ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर :-
ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर ऐसा सॉफ्टवेयर होता है, जो सोर्स कोड के साथ वितरित किया जाता है। इसके सोर्स कोड को उपयोगकर्ता पढ़, संशोधित तथा विकसित कर सकते हैं। इसका सोर्स कोड इंटरनेट पर निःशुल्क उपलब्ध होता है।
जैसे — Linux, Apache HTTP Server, LibreOffice।
प्रोपराइटरी सॉफ्टवेयर :-
प्रोपराइटरी सॉफ्टवेयर, जिसे क्लोज्ड-सोर्स सॉफ्टवेयर भी कहा जाता है, एक कॉपीराइटेड सॉफ्टवेयर होता है। इसका उपयोग सीमित होता है तथा इसका सोर्स कोड सामान्यतः सुरक्षित रखा जाता है। यह सॉफ्टवेयर उसके मालिक या निर्माता की संपत्ति होता है तथा उपयोगकर्ता या संस्थाएँ इसे पूर्व निर्धारित शर्तों के अंतर्गत उपयोग करती हैं।
जैसे — Microsoft Windows, Microsoft Office, Adobe Photoshop।
लाइनेक्स का परिचय :-
Linux एक ऑपरेटिंग सिस्टम सॉफ्टवेयर है, जिसका विकास Linus Torvalds ने वर्ष 1991 में किया था। यह Unix ऑपरेटिंग सिस्टम का एक नया संस्करण है, जो ग्राफिकल यूजर प्रणाली पर आधारित है तथा बाजार में निःशुल्क उपलब्ध है।
लिनक्स एक मल्टीयूजर ऑपरेटिंग सिस्टम है। यह एक खुले डॉक्यूमेंट मॉडल पर आधारित है, जिसके अनुसार लिनक्स कर्नल को इंटरनेट के माध्यम से निःशुल्क प्राप्त किया जा सकता है तथा आवश्यकता अनुसार इसमें परिवर्तन भी किया जा सकता है।
लाइनेक्स के गुण:-
- लाइनेक्स एक बहुत ही सुरक्षित ऑपरेटिंग सिस्टम है।
- लाइनेक्स अपने से जुड़े प्रत्येक यूजर को एक फाईल समूह तथा सब डायरेक्ट्री से जोड़ देता है।
- विण्डोज की तरह लाइनेक्स में कोई केन्द्रीय साफ्टवेयर नहीं होता है।
- लाइनेक्स ग्राफिकल यूजर इन्टरफेस होता है।
- लाइनेक्स में हम कीबोर्ड को अपनी जरूरत के अनुसार कस्टमाइज कर सकते है।
लाइनेक्स की कमियॉं :-
- कार्य करने के मामले लाइनेक्स एक जटिल कम्पलेक्स ऑपरेटिंग सिस्टम है।
- लाइनेक्स में कोई ड्राइव लेटर नहीं होता है।अत: इस पर कार्य करते समय यूजर को स्वयं ध्यान रखना होता है कि वह कहा कार्य कर रहा है।
- लाइनेक्स की सबसे बड़ी विशेषता सुरक्षा इसकी एक कमी है जिसके कारण कोई भी नया साफ्टवेयर डालना अथवा निकालना मुश्किल कार्य होता है।
- साफ्टवेयर की भांति लाइनेक्स में हार्डवेयर जोड़ना भी काफी मुश्किल कार्य है।
- लाइनेक्स के सीमित उपयोग के कारण इस पर आधारित विभिन्न अनुप्रयोगो की जानकारी यूजर को उपलब्ध नही होती है।
लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के कंपोनेंट:-
लाइनेक्स आपरेटिंग सिस्टम के अंतर्गत तीन मुख्य अवयव होते है :-
1. कर्नेल (Kernel)
Linux ऑपरेटिंग सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण भाग कर्नेल होता है। यह ऑपरेटिंग सिस्टम का मुख्य प्रोग्राम है। कर्नेल के द्वारा कंप्यूटर के संसाधनों (Resources) तथा विभिन्न कार्यों को नियंत्रित किया जाता है।
यह कंप्यूटर हार्डवेयर से सीधे संचार (Direct Communication) करता है। कोई भी यूजर कर्नेल से सीधे इंटरैक्ट नहीं कर सकता।
