Unit-V-Funda-Disk operating system

डॉस (डिस्‍क ऑपरेटिंग सिस्‍टम):-

इसे एमएस डॉस भी कहते है। यह एक सीयूआई (करेक्टर यूजर फेस ) ऑपरेटिंग सिस्‍टम है। विंडोज विकसित होने के पहले यह सबसे लोकप्रिय ऑपरेटिंग सिस्‍टम था। माइक्रो कम्‍प्‍यूटर में यह प्रयोग होता था।
वर्ष 1984 में इनटेल 80286 प्रोसेसर युक्त माइक्रो कम्‍प्‍यूटर विकसित हुए जिन्हे pc कहा जाता था, इनके लिए एम एस डॉस 3.0 और एम एस डॉस 4.0 संस्‍करण का  विकास किया गया। DOS का विकास माइक्रौसौफ़्ट कंपनी ने किया था।

डॉस के कार्य :-

यह की बोर्ड से कमांड लेता है और उनकी व्याख्‍या करता है।

2. यह सिस्‍टम की सभी फाइलों को दिखाता है।

3. यह प्रोग्राम के लिए नई फाइलें और अलॉटस स्‍पेस बनाता है।

 4. यह पुराने नाम के स्‍थान पर एक फाइल का नाम बदलता है।

 5. यह फाइल का पता लगाने में मदद करता है।

डॉस की विशेषताएं:-

1. यह फाइल प्रबंधन को बेहतर बनाने में सहायक है।जैसे फाइल बनाना, संपादित करना, हटाना आदि।

2. यह उपयोगकर्ता ऑपरेटिंग सिस्‍टम है।कोई भी यूजर इस इस ऑपरेटिंग सिस्‍टम में एक समय पर काम कर

सकता है।

3.एम एस डॉस 16 बिट ऑपरेटिंग सिस्‍टम है।

4. डॉस सरल टेक्‍स्‍ट कमांड ऑपरेटिंग सिस्‍टम है।

5. डॉस टेक्‍स्‍ट आधरित इंटरफेस का उपयोग करता है।

डॉस प्रोम्‍प्‍ट एवं ड्राइव नेम

  1. डॉस की रैम में लोड होते ही मॉनिटर पर निम्‍नलिखित में से कोई एक चिन्‍ह प्रदर्शित होता है-
  2. A:/>    or  C:/>
  3. उपर्युक्‍त चिन्‍ह डॉस प्राम्‍प्‍ट या सिस्‍टम प्रोम्‍प्‍ट कहलाते हैजो यह दर्शाते है की डॉस लोड हो चुका है और यूजर कमांड लेने के लिए तैयार है। हम जो कमांड टाइप करते है। यह प्रोम्‍प्‍ट के सामने ही टाइप होता है।जब फ्लापी डिस्‍क पर कार्य करते है तो A:/>ये जो चिन्‍ह आता है जो A प्रोम्‍प्‍ट कहलाता है।
  4. हार्ड डिस्‍क पर कार्य करने पर C:/>आता है, जो C प्रोम्‍प्‍ट कहलाता है अगर सिस्‍टम में दो फ्लापी ड्राइवर है, तो पहली ड्राइव A प्रोम्‍प्‍ट तथा दूसरी ड्राइव B (B:/>)प्रोम्‍प्‍ट द्वारा दर्शाते है।
  5. इस प्रकार डॉस प्रोम्‍प्‍ट क्रियाशील ड्राइव तथा डायरेक्‍ट्री का नाम प्रदर्शित करता है। अगर हार्ड डिस्‍क में  एक अधिक पार्टीशन किये गये हो तो इन्‍हें क्रमश:C,D,E आदि नाम ( ड्राइव नेम ) दिया जाता है।
  6. एफएटी (FAT):- इसका पूरा नाम फाइल अलोकेशन टेबल है जिसका प्रयोग डिस्‍क में फाइलों के संग्रहण  का रिकार्ड रखने के लिए होता है। फैट के प्रमुख  प्रकार FAT12, FAT16, FAT32 आदि। FAT फाइल हार्ड डिस्‍क छोटे- छोटे खंण्‍डो में विभाजित करती है। जिन्‍हें क्‍लस्‍टर कहते है। क्‍लस्‍टर एक या एक से अधिक संख्‍या डिस्‍क के घनत्‍व पर निर्भर करती है, यह संख्‍या 1 से 128 सैक्‍टर प्रति क्‍लस्‍टर हो सकते है। जब हम कोई फाइल सेव करते है तो यह अपने आकार  के अनुसार डाटा एरिया में एक या एक से अधिक क्‍लस्‍टर में संग्रहीत होती है।

फाइल एण्‍ड डायरेक्‍ट्री स्‍ट्रक्‍चर:-

फाइल के नाम :-

कंप्यूटर में प्रत्येक फाइल का एक नाम होता है, इस नाम के दो भाग होते है-
1. प्राथमिक नाम 2. विस्ता्रक नाम

डायरेक्‍ट्री:-

फोल्डर और फाइल जिस कंटेनर में सेव होते है उसे डायरेक्ट्री कहते है। यह हायरेकल तरीके से फाइल और फोल्‍डर को व्‍यवस्थित करता है। बहुत सारे यूजर एक फाइल सिस्‍टम में हजारों और लाखों फाइल को क्रियेट करते है। डायरेक्ट्री  हार्ड डिस्‍क में फाइल का एक कलेक्‍सन होता है।

फाइल के नामकरण के नियम :-

फाइल का नाम रखते समय निम्न बातों का ध्यान रखना आवश्यक है :

