Unit IV- Types of network, Network devices

नेटवर्क के प्रकार:-

नेटवर्क तीन प्रकार के होते है —

1- लैन (LAN)     2-वैन(WAN)      3-मैन(MAN)

लैन (LAN):-

LAN  एक छोटे भौगोलिक क्षेत्र (जैसे घर, ऑफिस, स्कूल या इमारत) में कंप्यूटर्स और डिवाइसेस को आपस में जोड़ने वाला नेटवर्क है। यह उपकरणों के बीच डेटा, प्रिंटर, इंटरनेट और अन्य संसाधनों को शेयर करने में मदद करता है।

लैन की विशेषताऍं:-

इसका कवरेज एरिया छोटा होता है (10 मीटर से 1 किमी तक), हाई स्पीड डेटा ट्रांसफर करता है (10 Mbps से 10 Gbps तक), इसकी लागत काम होती है (केवल केबल्स और स्विच का उपयोग होता है ), प्राइवेट नेटवर्क होने के कारन सुरक्षित और कंट्रोल्ड होता है , लीज्‍ड दूरसंचार लाइनों की कोई आवश्‍यकता नहीं होती है, लेकिन इससे कम्‍प्‍यूटरों की सीमित संख्‍या को कनेक्‍ट कर सकते हैं।

वैन(WAN):-

इसका पूरा नाम वाइड एरिया नेटवर्क WAN) है। यह नेटवर्क न केवल एक बिल्डिंग, न केवल शहर तक सीमित रहता है बल्कि यह पूरे विश्‍व को जोड़ने का कार्य करता है। अर्थात यह सबसे बड़ा नेटवर्क होता है इसमें डाटा को सुरक्षित भेजा और प्राप्‍त किया जाता है।

वैन की विशेषताऍं :-

  • यह तार रहित नेटवर्क होता है।
  • इसमें डाटा को संकेतों या उपग्रह के द्वारा भेजा और प्राप्‍त किया जा सकता है
  • यह सबसे बड़ा नेटवर्क होता है
  • इसके द्वारा हम पूरी दुनिया में डाटा ट्रांसफर कर सकते है।

मैन(MAN):-

इसका पूरा नाम मेट्रोपॉलिटन एरिया नेटवर्क MAN होता है। यह ऐसा उच्‍च गति नेटवर्क होता है जो आवाज, डाटा और इमेज को 200 मेगाबाइट प्रति सेकंड या इससे अधिक गति से 75 किमी की दूरी तक ले जा सकता है। एक मैन में एक या एक से अधिक लैन, दूसरे दूरसंचार उपकरण जैसे माइक्रोवेव और उपग्रह रिले स्‍टेशन भी  शामिल हो सकते है। यह वैन से छोटा होता है, किन्‍तु अधिक गति पर कार्य करता  है।

मैन की विशेषताऍं :-

1. कस्‍बों और नगरों को कवर करता है।  

2. मैसेज रूटिंग तेज होती है।

3.इसमें फाइबर ऑप्टिक और केबल, माध्‍यम के रूप में प्रयुक्‍त होते हैं।

4. यह 75 किमी तक कवर करता है।


इंटरनेट:-

इंटरनेट विभिन्न संस्थानों, कम्पनियों, विश्वविद्यालयों आदि के कम्‍प्‍यूटर तथा नेटवर्को को परस्पर जोड़ने वाला एक अन्तसर्राष्ट्रीय कम्यूटर नेटवर्क है।इन कंप्यूटर को तार, अण्डर सी केबल,सेटेलाइट, संचार उपकरण एवं विभिन्न सॉफ़्टवेयर की सहायता से एक दूसरे से जोड़ा जाता ।

