Unit IV-Communication Network -use process and components

परिचय (Definition, Use of Communication):-

कम्‍प्‍यूनिकेशन (संचार) का अर्थ है कि सूचनाओं का अदान प्रदान करना है। ये सूचनाऍ तब तक उपयोगी नही हो सकती जब तक कि इन सूचनाओं का अदान प्रदान न हो।

पहले सूचनाओ या संदेश को एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान पर भेजने में काफी समय लगता था। किन्‍तु वर्तमान में संदेशो का अदान प्रदान बहुत ही आसान हो गया और समय भी कम लगता है।

इस पेज में हम communication network, simplex, duplex, full duplex, twisted pair, coaxial cable, optical fiber, types of network, peer to peer, broadband, leased line इत्यादि के बारे में पढ़ेंगे.

कम्‍यूनिकेशन प्रोसेस:-

कम्‍प्‍यूनिकेशन का उदेश्‍य डाटा व सूचनाओं का अदान प्रदान करना होता है। डाटा कम्‍प्‍यूनिकेशन से तात्‍पर्य दो सामान्‍य या विभिन्‍न डिवाइसो के मध्‍य डाटा का अदान प्रदान से है। अर्थात कम्‍प्‍यूनिकेशन करने के लिए हमारे पास समान डिवाइस होना आवश्‍यक है।

डाटा कम्‍प्‍यूनिकेशन के प्रभाव को 3 मुख्‍य विशेषताओं के द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है।

डिलीवरी:-

डिलीवरी से तात्‍पर्य डाटा को एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान तक प्राप्‍त करने से है।

शुद्धता (एक्यूरेशी):- 

यह डाटा की गुणवत्‍ता या डाटा के सही होने को दर्शाता है।

समयबद्धता(टाइमलाइन) :-

इस गुण डाटा के कारण ही डेटा निश्चित समय में डिलेवर होता है।

संचार के घटक (कंपोनेटस आफ कम्‍यूनिकेशन):-

1.मैसेज:- वह जानकारी जिसका अदान प्रदान किया जाता है।
2.सेन्डर:- यह वह व्यक्ति होता है जो मैसेज भेजता है।
3.मीडियम:- मैसेज भेजने के लिए जिन माध्यिमों का प्रयोग किया जाता है वह मीडियम कहलाता है।
4.रिसीवर:- यह वह व्यक्ति होता है जो मैसेज को रिसीव करता है।
5.प्रोटोकॉल:- प्रोटोकाल होता है जो डाटा कम्यूजनिकेशन को कंट्रोल करता है।

कम्‍यूनिकेशन के प्रकार:-

सिम्‍पलेक्‍स हाफ डुप्‍लेक्‍स फूल डुप्‍लेक्‍स

1. सिम्‍पलेक्‍स Simplex:-

इस ही दिशा में होता हैं। अर्थात हम अपनी सुचानाओं को केवल भेज सकते है, प्राप्‍त नहीं कर सकते सिम्‍पलेक्‍स Simplex कम्‍यूनिकेशन कहलाता हैं।

जैसे कीबोर्ड , कीबोर्ड से हम केवल सूचानाये भेज सकते हैं प्राप्‍त नहीं कर सकते।

2. हाफ डुप्‍लेक्‍स Half Duplex:-

इस अवस्‍था में डाटा का संचरण दोनों दिशाओं में होता है। लेकिन एक समय में एक ही दिशा में संचरण होता है। यह अवस्‍था वैकल्पिक द्वि-मार्गी (टू वे अल्‍टरनेटिव ) भी  कहलाती है। अर्थात इस अवस्‍था में हम अपनी सूचनाओं को एक ही समय में या तो भेज सकते है या रिसीव कर सकते है।

जैसे हार्डडिस्‍क, हार्डडिस्‍क से डाटा का अदान-प्रदान हाफ डुपलेक्‍स अवस्‍था में होता है।

3. फुल डुप्लेक्स Full Duplex:-

इस अवस्था में डाटा का संचरण एक समय में दोनो दिशाओं में संभव होता है। हम एक ही समय में दोनो दिशाओं में सूचनाओं का संचरण कर सकते है. अर्थात हम एक ही समय में सूचनाऍ भेज भी कर सकते है और प्राप्तओ कर सकते है।

