Unit I-Basic concept

Basic Concept of Accounting:-

आधुनिक व्यवसाय का आकार इतना विस्तृत हो गया है कि इसमें सहस्रों व्यावसायिक लेनदेन होते रहते हैं। इन लेन देनों के ब्यौरे को याद रखकर व्यावसायिक उपक्रम का संचालन करना असम्भव है। अतः इन लेनदेनों का क्रमबद्ध अभिलेख (records) रखे जाते हैं। लेनदेन के क्रमबद्ध ज्ञान व प्रयोग-कला को ही लेखाशास्त्र कहते हैं।

किसी व्यवसाय के वित्तीय लेनदेन का लेखा-जोखा रखने, उसका सारांश प्रस्तुत करने, रिपोर्टिंग तथा विश्लेषण करने की कला को ही एकाउंटिंग कहा जाता है।

एकाउंटिंग का कार्यभार संभालने वाले व्यक्ति को एक अकाउंटेंट के रूप में जाना जाता है। इनकी भूमिका रिकॉर्ड-कीपर के समान होती है।

अमेरिकन इन्स्ट्टीयूट ऑफ सर्टिफाइड पब्लिक अकाउन्टैन्ट्स (AICPA) की लेखांकन शब्दावली, बुलेटिन के अनुसार-

‘‘लेखांकन उन व्यवहारों और घटनाओं को, जो कि कम से कम अंशतः वित्तीय प्रकृति के है, मुद्रा के रूप में प्रभावपूर्ण तरीके से लिखने, वर्गीकृत करने तथा सारांश निकालने एवं उनके परिणामों की व्याख्या करने की कला है।’’

इस परिभाषा के अनुसार लेखांकन एक कला है, विज्ञान नहीं है। इस कला का उपयोग वित्तीय प्रकृति के मुद्रा में मापनीय व्यवहारों और घटनाओं के अभिलेखन, वर्गीकरण, संक्षेपण और निर्वचन के लिए किया जाता है।

एकाउंटिंग को अब प्रबंधन का एक ऐसा उपकरण माना जाता है जो संगठन के भविष्य के विषय में महत्वर्पूण जानकारी देता है। स्मिथ एवं एशबर्न ने उपर्युक्त परिभाषा को कुछ सुधार के साथ प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार:-

‘‘लेखांकन मुख्यतः वित्तीय प्रकृति के व्यावसायिक लेनदेनों और घटनाओं के अभिलेखन तथा वर्गीकरण का विज्ञान है और उन लेनदेनें और घटनाओं का महत्वपूर्ण सारांश बनाने, विश्लेषण तथा व्याख्या करने और इन परिणामों को उन व्यक्तियों के पास भेजने की कला है, जिन्हें व्यवसाय के सम्बन्ध में निर्णय लेने हैं।’’

इस परिभाषा के अनुसार लेखांकन विज्ञान और कला दोनों ही है। किन्तु यह एक पूर्ण निश्चित विज्ञान न होकर लगभग पूर्ण विज्ञान है।

Financial Statements:-

फाइनेंशियल स्टेटमेंट  को हिन्दी मे हम वित्तीय विवरण भी कहते है। आमतौर पर यह  वर्ष के अंत में तैयार किए जाते हैं।

फाइनेंशियल स्टेटमेंट में मुख्य रूप से व्यवसाय के कामकाज का लेखा जोखा  होता है। यानी व्यवसाय का नकदी प्रवाह, लाभ, विकास आदि से संबन्धित  जानकारी होती है। इसमें कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन के बारे मे जानकारी प्रदान की जाती है, इसके अतिरिक्त  बाजार में उसकी क्या स्थिति है उसके के बारे में जानकारी दी गयी होती है।

किसी फाइनेंशियल स्टेटमेंट में आमतौर पर कंपनी की बैलेंस शीट, नकदी प्रवाह का विवरण तथा लाभ और हानि का विवरण उसकी आर्थिक स्थित का विवरण आदि शामिल होता है। 

फाइनेंशियल स्टेटमेंट में निम्न रिपोर्ट को शामिल किया जाता है:-

1- स्थिति विवरण (चिट्ठा) (Balance sheet) 

2-लाभ हानि खाता (Profit and loss account)

