करेगी।

वेल्थ रीडिस्ट्रिब्यूशन

अप्रैल में कांग्रेस के इलेक्शन मेनीफेस्टो निकालने के बाद राहुल गांधी ने संपत्ति के दोबारा बंटवारे की बात उठाई थी. राहुल गांधी ने कहा –

१- पहले हम देश का एक्सरे (कास्ट सेंसस) करेंगे ताकि कुल आबादी और उसमें माइनॉरिटी, पिछड़ा वर्ग, एससी, एसटी और बाकी जातियां की संख्या कितनी है पता करेंगे .

२- इसके बाद फाइनेंशियल सर्वे करेंगे , जिससे पता करेंगे देश में किस समुदाय के पास कितनी संपत्ति है।

३- जिसके बाद हम एतिहासिक काम करेंगे जिसमें संपत्ति, नौकरियों और बाकी वेलफेयर स्कीम्स को सभी समुदाय में संख्या के हिसाब से बराबर बांटने का काम शुरू करेंगे. 

राहुल गांधी कहते हैं कि उनकी सरकार आई तो वे जांच करेंगे कि कौन कितना कमाता है और उसके पास कितनी जायदाद है. इसके बाद सरकार उस प्रॉपर्टी को रीडिस्ट्रिब्यूट कर देगी.

किसी महिला के पास दो मंगलसूत्र है तो एक मंगलसूत्र सरकार ज़ब्त कर उसे देगी जिसके पास नहीं है ।

पित्रोदा के मुताबिक, पुश्तैनी जायदाद का 45% उसके वारिस को मिलेगा, बाकी 55% हिस्सा सरकार को चला जाएगा. पित्रोदा ने बताया अमेरिका के कई राज्यों में ऐसा क़ानून है ।

राहुल गांधी रॉबिन हुड स्कीम की तर्ज पर बात कर रहे हैं. रॉबिन हुड अमीरों को लूटकर उनके पैसे गरीबों में बांट देता.


इंडियन एक्सप्रेस ने इस रिपोर्ट पर एक ख़बर छापी है।

रिपोर्ट के आँकड़ों के अनुसार, हिंदू उच्च जातियों के पास देश की कुल संपत्ति का लगभग 41% हिस्सा है, इसके बाद हिंदू ओबीसी (31%) का स्थान है। मुसलमानों, एससी और एसटी के पास क्रमशः 8%, 7.3% और 3.7% संपत्ति है।

औसत घरेलू संपत्ति हिंदू उच्च जातियों में सबसे अधिक (27.73 लाख रुपये) थी, उसके बाद हिंदू ओबीसी की (12.96 लाख रुपये) थी।

मुस्लिम परिवारों की औसत संपत्ति (9.95 लाख रुपये) थी , एसटी की (6.13 लाख रुपये) और एससी परिवारों की संपत्ति (6.12 लाख रुपये) थी।

रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू ओबीसी के पास सोने का सबसे बड़ा हिस्सा (39.1%) था। हिंदू उच्च जातियों के पास (31.3%) था।

मुसलमानों के पास 9.2% है , एवं एसटी के पास (3.4%) है।,


भारतीय संविधान वेल्थ रीडिस्ट्रिब्यूशन पर सीधे-सीधे कोई बात नहीं करता।

संविधान का आर्टिकल 39 कहता है, भौतिक संसाधनों का मालिकाना हक और कंट्रोल इस तरह हो कि आम लोगों की भलाई हो सके.

आर्टिकल ३९ में आगे जोड़ा गया है कि राज्य अपनी पॉलिसी इस तरह बनाएं कि उनका इकनॉमिक सिस्टम वेल्थ कंसन्ट्रेशन की तरफ न जाए. वेल्थ कंसन्ट्रेशन का मतलब है कुछ लोगों के पास सबसे ज्यादा दौलत का होना. 


सर्वोच्च न्यायालय में भी 23 अप्रैल को नौ जजों की बेंच ने इसपर सुनवाई शुरू की, कि क्या प्राइवेट प्रॉपर्टी को भी समुदाय की संपत्ति माना जा सकता है.

इस मामले पर बहस करने वाले वकीलों का कहना है कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सबसे ऊपर रखने वाले देश में इस तरह की सोच का कोई मतलब नहीं. 


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