कम्‍युनिकेशन चैनल:-

नेटवर्क केबल :-

केबल सूचना को एक नेटवर्क डिवाइस से दूसरे नेटवर्क डिवाइस तक भेजने वाला एक माध्‍यम होता है। लैन के साथ उपयोग किए जाने वाले केबल कई प्रकार के उपलब्‍ध है। केबल के प्रकार का चयन नेटवर्क की टोपोलॉजी प्रोटोकॉल एवं आकार पर निर्भर करता है।

नेटवर्क में उपयोग आने वाली केवल निम्‍न प्रकार हैं:-

ट्विस्‍टेड पेअर केबल Twisted Pair Cable:-

यह ऐसी केबल होती है जिसमें दो वायर या तार आपस में एक – दूसरे लिपटे रहते है। इस प्रकार के केबल में कॉपर वायर का इस्‍तेमाल किया जाता है, क्‍योंकि कॉपर विद्वुत का अच्‍छा सुचालक है। इन कॉपर के तारों के बाहर से प्‍लास्टिक की कोटिंग की जाती है।

ट्विस्‍टेड पेअर केबल का उपयोग:-

लोकल एरिया नेटवर्क में उपकरणों को जोड़ने के लिए किया जाता है।इसमे तारो का इस्‍तेमाल टेलीफोन लाइन में डाटा चैनल और आवाज उपलब्‍ध कराने के लिए किया जाता है।

लैन में 10 बेस टी और 100 बेस टी में भी ट्विस्‍टेड पेअर केबल का उपयोग किया जाता है।


कोएक्सियल केबल Coaxial Cable:-

कोएक्सियल Coaxial केबल एक प्रकार का ट्रांसमिशन केबल है।इसके  केंद्र में एक तांबे का कंडक्टर (Copper Conductor) और उसके चारों ओर इंसुलेशन, धातु की ब्रैडिंग (Shielding) तथा आउटर कवर होता है। यह हाई-फ्रीक्वेंसी सिग्नल (जैसे TV, इंटरनेट, रेडियो) को कम हस्तक्षेप (Low Interference) के साथ ट्रांसमिट करता है।

कोएक्सियल केबल में 4 मुख्य परतें होती हैं:

1 केंद्रीय कंडक्टर (Inner Conductor): तांबे की तार (सिग्नल ट्रांसमिट करती है)।

2 इंसुलेशन (Dielectric Insulator): प्लास्टिक/फोम लेयर (कंडक्टर को शील्ड से अलग करता है)।

3 शील्डिंग (Metal Braid/Shield): एल्युमिनियम या तांबे की जाली (EMI/RFI इंटरफेरेंस रोकती है)।

4 आउटर जैकेट (Outer Cover): PVC या रबर का लचीला आवरण (केबल को सुरक्षा देता है)।

 [केंद्रीय कंडक्टर] → [इंसुलेशन] → [शील्डिंग] → [आउटर जैकेट]

उपयोग (Applications)

केबल टेलीविजन (DTH/Set-Top Box), ब्रॉडबैंड इंटरनेट (DOCSIS टेक्नोलॉजी), CCTV सिस्टम

रेडियो एंटेना और मोबाइल टावर, पुराने इथरनेट नेटवर्क (10BASE2/10BASE5)


 फायदे (Advantages)

✅ कम इंटरफेरेंस: शील्डिंग के कारण EMI/RFI का प्रभाव नगण्य।
✅ हाई बैंडविड्थ: 1 GHz तक की फ्रीक्वेंसी सपोर्ट करता है।
✅ लंबी दूरी: RG-11 जैसे केबल्स 500m+ तक सिग्नल भेज सकते हैं।
✅ सस्ता और टिकाऊ: फाइबर के मुकाबले कम कीमत।

नुकसान (Disadvantages)

❌ स्पीड लिमिटेशन: फाइबर ऑप्टिक के मुकाबले धीमा (अधिकतम 10 Gbps, DOCSIS 3.1)।
❌ भारी और लचीलेपन में कमी: ट्विस्टेड पेयर केबल की तुलना में मोटा।
❌ सिग्नल लॉस: लंबी दूरी पर सिग्नल कमजोर हो जाता है।

कोएक्सियल केबल के उपयोग:-

1. टेलीविजन वितरण 2. लंबी दूरी का टेलीफोन संचरण 3. कम्‍प्‍यूटर प्रणाली लिंग 4. लोकल एरिया नेटवर्क।


ऑप्टिकल फाइबर केबल (Optical Fiber Cable):-

ऑप्टिकल फाइबर एक हाई-स्पीड डेटा ट्रांसमिशन माध्यम है। यह केबल कांच (Glass) या प्लास्टिक के बेहद पतले तारों (फाइबर्स) से बना होता है। यह प्रकाश (Light) के माध्यम से डिजिटल सिग्नल को बहुत तेज गति से भेजता है।