3- Cash Flow Statement

4- व्यापार खाता (Trading account)

1-Balance sheet or statement of financial position:-

किसी निश्चित तिथि पर किसी फर्म की संपत्ति और देनदारियों को दर्शाने वाली रिपोर्ट को फ़ार्म की बैलेंस शीट के रूप में जाना जाता है। Balance sheet एक निश्चित समय पर किसी चालू व्यवसाय की वित्तीय तस्वीर है। कंपनी की वित्तीय स्थिति (एसेट्स, लायबिलिटीज और कैपिटल) इस रिपोर्ट में दिखायी देती है।

किसी भी कंपनी का चिट्ठा या बैलेंस शीट, लाभ और हानि स्टेटमेंट के बाद ही तैयार की जा सकती है।

इसके रिपोर्ट के दो भाग होते है एसेट साइड एवं लायबिलिटीज साइड:

एसेट्स (सम्पत्तियाँ) साइड में: – करंट एसेट्स (रोकड़, बैंक बैलेंस, डेब्टर्स) , फिक्स्ड एसेट्स (मशीनरी, भवन, वाहन) होता है एवं

लायबिलिटीज (दायित्व): साइड में:- करंट लायबिलिटीज (क्रेडिटर्स, लोन) , लॉन्ग-टर्म लायबिलिटीज होती है

2-Profit and loss report (P&L report), Or Income statement:-

लाभ और हानि  को  पी एंड एल भी कहते है। यह  एक वित्तीय विवरण है जिसमें एक निश्चित अवधि में कंपनी की आय और व्यय का लेखा जोखा रहता है। इसमें एक वित्तीय तिमाही या वर्ष के दौरान होने वाले राजस्व, लागत और खर्चों को संक्षेप में प्रस्तुत किया जाता है। P & L स्टेटमेंट का पर्याय है आय का विवरण।Income statement
इस रिपोर्ट में कंपनी की आय (Income) का विवरण :- सेल्स/रेवेन्यू , एवं अन्य आय (ब्याज आय, कमीशन)
कंपनी के व्यय (Expenses) का विवरण :- प्रत्यक्ष व्यय (कच्चा माल, वेतन), एवं अप्रत्यक्ष व्यय (किराया, बिजली) रखा जाता है

3- A Cash flow statement:-

कैश फ्लो स्टेटमेंट कंपनी में नकदी का आवागमन को दिखता है . (Cash flow statement)  कंपनी की वर्तमान वित्तीय स्थिति को संक्षेप में प्रस्तुत करता है। यह कंपनी के कैश बैलेंस में हुए बदलाव को प्रदर्शित करता है।

इसमें तीन खंड होते है :-

ऑपरेटिंग एक्टिविटीज,

इन्वेस्टिंग एक्टिविटीज ,

फाइनेंसिंग एक्टिविटीज

4- Trading Account :-

यह केवल केवल ट्रेडिंग कंपनियों के लिए बनाया जाता है।

इस रिपोर्ट में –

१- सकल लाभ/हानि की गणना

२- ओपनिंग/क्लोजिंग स्टॉक एवं

३- प्रचालन आय रखी जाती है

Financial statement analysis:-

कंपनी के बारे में कोई निर्णय लेने के लिए कंपनी के फाइनेंसियल स्टेटमेंट का विश्लेषण या एनालिसिस किया जाता है।

कंपनी के बाहरी स्टेकहोल्डर इसका उपयोग किसी संगठन के समग्र स्वास्थ्य को समझने के साथ-साथ वित्तीय प्रदर्शन और कंपनी के व्यावसायिक मूल्य का निर्धारण  करने के लिए करते हैं ।

आंतरिक घटक इसे वित्त के प्रबंधन के लिए एक निगरानी के उपकरण के रूप में उपयोग करते हैं ।

कंपनी के फाइनेंसियल स्टेटमेंट जैसे बैलेंस शीट, इनकम स्टेटमेंट और कैश फ्लो  स्टेटमेंट की सहायता से कम्पनी का फाइनेंसियल स्टेटमेंट एनालिसिस किया जाता है

Cost Centers:-

कास्ट सेण्टर किसी प्रतिष्ठान के लिए ऐसा प्रावधान है, जिसमे किसी विशेष बिंदु अथवा विशेष प्रयोजन पर किये गए खर्चो को प्रदर्शित किया जाता है|