2. शेल (Shell)
लिनक्स में एक साधारण यूजर इंटरफेस होता है, जिसे शेल कहा जाता है। यह यूजर को आवश्यक सुविधाएँ प्रदान करता है।
शेल प्रोग्राम की सबसे बाहरी लेयर होती है। शेल, यूजर इंटरफेस के लिए प्रयुक्त एक अन्य शब्द है। प्रोग्राम के निर्देशों को आसान बनाने के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम और एप्लिकेशन कई बार एक सरल तरीका प्रदान करते हैं।
कई बार शेल को कमांड शेल भी कहा जाता है। शेल एक कमांड इंटरप्रेटर है। कमांड इंटरप्रेटर एक ऐसा प्रोग्राम होता है, जो ऑपरेटिंग सिस्टम की कमांडों को एक्सीक्यूट करता है।
3-लिनक्स यूटिलिटीज (Utilities) :-
Linux यूटिलिटीज या कमांड, प्रोग्रामों का वह समूह है जो दैनिक प्रोसेसिंग आवश्यकताओं के कार्य में आता है।
प्रोग्राम को शेल के माध्यम से इनवोक (Invoke) कराया जाता है, जो स्वयं एक यूटिलिटी होती है। लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम ऐसी सुविधाएँ प्रदान करता है, जिनके माध्यम से हजारों लिनक्स आधारित एप्लिकेशन प्रोग्राम उपलब्ध होते हैं, जैसे — डी.बी.एम.एस. (Database Management System) तथा अन्य अनेक प्रोग्राम।
Linux के लिए न्यूनतम हार्डवेयर आवश्यकताएँ
1. प्रोसेसर (Processor)
पेंटियम 133 अथवा उससे अधिक शक्तिशाली कोई भी माइक्रोप्रोसेसर कार्य कर सकता है।
2. रैम (RAM)
लिनक्स के लिए कम से कम 32 MB RAM आवश्यक होती है।
3. हार्ड डिस्क (Hard Disk)
ऐसी हार्ड डिस्क, जिसमें कम से कम 250 MB रिक्त स्थान हो, लिनक्स के लिए पर्याप्त है। हालांकि अधिक रिक्त स्थान होने पर कार्यक्षमता बेहतर होती है।
4. मल्टीमीडिया प्रणाली (Multimedia System)
GUI (Graphical User Interface) आधारित प्रणाली होने के कारण लिनक्स वाले कंप्यूटर में मल्टीमीडिया प्रणाली होनी चाहिए, जैसे —
- रंगीन मॉनिटर
- वीडियो कार्ड
- स्पीकर आदि
5. इनपुट उपकरण (Input Devices)
- कीबोर्ड
- माउस
6. CD Drive
लिनक्स को कंप्यूटर में इंस्टॉल करने के लिए CD Drive का होना आवश्यक है, क्योंकि यह सॉफ्टवेयर इतना बड़ा होता है कि फ्लॉपी डिस्क में नहीं आ सकता। इसलिए इसकी CD का उपयोग किया जाता है।
लाइनेक्स की विशेषताऍ :-
मल्टीटास्किंग :- एक ही समय में एक से अधिक कार्यो को करने की क्षमता मल्टीटास्किंग कहलाती है। लाइनेक्स में यह क्षमता होती है कि वह बडे़-बड़े प्रोग्रामों को छोटे-छोटे भागों में बॉटकर क्रिन्याविंत कर सकता है।
टाइम शेयरिंग :- लाइनेक्स एक नेटवर्क के लिए तैयार आपरेटिंग सिस्टम है अत: इसके सर्वर के साथ कई कम्प्यूटरों को जोड़कर एक नेटवर्क बनाया जा सकता है जहॉ केन्द्रीय कम्प्यूटर का समय सभी टर्मिनलों को बराबर अनुपात में मिलता है।
मल्टीयूजर सिस्टम :- एक यूजर प्रणाली जैसे डास में कम्प्यूटर के सभी संसाधन जैसे मेमोरी, प्रोसेसर, डिस्क, प्रिंटर आदि सभी किसी एक यूजर का कार्य करने के लिए तैयार होते है लाइनेक्स जैसे मल्टीयूजर प्रणाली में ये सभी संसाधन कई यूजर के मध्य साझा होते है।
प्रोग्राम की सुविधा :-