ऑप्टिकल फाइबर में तीन मुख्य परतें होती हैं: पहली कोर (Core): कांच/प्लास्टिक का पतला हिस्सा, जहाँ प्रकाश यात्रा करता है। उसके उपर क्लैडिंग (Cladding): कोर को घेरने वाली परत, जो प्रकाश को कोर में ही रिफ्लेक्ट करती है। सबसे उपर बफर कोटिंग (Buffer Coating): बाहरी प्लास्टिक लेयर, जो फाइबर को नुकसान से बचाती है।

 [कोर (Core)] → [क्लैडिंग (Cladding)] → [बफर कोटिंग (Buffer)]

उपयोग (Applications)

टेलीकम्युनिकेशन: Jio, Airtel फाइबर नेटवर्क , इंटरनेट: FTTH (Fiber to the Home) कनेक्शन, मेडिकल: एंडोस्कोपी, लेजर सर्जरी, डिफेंस & एयरोस्पेस: हाई-सिक्योर कम्युनिकेशन, CCTV & ब्रॉडकास्टिंग: HD वीडियो ट्रांसमिशन

6. फायदे (Advantages)

✅ अतितीव्र गति: 1 Gbps से 100 Tbps तक स्पीड
✅ लंबी दूरी: बिना सिग्नल लॉस के 100+ km तक डेटा भेज सकता है
✅ सुरक्षा: हैकिंग मुश्किल (कोई EMI/RFI इंटरफेरेंस नहीं)
✅ हल्का & टिकाऊ: तांबे के केबल्स से हल्का और जंग-रोधी

7. नुकसान (Disadvantages)

❌ महँगा: इंस्टालेशन और मरम्मत की उच्च लागत
❌ नाजुक: कोर टूटने पर रिपेयरिंग कठिन
❌ विशेषज्ञता की आवश्यकता: टर्मिनेशन और स्प्लाइसिंग के लिए ट्रेंड टेक्नीशियन चाहिए


नेटवर्क के प्रकार Types of Network:-

क्‍लाइंट /सर्वर नेटवर्क:-

यह सबसे प्रचलित नेटवर्किंग सिस्‍टम है। विश्‍व का सबसे बड़ा नेटवर्क –इन्‍टरनेट इसी क्‍लाइंट-सर्वर नेटवर्क अर्किटेक्‍चर पर आधारित है। इन्‍टरनेट वैन कहलाता है।

क्‍लाइंट /सर्वर नेटवर्क के लाभ:-

1. तेज 2. विस्‍तार 3. किसी भी एप्‍लीकेशन के साथ कार्य करने में सक्षम। 4. सुरक्षा का सबसे ऊँचा स्‍तर ।

क्‍लाइंट /सर्वर नेटवर्क के हानि:-

1. समर्पित सर्वर की आवश्‍यकता होती है। 2. खरीदने में ज्‍यादा खर्चीला 3. रख-रखाव में ज्‍यादा खर्चीला ।


Peer-to-Peer (P2P) पीयर-टू-पीयर नेटवर्क:-

यह एक ऐसा नेटवर्क होता है, जिसमें दो डिवाइस आपस में कनेक्‍ट होकर बिना किसी सेंट्रल सर्वर के डेटा या फाइल शेयर कर सकते हैं।इस नेटवर्क में  सभी कंप्यूटर (या डिवाइस) बराबर होते हैं।   पी2पी नेटवर्क में पीयर वे कम्‍प्‍यूटर होते है, जो आपस में इंटरनेट  के माध्‍यम से जुड़े रहते हैं। 

उदाहरण: Torrent फाइल डाउनलोड करना, Bitcoin जैसी क्रिप्टोकरेंसी।

P2P के फायदे (Advantages)

✅ सर्वर की जरूरत नहीं: कम लागत, स्केलेबल।
✅ फास्ट डेटा ट्रांसफर: एक साथ कई स्रोतों से डाउनलोड।
✅ फॉल्ट टॉलरेंस: एक डिवाइस बंद होने पर नेटवर्क चलता रहता है।
✅ एनोनिमिटी: Tor जैसे P2P नेटवर्क में प्राइवेसी अधिक।

P2P के नुकसान (Disadvantages)