किसी लेनदेन का लेज़र अकाउंट केवल लेनदेन की प्रकृति के बारे में बताता है| इसके लिए वाउचर एंट्री करने पर वाउचर के narration वाले भाग के अतिरिक्त हमे किसी भाग से यह ज्ञात नहीं हो सकता है की यह लेनदेन प्रतिष्ठान के कौन से विभाग से संबंधित है|

उदाहरण के लिए, किसी कंपनी की विभिन्न शाखाये कास्ट सेण्टर हो सकते है| किसी कंपनी के उत्पादों को भी कॉस्ट सेण्टर के रूप में परिभाषित किया जा सकता है|टैली में कास्ट सेण्टर दो प्रकार के होते है –

  • प्राइमरी कास्ट सेण्टर
  • सेकेंडरी कास्ट सेण्टर

सेकेंडरी कास्ट सेण्टर एक सबग्रुप की तरह होता है ,जो एक प्राइमरी कास्ट सेण्टर के अंतर्गत परिभाषित किया जाता है|

यदि टैली में हमने कोई कास्ट सेण्टर अभी तक परिभाषित नहीं किया है, तो परिभाषित किया जाने पहला कास्ट सेण्टर प्राइमरी कास्ट सेण्टर के रूप में ही परिभाषित हो जाएगा|

एक प्राइमरी कास्ट सेण्टर के अनेक सेकेंडरी कास्ट सेण्टर हो सकते है ,परन्तु एक सेकेंडरी कास्ट सेण्टर का केवल एक ही प्राइमरी कास्ट सेण्टर हो सकता है |

Basic Concept of Inventory (बेसिक कांसेप्ट ऑफ़ इन्वेंटरी):-

कच्चे माल,(Raw material), बिक्री के लिए तैयार हो रहे माल(unfinished Goods), और बिक्री के लिए उपलब्ध आइटम (Finished Goods) तीनो को मिलाकर किसी कंपनी की इन्वेंट्री कही जाती है।

दूसरे शब्दों में किसी भी कंपनी द्वारा कच्चे माल, आधे बने माल और तैयार माल पर जो धन खर्च किया जाता है वह सब इन्वेंट्री के अन्तर्गत आता है |

किसी भी कंपनी की बैलेंस शीट में  इन्वेंट्री को सम्पति के रूप में माना जाता है, क्योकि वह बिक्री के बाद कैश में बदल जाता है |

इन्वेंटरी ऑफ़ प्रोडक्शन कंपनी:-

  1. Raw Material : उत्पादन प्रकिया को पूर्ण करने के लिए जिन आइटम का प्रयोग किया जाता है, जिनसे सेल्स प्रोडक्ट बनता है वह रा मटेरियल या कच्चा माल कहलाता है |
  2. Work in process : यह अर्ध्द निर्मित माल का मूल्य होता है। अर्थात जो माल तैयार हो रहा है उसकी वैल्यू को वर्क इन प्रोसेस कहते है |
  3. Finished Goods : यह वह इन्वेंटरी या माल है जो निर्मित हो चुका है एवं बिक्री के लिए उपलब्ध है|
  4. Consumables:– वह आइटम है जो किसी कंपनी के नियमित कार्यो के लिए प्रयोग होते है। लेकिन ये फिनिश्ड प्रोडक्ट का हिस्सा नहीं होते |

University Exam Questions :-

1- लेखांकन को समझाइये। लेखांकन की विभिन्‍न अवधारणाओं का विस्‍तृत रूप में वर्णन कीजिए। -2019 jan

2- लेखाविधि की निम्‍न अवधारणाओं को  समझाइये : june 2023

     (i)   लागत अवधारणा

     (ii)  मुद्रा-मापन अवधारणा

3- वित्‍तीय लेखांकन क्‍या है? वित्तिय लेखांकन के लाभ एवं हानियों को विस्‍तार से समझाइये – june 2015

4- टैली एकाउन्टिंग क्‍या है? टैली एकाउन्टिंग की विशेषताओ को समझाइये। – june 2015

5- वित्तिय लेखांकन क्‍या है? इसके उदेश्य एवं महत्‍व को समझाइये।  – june 2018

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