लाइनेक्स के बारे में कहा जाता है कि यह किसी अन्य यूजर के लिए नही परन्तु प्रोग्रामर्स के लिए बनाया गया आपरेटिंग सिस्टम है अन्य आपरेटिंग सिस्टम की तुलना में लाइनेक्स में प्रोग्राम की सर्वाधिक व शक्तिशाली सुविधा है लाइनेक्स में उपास्थित सेल प्रोग्रामिंग लैग्वेज किसी भी अन्य उच्च स्तरीय भाषा के समतुल्य है।
लाइनेक्स के विभिन्न वर्जन :-
लाइनेक्स के अलग-अलग संस्थाओं द्वारा जारी किए गये विभिन्न वर्जन ही भी लाइनेक्स के फ्लेवर कहलाते है इन्हें लाइनेक्स डिस्ट्रीब्यूशन भी कहा जाता है। लाइनेक्स इंटरनेट पर फ्री में उपलब्ध है अत: कोई भी व्यक्ति या संस्था इसे प्राप्त कर अपनी सुविधानुसार परिवर्तन कर इसे नया रूप देकर या इसमें अपनी और अप्लीकेशन साफ्टवेयर को जोड़कर इसे यूजर को वितरित कर सकते है इस प्रकार आने वाले लाइनेक्स के अलग-अलग वर्जन लाइनेक्स फ्लेवर या डिस्ट्रीब्यूशन कहलाते है जैसे – फेडोरा कोर, ससेस लाइनेक्स, स्लेकवेयर लाइनेक्स
लाइनेक्स फाइल सिस्टम:-
हार्ड डिस्क में हजारों फाइलें संग्रहित रहती हैं। इन फाइलों के अलग-अलग समूहों को अलग-अलग डायरेक्ट्रियों में व्यवस्थित करके बनाई गई संरचना को फाइल सिस्टम कहा जाता है।
रूट डायरेक्टरी (Root Directory) :-
Linux में रूट डायरेक्टरी सबसे मुख्य डायरेक्टरी होती है। इसे / (स्लैश) द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। इसके अंतर्गत कई महत्वपूर्ण डायरेक्ट्रियाँ होती हैं, जैसे —
/home → उपयोगकर्ताओं (Users) की व्यक्तिगत डायरेक्टरी
/bin → आवश्यक कमांड फाइलें
/boot → बूटिंग से संबंधित फाइलें
/dev → डिवाइस फाइलें
/etc → सिस्टम कॉन्फ़िगरेशन फाइलें
1. साधारण फाइल (Ordinary File) :-
इसमें यूजर द्वारा बनाई गई फाइलें सम्मिलित होती हैं।
जैसे — डाटा फाइल, प्रोग्राम फाइल, ऑब्जेक्ट फाइल, एक्सीक्यूटेबल फाइल, डायरेक्टरी फाइल आदि।
2. विशेष फाइल (Special File) :-
अधिकांश सिस्टम फाइलें स्पेशल फाइलें होती हैं। ये फाइलें सिस्टम की भौतिक संरचना को प्रदर्शित करती हैं। अर्थात इन फाइलों के अंतर्गत विभिन्न भौतिक यंत्रों, जैसे — प्रिंटर, मॉनिटर आदि से संबंधित फाइलें होती हैं।
इन फाइलों का उपयोग ऑपरेटिंग सिस्टम को हार्डवेयर से संबंधित करने के लिए किया जाता है।
लॉगइन तथा लॉगआउट मोड
Linux एक मल्टीयूजर ऑपरेटिंग सिस्टम है, इसलिए इससे कई यूजर एक साथ जुड़ सकते हैं तथा अपने-अपने टर्मिनल पर कार्य कर सकते हैं।
अपने टर्मिनल को लिनक्स के केंद्रीय कंप्यूटर से जोड़ने की प्रक्रिया को लॉगइन कहा जाता है। जैसे ही टर्मिनल को केंद्रीय कंप्यूटर से जोड़ने का प्रयास किया जाता है, तब स्क्रीन पर निम्न प्रकार का लॉगिन संदेश प्रदर्शित होता है :-
Red Hat Linux release 7.1Kernel 2.2.2-10 on an i486
जब यूजर अपना कार्य पूरा कर लेता है और सिस्टम से बाहर निकलता है, तो इस प्रक्रिया को लॉगआउट कहा जाता है। लॉगआउट करने से यूजर का सत्र (Session) समाप्त हो जाता है तथा सिस्टम की सुरक्षा बनी रहती है।
Login (लॉगिन)