❌ सिक्योरिटी रिस्क: मालवेयर/वायरस फैलने की संभावना।
❌ कॉपीराइट इश्यू: Torrent से पाइरेटेड कंटेंट शेयरिंग।
❌ परफॉर्मेंस इश्यू: अगर पीयर्स ऑफलाइन हों, तो डेटा मिलने में दिक्कत।


कनेक्‍शन के प्रकार Types of Connection:-

डायलअप कनेक्‍शन:-

डायल-अप कनेक्शन इंटरनेट एक्सेस करने की पुरानी तकनीक है। घरों तथा छोटे व्‍यापारों में व्‍यक्तिगत यूजर एक टेलीफोन लाइन तथा 56 के.बी.एस. मॉडेम की सहायता से इंटरनेट से जुड़े रहते है। इस प्रकार के कनेक्‍शन को बनाने के लिए किसी आई.एस.पी. के यहॉं अपना एकाउण्‍ट स्‍थापित करते हैं। आई.एस.पी. के सर्वर यूजर के कम्‍प्‍यूटरों तथा इंटरनेट के बीच डाटा का आवागमन करते है। इसमें इंटरनेट चलते समय फोन लाइन ब्लॉक रहती है (कॉल नहीं की जा सकती)।

आजकल ब्रॉडबैंड (DSL, फाइबर) द्वारा प्रतिस्थापित किया जा चुका है।

फायदे:

सरल तकनीक, कम लागत (बस मॉडेम और टेलीफोन लाइन चाहिए)।

ग्रामीण/दूरस्थ इलाकों में जहाँ ब्रॉडबैंड नहीं है, वहाँ उपयोगी।

नुकसान:

बेहद धीमी स्पीड (फोटो/वीडियो लोड करने में मिनटों का समय)।

फोन लाइन बिजी रहती है (इंटरनेट चलते समय कॉल नहीं कर सकते)।

अस्थिर कनेक्शन (लाइन डिस्कनेक्ट होने की संभावना अधिक)।

लीज्ड लाइन कनेक्शन (Leased Line Connection):-

लीज्‍ड लाइन एक हाई स्‍पीड और फिस्‍ड बैंडविथ की समर्पित (Dedicated), इंटरनेट या वॉइस लाइन होती है। यह  दो लोकेशन को एक साथ जोड़ती है।

इसमें सर्विस प्रोवाइडर कस्‍टमर को एक हाई स्‍पीड और डेडीकेटेड स्थायी संचार लाइन उपलब्‍ध कराता है।

यह टेलीकॉम कंपनियों (जैसे Airtel, BSNL, Tata Communications) द्वारा प्रदान किया जाता है और इंटरनेट, वॉयस कॉल, या प्राइवेट नेटवर्किंग के लिए उपयोग किया जाता है।

फायदे:

24/7 हाई-स्पीड एक्सेस।

नेटवर्क कंट्रोल और सिक्योरिटी अधिक।

कम पिंग (गेमिंग/वीडियो कॉल के लिए आदर्श)।

नुकसान:

महँगा (मासिक किराया हज़ारों से लाखों रुपये तक)।

सेटअप में समय लगता है (इंस्टालेशन 15-30 दिन)।


ISDN (Integrated Services Digital Network):-

यह डायल अप कनेक्शन के समान ही होता हैं परन्‍तु यह महंगा होता हैं। इसकी स्‍पीड डायल अप से ज्‍यादा होती है।

यह एक डिजिटल टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क है जो वॉइस, डेटा और वीडियो को एक ही लाइन पर ट्रांसमिट करता है। यह पुराने एनालॉग टेलीफोन नेटवर्क (PSTN) का डिजिटल विकल्प था और 1980-90 के दशक में प्रचलित था।

ISDN के मुख्य उपयोग

✅ डिजिटल वॉइस कॉल्स (एनालॉग से बेहतर क्वालिटी)।
✅ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (H.320 प्रोटोकॉल पर आधारित)।
✅ फास्ट डेटा ट्रांसफर (डायल-अप से तेज़)।
✅ रिमोट एक्सेस (कंपनी नेटवर्क से कनेक्टिविटी)।

ISDN के फायदे

✔ एकीकृत सेवाएँ: वॉइस + डेटा एक साथ।
✔ तेज़ कनेक्शन: डायल-अप (56 Kbps) से दोगुनी स्पीड (128 Kbps)।
✔ कम नॉइस: डिजिटल सिग्नल, एनालॉग की तुलना में साफ़ आवाज़।
✔ फास्ट कॉल सेटअप: कनेक्शन सेकंड्स में एस्टैब्लिश होता है।