वी.पी.एन VPN:-

वी.पी.एन इंटरनेट पर उपयोग की जाने वाली सेवा है। VPN एक ऐसी तकनीक है जो इंटरनेट कनेक्शन को एन्क्रिप्ट (सुरक्षित) करती है। यह डाटा को लीक होने से बचाती है और आपको ऑनलाइन गोपनियता प्रदान करती है। वीपीएन आईपी(IP) एड्रैस को छिपाता है जिसकी वजह से आप ऑनलाइन खुद को गोपनीय रख पाते हैं। VPN इंटरनेट पर प्राइवेसी और सुरक्षा का सबसे अच्छा तरीका है।

 इसका उपयोग सुरक्षित रूप से इंटरनेट ब्राउज़ करने, जियो-रिस्ट्रिक्टेड कंटेंट एक्सेस करने (जैसे Netflix, Hotstar) और पब्लिक Wi-Fi पर हैकिंग से बचने के लिए किया जाता है।

अगर डेटा सुरक्षित रखना हो, ब्लॉक वेबसाइट्स एक्सेस करना हो, या पब्लिक नेटवर्क पर सुरक्षित ब्राउज़िंग करना हो, तो VPN जरूर इस्तेमाल करना चाहिए ।

 VPN के नुकसान

❌ स्पीड कम हो सकती है (क्योंकि डेटा VPN सर्वर से होकर गुजरता है)।इन्‍साटालेशन जटिल।
❌ फ्री VPN खतरनाक (कुछ फ्री VPN आपके डेटा को बेचते हैं)। कमजोर वी.पी.एन. प्रौद्योगिकी मानक।
❌ कुछ देशों में बैन (चीन, रूस जैसे देश VPN पर रोक लगाते हैं)। इण्टरनेट आधारित वी.पी.एन. पूरी तरह से संगठन के नियंत्रण में नही।

टोपोलॉजी:-

टोपोलॉजी नेटवर्क की आकृति या लेआउट को कहा जाता है। नेटवर्क के विभिन्न नोड किस प्रकार एक दूसरे से जुड़ते है। तथा कैसे एक दूसरे के साथ कम्यूहनिकेशन स्थापित करते हैं, यह उस नेटवर्क की टोपोलॉजी ही निर्धारित करती है। टोपोलॉजी फिजीकल या लॉजिकल होती हैं।

टोपोलॉजी के प्रकार :-

1.रिंग टोपोलॉजी

2. बस टोपोलॉजी

3. स्टार टोपोलॉजी

4. ट्री टोपोलॉजी


रिंग टोपोलॉजी Ring Topology :-

Ring Topology नेटवर्क में कोई होस्ट, या सेन्ट्रल कम्यूटर नहीं होता। सभी एक गोलाकार आकृति के रूप में लगे होते हैं। प्रत्येक कम्यूटर अपने अधीनस्थ (सबआर्डिनेट) कम्यूटर से जुड़ा होता है, किन्तु् इनमें कोई भी मास्टर कंप्यूटर नहीं होता। इसे सर्कुलर नेटवर्क भी कहा जाता है।

लाभ :-
1.यह नेटवर्क अधिक कुशलता के साथ कार्य करता है, क्योंकि इसमें कोई होस्ट या कन्ट्रोलिंग कम्यूटर नहीं होता।
2. यह स्टार से अधिक विश्वसनीय है, क्योंकि यह किसी एक कम्यूटर पर निर्भर नहीं होता।
3.इस नेटवर्क की यदि कोई एक लाइन या कम्यूटर कार्य करना बन्द कर दे तो दूसरी दिशा की लाइन के द्वारा काम किया जा सकता है।

हानि:-
1.इसकी गति नेटवर्क में लगे कम्यूटर पर निर्भर करती है। यदि कम हैं तो गति अधिक होती है और यदि कम्यूटरों की संख्या अधिक है तो उसी अनुपात में गति कम होती चली जाती है।
2. यह स्टार नेटवर्क की तुलना में कम प्रचलित है, क्यों कि इस नेटवर्क पर कार्य करने के लिये अत्यन्त जटिल सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है।

