Unit I- Introduction of Databases

डेटाबेस (Database)

डेटाबेस वह जगह है जहाँ हम संबंधित जानकारी (डाटा) को एक साथ और सही तरीके से रखते हैं। इससे डाटा को आसानी से ढूंढना, जोड़ना और बदलना आसान हो जाता है।

उदाहरण

जैसे छात्रों की जानकारी, बैंक का डाटा या लाइब्रेरी का रिकॉर्ड।


रिलेशनल डेटाबेस (Relational Database)

रिलेशनल डेटाबेस वह डेटाबेस होता है जिसमें डाटा टेबल (Tables) के रूप में रखा जाता है। हर टेबल में पंक्तियाँ (Rows) और स्तम्भ (Columns) होते हैं और टेबल आपस में जुड़े (Related) रहते हैं।

उपयोग

इसका उपयोग डाटा को आसानी से व्यवस्थित रखने, जल्दी खोजने और आपस में संबंध स्थापित करने के लिए किया जाता है। यह बड़े डाटा को संभालने और सही जानकारी प्राप्त करने में मदद करता है।


Database Design

डेटाबेस नॉर्मलाइजेशन (Database Normalization)

परिभाषा

डेटाबेस नॉर्मलाइजेशन वह प्रक्रिया है जिसमें डाटा को सही तरीके से टेबल में बाँटा जाता है ताकि दोहराव (duplicate) कम हो। इससे डाटा साफ, व्यवस्थित और त्रुटि रहित रहता है।

उद्देश्य

नॉर्मलाइजेशन का मुख्य उद्देश्य डाटा की पुनरावृत्ति कम करना और डाटा की शुद्धता बनाए रखना है।


Determining Tables (टेबल का निर्धारण)

MS Access में टेबल डेटा संग्रहण की मूल इकाई होती है। डेटाबेस डिज़ाइन करते समय सबसे पहले उन इकाइयों की पहचान की जाती है जिन्हें दर्शाना है, जैसे छात्र, कर्मचारी या उत्पाद। प्रत्येक इकाई को अलग टेबल के रूप में बनाया जाता है और उसमें आवश्यक जानकारी बिना दोहराव के रखी जाती है। सही टेबल निर्धारण से डेटा व्यवस्थित रहता है और पुनरावृत्ति कम होती है।


Determining Fields (फ़ील्ड का निर्धारण)

फ़ील्ड टेबल के गुण या विशेषताएँ होती हैं जो किसी इकाई का विवरण देती हैं। उदाहरण के लिए छात्र टेबल में रोल नंबर, नाम और कोर्स फ़ील्ड हो सकते हैं। प्रत्येक फ़ील्ड को सार्थक डेटा दर्शाने के लिए चुना जाता है और एक फ़ील्ड को प्राइमरी की बनाया जाता है ताकि प्रत्येक रिकॉर्ड को अलग-अलग पहचाना जा सके। सही फ़ील्ड निर्धारण से डेटा की शुद्धता और स्थिरता बनी रहती है।


Determining Relationships (रिलेशनशिप का निर्धारण)

MS Access में रिलेशनशिप यह बताती है कि टेबल आपस में कैसे जुड़ी हैं। इन्हें प्राइमरी की और फॉरेन की के माध्यम से स्थापित किया जाता है ताकि डेटा की अखंडता बनी रहे। सामान्य रिलेशनशिप प्रकार हैं—वन-टू-वन, वन-टू-मैनी और मैनी-टू-मैनी। सही रिलेशनशिप निर्धारण से टेबलों के बीच डेटा को जोड़ा जा सकता है, पुनरावृत्ति घटती है और जटिल क्वेरी चलाना आसान होता है।