यहाँ टर्मिनल पर बैठे यूजर को अपना लॉगिन नेम तथा पासवर्ड टाइप करना होता है। सुरक्षा की दृष्टि से Linux केवल उन्हीं यूजरों को कार्य करने की अनुमति प्रदान करता है, जो उसके स्वीकृत (Authorized) यूजर होते हैं। अर्थात जिनके पास सिस्टम द्वारा दिया गया यूजर नेम तथा पासवर्ड होता है।
ये यूजर नेम या लॉगिन नेम प्रत्येक यूजर के लिए अलग-अलग होते हैं। लॉगिन नेम तथा पासवर्ड देने के बाद जब यूजर Enter कुंजी दबाता है, तो लिनक्स उनकी जाँच करता है।
यदि यूजर द्वारा दी गई जानकारी गलत होती है, तो एक एरर संदेश के साथ लॉगिन संदेश पुनः स्क्रीन पर प्रदर्शित होता है। यदि सभी जानकारियाँ सही पाई जाती हैं, तो लिनक्स एक विशेष फॉर्मेट में प्रॉम्प्ट चिन्ह स्क्रीन पर प्रदर्शित करता है, जो इस प्रकार दिखाई देता है :-
Red Hat Linux release 7.1
Kernel 2.2.2-10 on an i486
Login: mayank
Password:
Last login: Sat Aug 30 12:18:02 from 158.67.55.167
[mayank@localhost myk]$
लाइनेक्स कमांड :-
1. Arithmetic Expansion Command
Syntax :- $((expression))
Example :- $((22 + 32))
Output :- 54
2. Cal Command:-इस कमांड के द्वारा स्क्रीन पर कैलेण्डर दर्शाया जा सकता है।
Syntax: – %cal [month] [year]
Ex.: – %Cal August 2004
3. Cat Command:-यह कमांड नई टेक्स्ट फाइल बनाने, किसी पूर्व में टेक्स्ट फाइल की सूचनाओं को देखने आदि के काम आता है।
Syntax: -Cat< filename1><filename2>
Ex.: – Cat<a><b>
4. Cd Command:- यह कमांड वर्तमान डायरेक्ट्री से निकलकर अन्य किसी डायरेक्ट्री में जाने के काम आती है।
Syntax: -Cd <Subdirctory name>
Ex.: – Cd/usr/mayank
5. Clear Command:- यह कमांड स्क्रीन पर उपस्थित विभिन्न सूचनाओं को हटाने तथा प्रोम्पट चिन्ह को स्क्रीन की प्रथम पंक्ति में ले जाने के काम आता है।
Syntax: -Clear
6. Chmod Command:- यह कमांड किसी फाइल की अनुमति (Permission) बदलने तथा अन्य यूजर को एक्सेस देने के लिए उपयोग की जाती है।
Syntax: chmod<option>permission><file name>
7. Cp Command:-यह कमांड डॉस के कॉपी कमांड की तरह फाइलों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर कॉपी करने के काम आता है।
Syntax: -Cp <Source filepath > <Target filepath>
Ex.: – cp /usr/avi/school.c /usr/aish
8. Date Command:-यह कमांड वर्तमान दिनांक व समय दोनों ही एक साथ प्रदर्शित करने के काम आता है।
Syntax :- Date
9. Cmp Command:- यह कमांड दो फाइलों की सूचनाओं की तुलना करके हमें सूचना प्रदर्शित करता है कि वे समान है या असमान।
Syntax:- Cmp<file1> <file2>
10. Find Command:- यह कमाण्ड किसी सब- डायरेक्ट्री में दी गई फाइल को ढूढ़ने के काम आता है।
Syntax: – Find <Subdirctory name> <filename>
11. Mv Command: – Linux में mv कमांड का उपयोग फाइलों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित (Move) करने तथा फाइलों एवं सब-डायरेक्ट्रियों के नाम बदलने के लिए किया जाता है।
Syntax: -mv <source-file-path> <target-file-path>