बस टोपोलॉजी BUS Topology:-

बस टोपोलॉजी में एक ही तार (केबल) का प्रयोग होता है। सभी कम्यूटर तथा अन्य. डिवाइस उस तरह से एक क्रम में जुड़े होते हैं। तार के प्रारम्भ तथा अंत में एक विशेष प्रकार का डिवाइस लगा होता है जिसे टर्मिनेटर कहते हैं।इसका कार्य सिग्नल्स को एक प्रकार से नियंत्रण में रखता है।

लाभ:-
1.बस टोपोलॉजी को इंस्टालेशन करना आसान होता है।
2. इसमें स्टातर व ट्री टोपोलॉजी की तुलना में कम केबिल प्रयोग होती है।

हानि:-
1. किसी एक कम्यूटर की खराबी से सारा संचार रूक जाता है।
2. संरचना में किसी नये कम्यूटर को जोड़ना अपेक्षाकृत कठिन है।

स्टार टोपोलॉजी Star Topology :-

स्टार टोपोलॉजी नेटवर्क में एक होस्ट कम्यूटर होता है जिसे सीधे विभिन्न लोकल कम्यूम्टर्स से जोड़ दिया जाता है। लोकल कम्यूटर सीधे आपस में एक-दूसरे से नहीं जुड़े हैं। इनको आपस में होस्ट कम्यूटर द्वारा जोड़ा गया है। होस्ट कम्यूटर द्वारा ही पूरे नेटवर्क को कन्ट्रोल किया जाता है।

लाभ:-
1.इस नेटवर्क टोपोलॉजी में एक कम्यूटर से होस्ट कम्यूटर को जोड़ने में लाइन बिछाने की लागत कम आती है।
2.इसमें लोकल कम्यूटर की संख्या बढ़ाये जाने पर दूसरे कम्य्टर पर सूचनाओं के आदान-प्रदान की गति प्रभावित नहीं होती है, क्योंकि दो कम्यूटर के बीच केवल होस्ट कम्यूंटर ही होता है।
3.यदि कोई लोकल कम्यूटर खराब होता है तो शेष नेटवर्क इससे प्रभावित नही होता है।

हानि:
1.यह पूरा सिस्टम होस्ट कम्यूटर पर निर्भर है। यदि होस्ट कम्यूटर खराब हो जाये तो पूरा का पूरा नेटवर्क फेल हो जायेगा।

ट्री टोपोलॉजी Tree Topology :-

ट्री टोपोलॉजी में बस तथा स्टार दोनों प्रकार की टोपोलॉजी के लक्षण विद्यमान होते हैं। इसमें स्टार टोपोलॉजी की भॉंति वर्कस्टेशन का एक समूह होता है जोकि बस बैकबोन तार से जुड़ा होता है। ट्री टोपोलॉजी में पूर्व-निर्मित नेटवर्क का विस्तार हो सकता है।

लाभ:-
1.प्रत्येक खंड के लिए प्वा्इंट टू प्वााइंट तार बिछाया जाता है।
2.कई हार्डवेयर तथा सॉफ्टवेयर विक्रताओं के द्वारा सपोर्ट किया जाता है।

हानि:-
1.प्रत्येक खण्ड की कुल लम्बाई प्रयोग में लाये गये तार के द्वारा सीमित होती है।
2.यदि बैकबोन लाइन टूट जाती है तो पूरा सेग्मेंट रुक जाता है।
3.अन्य टोपोलॉजी की अपेक्षा इसमें तार बिछाना तथा इसे कन्फीगर करना कठिन होता है।

एनआईसी (NIC):-

इसका पूरा नाम नेटवर्क इंटरफेस कार्ड NIC होता है। यह एक प्रकार का विस्‍तारक बोर्ड (एक्‍सटेंशन बोर्ड) होता है जिसे कम्‍प्‍यूटर में लगा कर कम्‍प्‍यूटर को एक नेटवर्क से जोड़ा जाता है।