  1. फाइल का प्राथमिक नाम 1 से 8 अक्षरों तक का हो सकता है।
  2. नाम के बीच में स्पेस नहीं होना चाहिए।
  3. डॉस में फाइल के नाम में अक्षरों (A से Z), अंकों (0 से 9) तथा केवल निम्न विशेष अक्षरों का उपयोग किया जा सकता है —
    ~ ! $ ^ & ( ) - { }
    इसके अतिरिक्त अन्य विशेष अक्षरों [ ] / < > आदि का उपयोग फाइल के नाम में नहीं किया जा सकता।
  4. डॉस कंप्यूटर के विभिन्न उपकरणों के लिए कुछ विशेष नामों का उपयोग करता है, जिन्हें डिवाइस नेम कहा जाता है।
  5. प्राथमिक नाम और विस्तारक (Extension) नाम के बीच . (डॉट) होना चाहिए।
  6. डॉट के पहले और बाद में खाली स्थान नहीं होना चाहिए।

बूटिंग प्रोसेस :-

कम्‍प्‍यूटर को आन करने से लेकर डॉस प्राम्‍प्‍ट तक आने तक की पूरी प्रक्रिया बूटिंग प्रोसेस कहलाती है जिसमें मुख्‍य रूप से डास डिस्‍क से रैम में लोड होता है तथा कुछ अन्‍य क्रियायें सम्‍पन्‍न होती है ये क्रियाये तथा इनका क्रम निम्‍नलिखित है।

1. पोस्‍ट           2.  बूट रिकार्ड         3. डास कर्नेल         4.  सिस्‍टम कन्‍फीग्रेशन    5. कमाण्‍ड.काम   6. आटो इक्‍ज्‍यूट.बैट 7.   डास प्राम्‍पट

पोस्ट (Power On Self Test) :- पावर ऑन होते ही कंप्यूटर सबसे पहले अपनी स्वयं की मेमोरी तथा जुड़े हुए सभी उपकरणों को जाँचता है कि वे सही कार्य कर रहे हैं या नहीं तथा कहीं कोई कनेक्शन निकला तो नहीं है। यह प्रक्रिया पावर ऑन सेल्फ टेस्ट या संक्षेप में POST कहलाती है। किसी भी प्रकार की समस्या होने पर संबंधित एरर संदेश प्रदर्शित होता है।

बूट रिकॉर्ड :- POST द्वारा की जाने वाली जाँच के बाद कंट्रोल बूट रिकॉर्ड को स्थानांतरित हो जाता है। बूट रिकॉर्ड डिस्क के विषय में संपूर्ण जानकारी प्रदर्शित करता है। यह जानकारी डिस्क से सूचनाएँ प्राप्त करने के लिए आवश्यक होती है।

डॉस कर्नेल :- यह तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण चरण है, जिसमें डॉस कर्नेल मेमोरी में लोड होता है। डॉस कर्नेल ऑपरेटिंग सिस्टम का केंद्रीय भाग होता है, जो दो विशेष सिस्टम फाइलों से मिलकर बना होता है। ये दोनों फाइलें हिडन मोड में होती हैं।

सिस्टम कॉन्फ़िगरेशन :- डॉस कर्नेल लोड होने के बाद कंप्यूटर इस चरण में कॉन्फ़िगरेशन फाइल को खोजता है तथा इस फाइल में दिए गए पैरामीटर के अनुसार सिस्टम की विभिन्न इंटरनल सेटिंग करता है। CONFIG.SYS एक ऐसी फाइल है, जिसमें प्रयोगकर्ता स्वयं अपनी आवश्यकता के अनुसार सिस्टम सेटिंग से संबंधित विभिन्न मान निर्धारित कर सकता है।

कमांड कॉम फाइल :- पाँचवें चरण में डॉस की एक और महत्वपूर्ण फाइल COMMAND.COM मेमोरी में लोड होती है। डॉस के सभी इंटरनल कमांड इसी फाइल के माध्यम से चलते हैं।

ऑटो एग्जीक्यूटेबल बैच फाइल :- इस चरण में COMMAND.COM फाइल स्वयं ही ऑटो एग्जीक्यूटेबल बैच फाइल को खोजकर चलाती है। AUTOEXEC.BAT एक बैच फाइल है, जिसके द्वारा हम सिस्टम की डेट, टाइम तथा विभिन्न सॉफ्टवेयर के पाथ सेट कर सकते हैं।

डॉस प्रॉम्प्ट :- पूरी प्रक्रिया सम्पन्न होने के बाद अंत में मॉनिटर पर डॉस प्रॉम्प्ट दिखाई देता है, जो यह बताता है कि डॉस लोड हो चुका है और कंप्यूटर हमारे कार्य के लिए तैयार है।

डॉस सिस्टम फाइल :- वे प्रमुख फाइलें, जिनसे मिलकर डॉस ऑपरेटिंग सिस्टम बना होता है, डॉस की सिस्टम फाइलें कहलाती हैं। ये फाइलें कुछ विशेष कार्यों, जैसे बूटिंग प्रक्रिया को सम्पन्न करना, इनपुट/आउटपुट डिवाइसेस का निर्धारण एवं संयोजन, डॉस के आंतरिक निर्देशों को मेमोरी में लोड करना तथा स्टोरेज डिवाइसेस का प्रबंधन आदि कार्यों के लिए बनाई जाती हैं। इन फाइलों के एक्सटेंशन नाम .SYS, .COM आदि होते हैं, जो यह दर्शाते हैं कि ये सिस्टम एवं कमांड फाइलें हैं। डॉस ऑपरेटिंग सिस्टम मुख्यतः तीन फाइलों से मिलकर बना होता है।

  1. IO.SYS और MS DOS.SYS फाइल
  2. COMMAND.COM फाइल
  3. CONFIG.SYS फाइल

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