ISDN के नुकसान

❌ सीमित स्पीड: आधुनिक ब्रॉडबैंड (DSL/फाइबर) के मुकाबले धीमा।
❌ महँगा इंफ्रास्ट्रक्चर: विशेष हार्डवेयर (ISDN मॉडेम, एडाप्टर) चाहिए।
❌ अप्रचलित तकनीक: 4G/5G और फाइबर ने इसे रिप्लेस कर दिया।


DSL (डिजिटल सब्सक्राइबर लाइन – Digital Subscriber Line):-

यह एक हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्शन तकनीक है। इसमें मौजूदा टेलीफोन लाइन (कॉपर वायर) का उपयोग करके इंटरनेट का डेटा ट्रांसमिट किया जाता  है। यह ब्रॉडबैंड इंटरनेट का एक प्रकार है। इसमें  डायल-अप कनेक्शन से अधिक तेज़ गति मिलती है।

DSL, पुरानी कॉपर टेलीफोन लाइन्स पर काम करता है, स्प्लिटर का उपयोग करके  इंटरनेट और फोन कॉल एक साथ चल सकते हैं। यह फोन कॉल्स के लिए लो फ्रीक्वेंसी (0-4 kHz): और  इंटरनेट डेटा के लिए। हाई फ्रीक्वेंसी (25 kHz–1 MHz): का उपयोग करता है।

इसमें एक DSL मॉडेम  डिवाइस सिग्नल को डिकोड करके राउटर या कंप्यूटर तक पहुँचाता है।

DSL के फायदे (Advantages):

✅ फोन और इंटरनेट एक साथ: बिना व्यवधान के कॉल और इंटरनेट चलते हैं।
✅ डायल-अप से तेज़: 256 Kbps से 100 Mbps तक स्पीड।
✅ व्यापक उपलब्धता: टेलीफोन लाइन होने पर आसानी से लगाया जा सकता है।

DSL के नुकसान (Disadvantages):

❌ दूरी पर निर्भर: टेलीफोन एक्सचेंज से दूरी बढ़ने पर स्पीड कम हो जाती है।
❌ फाइबर से धीमा: फाइबर ऑप्टिक (FTTH) की तुलना में कम स्पीड।
❌ लैटेंसी (Ping) अधिक: गेमिंग/वीडियो कॉल के लिए कभी-कभी समस्या।

आर.एफ(रेडियो फ्रीक्वेंसी):-

RF (Radio Frequency) एक प्रकार की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंग (Electromagnetic Wave) है। इनका  उपयोग वायरलेस कम्युनिकेशन (Wireless Communication), रडार (Radar), टेलीविजन, मोबाइल नेटवर्क, वाई-फाई, ब्लूटूथ, और अन्य वायरलेस टेक्नोलॉजी में किया जाता है।

RF टेक्नोलॉजी आजकल के सभी वायरलेस सिस्टम की बेसिक टेक्नोलॉजी है।इसके बिना मोबाइल, इंटरनेट और अन्य वायरलेस डिवाइस काम नहीं कर सकते। RF की फ्रीक्वेंसी रेंज (Frequency Range): 3 kHz से 300 GHz तक होती है।इसे रेडियो स्पेक्ट्रम (Radio Spectrum) भी कहते हैं।

उपयोग (Applications):

मोबाइल नेटवर्क (2G, 3G, 4G, 5G),वाई-फाई (Wi-Fi) और ब्लूटूथ

रडार और सैटेलाइट कम्युनिकेशन, एफएम/एएम रेडियो और टीवी ब्रॉडकास्टिंग, RFID (कॉन्टैक्टलेस कार्ड, टैग्स),

RF के फायदे:-

बिना तार के डेटा ट्रांसमिशन, लंबी दूरी तक कम्युनिकेशन (जैसे रेडियो), हाई-स्पीड डेटा ट्रांसफर (5G में)

ब्रॉड बैण्ड कनेक्शन:-

यह वह लाइन होती है जो आई.एस.पी द्वारा भेजी जाती है। इसके बाद उस लाइन को मॉडेम और टेलीफोन लाइन से जोड़ दिया जाता है। यह एक प्राइवेट नेटवर्क होता है। जिसका कोई न कोई मालिक अवश्य होता है। इसलिए इस नेटवर्क का प्रयोग केवल वही व्यक्ति कर सकता है जिसने यह कनेक्शन लिया है।

BSNL, IDEA, SIFY, MTNL आदि वह कंपनिया है जो ब्राडबैण्ड की सुविधा देती है।