अधिकतर नेटवर्क इंटरफेस कार्ड एक विशेष प्रकार के नेटवर्क,प्रोटोकाल तथा मीडिया के लिए डिजाइन किये जाते हैं. कुछ कार्ड कई असमान नेटवर्क में भी प्रयोग किये जाते है।

एनओएस(NOS लैन या नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्‍टम):

एनओएस एक विशेष प्रकार का ऑपरेटिंग सिस्टम है। यह नेटवर्क डिवाइस (जैसे सर्वर, राउटर, स्विच) को मैनेज करने और क्लाइंट कंप्यूटर्स के बीच संचार स्थापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

यह नेटवर्क रिसोर्सेज (फाइल्स, प्रिंटर, एप्लिकेशन) को शेयर और सुरक्षित करता है।

लोकप्रिय NOS सॉफ्टवेयर

NOS का नामप्रकारउपयोग
Windows Serverक्लाइंट-सर्वरबड़े बिजनेस नेटवर्क
Linux (Samba)क्लाइंट-सर्वरओपन-सोर्स नेटवर्किंग
Novell NetWareक्लाइंट-सर्वरपुराने एंटरप्राइज नेटवर्क
macOS Serverक्लाइंट-सर्वरApple डिवाइस नेटवर्किंग

नेटवर्क डिवाइस के प्रकार :-

ब्रिज:-

इसके माध्‍यम से दो लोकल एरिया नेटवर्क कोदल आपस में जोड़ा जा सकता है जब उनके साफ्टवेयर एक ही प्रकार हों तथा कम्‍प्‍यूटर अलग तरह के हों। एक बार जब ब्रिज के माध्‍यम से दो लेनों को आपस में पोर्ट के माध्‍यम से जोड़ दिया जाता है तो विभिन्‍न डिवाइसेज आपस में आसानी से जुड़ जाती हैं।

हब:-

हब एक नेटवर्किंग डिवाइस है जिसका काम कम्‍प्‍यूटर्स को आपस में जोड़ना और नेटवर्क को एक्‍सटेंड करना है। हब को जो भी सूचना मिलती है, वह उसे अपने से कनेक्‍टेड सभी डिवाइस में भेजता है

राउटर्स:-

यह एक नेटवर्किंग डिवाइस है जिसका काम दो अलग–अलग नेटवर्क्‍स को आपस में जोड़ना और पैकेट को बताना है कि सोर्स से डेस्टिनेशन तक का सबसे छोटा रास्‍ता कौन सा है। राऊटर एक लेयर 3 नेटवर्क डिवाइस है और यह ओएसआई मॉडल की नेटवर्क लेयर पर ऑपरेट करती है। राऊटर टीसीपी/आईपी प्रोटोकॉल का उपयोग करता है। इसी प्रोटोकॉल के माध्‍यम से नेटवर्क में डाटा का आदान-प्रदान होता है।I

रिपीटर:-

जब सूचानाओं के सिग्‍नल एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान पर भेजे जाते हैं तो सिग्‍नल कमजोर पड़ जाते हैं। उन्‍हें परिवर्तित करने के लिए रिपीटर का प्रयोग किया जाता  है। एक नेटवर्क से प्राप्‍त सिग्‍नल रिपीटर द्वारा दूसरे नेटवर्क को भेजे जाते है।यह सिग्‍नल डाटा या आवाज के रूप में हो सकते हैं।

गेटवे:-

गेटवे एक ऐसा सिस्‍टम है जिसमें विशेष प्रकार के साफ्टवेयर व हार्डवेयर होते है इसकी कार्य-प्रणाली रूटर्स से भी उच्‍च होती है। यह दो अलग प्रकार के नेटवर्को को भी आपस में जोड़ सकता है।यदि आपके पास ऐसा नेटवर्क है जिसके अलग-अलग कई खण्‍ड हैं, जैसे यूनिक्‍स और डॉस का तब इनके बीच नेटवर्किंग के लिए गेटवे का प्रयोग होता है।

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