12.Rmdir Command: – यह कमांड किसी खाली सब-डायरेक्टरी को डिस्क से हटाने (Remove) के काम आती है। :-
1. उस नाम से सब डायरेक्ट्री बनी होनी चाहिए।
2. वह सब डायरेक्ट्री खाली होनी चाहिए अर्थात उसमें कोई और सब डायरेक्ट्री अथवा फाइल बनी हुई नही होनी चाहिए।
3. वह हमारी वर्तमान सब डायरेक्ट्री नही होनी चाहिए।
Syntax: – rmdir <directory-name>
Exp: rmdir/name/mayank
13. Is Command: –Linux में ls कमांड का उपयोग डायरेक्टरी की सामग्री (Contents) को सूचीबद्ध करने के लिए किया जाता है।
Syntax:- ls <file-name> Ex- ls file1
14. Rm Command: – यह कमांड फाइल या डायरेक्टरी को डिलीट (Delete) करने के काम आती है।
Syntax: – rm <file-name>
15. Chgrp Command: -Linux में chgrp कमांड का उपयोग किसी फाइल या डायरेक्टरी का ग्रुप बदलने के लिए किया जाता है।
Syntax:-$ chgrp [option] <group-name> <file-name>
16. Who Cammand:-इस कमांड के उपयोग से सिस्टम पर वर्तमान में लॉगिन किए हुए यूजरों की सूची प्रदर्शित होती है। इस कमांड द्वारा सभी यूजरों से संबंधित विभिन्न जानकारी, जैसे — नाम, टर्मिनल नंबर, लॉगिन का समय एवं दिनांक आदि प्रदर्शित होते हैं।
Syntax: -$ who {enter}
17. Mkdir Command: -इLinux में mkdir कमांड का उपयोग नई डायरेक्टरी (Directory) बनाने के लिए किया जाता है। इसके द्वारा एक या एक से अधिक डायरेक्ट्रियाँ बनाई जा सकती हैं। यदि डायरेक्टरी पहले से मौजूद हो, तो -p विकल्प का उपयोग किया जाता है।
Syntax: mkdir <directory-name>
OR
mkdir cyber dairy-files or mkdir -p cyber/dairy-files
18. Pwd Command: – Pwd कमाण्ड करेन्ट/वर्किग डायरेक्टरी का नाम प्रदर्शित करता है।
Syntax:$ pwd output- /home/user
19. More Command: –यह कमाण्ड एक समय में एक स्क्रीन पर अपेक्षाकृत लंबी टेक्स्ट फाइलों के माध्यम से देखने में सक्षम बनाता है ।
Syntax: $ more file.txt
20.Who is Command: Linux में whois कमांड का उपयोग किसी डोमेन के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
इसके द्वारा डोमेन के मालिक, मालिक की संपर्क जानकारी तथा डोमेन का उपयोग करने वाले नेम सर्वर आदि की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
Syntax:whois <domain-name>
Ex- whois linux-bible.com
IMPOTERNT QUESTION –
1 – (a) लिनक्स कर्नेल क्या है ? लिनक्स कर्नेल के कार्यों की व्याख्या कीजिये। जून 2026
(b) डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है ? डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम के इंटरनल और एक्सटर्नल कमांड्स को समझाइए। जून 2026
2 -निम्नलिखित में से किंन्ही आठ पर संक्षिप्त टिप्पड़ियाँ लिखिए :
(i)DIR and CD commands
(ii) Mic DIR and RD commands
(iii) CHK DSK and Doskey commands
(iv) Diskcopy and Diskcomp commands
(v) Sort and find commands
(vi) Help and version commands
(vii) Rename and Delate commands
(viii) Backup and Restore commands
(ix) Data and Time commands