Unit-III-TALLY-Reports

Balance sheet in Tally:-   

Balance sheet एक written statement होता है जो company के हर एक details को दिखाता है। इससे यह पता चलता है की कंपनी profit कर रही है या loss । Balance sheet साल के अंत मे बनाते है जिससे यह पता चलता है कि कम्पनी की इस समय financial position क्या है।

यह एक वित्तीय विवरण है, जो व्यवसाय के दायित्व और संपत्ति (Labilities & Assets) को दर्शाता है. Balance sheet के माध्यम से व्यवसाय के स्वामी को ज्ञात होता है कि हमारे कितने दायित्व है जिसे हमें चुकाना है और कितनी संपत्ति है साथ ही साथ Income Receivable और Expense Payable की जानकारी प्राप्त होता है जिससे कंपनी और व्यवसाय का संचालन अच्छे से किया जा सके. Tally में बैलेंस शीट  का शॉर्टकट “B” भी होता है.

Balance sheet को हम दो भागों में बांट सकते हैं Assets & Liabilities. जिसमें Transaction के अनुसार Assets & Liabilities कैटेगरी में डाटा को इनपुट कर सकते हैं.

Balance sheet Format:-

Assets Section : 

  1. Current Assets                          २ Fixed Assets 3-  Good Will                                  ४- Other Assets

Liabilities Section : 

  1. Current Liabilities           २. Payables

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alt +F1 डीटेल्‍स बैंलेंस शीट के लिये

F2  से पीरीयड बदल कर किस भी पीरीयड की बैलेंस शीट देख सकते है।

F12 से बैलेंस शीट कंफीगर कर सकते हैा।


Profit & Loss Account in Tally:-

Profit & Loss Account यह एक वित्तीय विवरण है, जिसमें व्यवसाय के  क्रय और विक्रय किए गए लेनदेन के विवरण दर्शाता है, इसके माध्यम से व्यवसाय में हो रहे लाभ और हानि का पता चल पाता है.

Profit and Loss Account में सभी Indirect Expenses (अप्रत्यक्ष व्ययों) को Gross Profit में से घटाया जाता है और सभी Indirect Income (अप्रत्यक्ष आय) को Gross Profit में जोड़ा जाता है। जिससे Net Profit (शुद्ध लाभ) या Net Loss (शुद्ध हानि) का पता लग जाता है। Profit and Loss Account के Debit side उन सारे expenses (खर्चों) को लिखा जाता है जो goods के क्रय-विक्रय से सम्बंधित नहीं होते हैं।

Profit and Loss Account बनाने के लिये Trading Account (व्यापार खाता) में आये हुए Gross Profit या Gross Loss की राशि में  वो सारे expenses and losses जो अब तक  Trading Account में Debit नहीं किये गए हैं उन्हें अब Debit किया जाता है। इन Expenses में Administration Expenses, Selling Expenses और Distribution Expenses include होते हैं,  ये ‘Indirect Expenses’ कहलाते हैं।

इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि एक businessman को अपने business को अच्छे से चलाने के लिए बहोत सारे खर्चे करने पड़ते हैं जो कि

वे सारे खर्च जो Trading Account में show नहीं किये जाते हैं उन्‍हें प्राफिट और लास एकाउंट में ले लिये जाते है , जिससे व्‍यापारी को यह पता चल जाता है कि एक Accounting Period में उसे कितना Net Profit या Net Loss हुआ । सारे Expenses और Incomes को show करने के बाद दोनों sides का योग या धटाके शुद्व लाभ या शुद्व हानि निकल आती है ।

अगर Profit and Loss Account का Credit Side Debit Side से ज़्यादा होता है तो difference को Net Profit कहा जाता है। और दूसरी तरफ अगर Debit Side Credit Side से ज़्यादा है तो इस difference को Net Loss कहते हैं। Net Profit को Capital में जोड़ा जाता है जबकि Net Loss जो आता है उसे Capital से Less या घटाया जाता है। इसलिए Profit and Loss Account prepare किया जाता है।

Tally में Profit & Loss Account शॉर्टकट की “P” भी होता है.

Profit & Loss Account को हम दो भागों में बांट सकते हैं Income & Expenses. जिसमें Transaction के अनुसार Income & Expenses कैटेगरी में डाटा को इनपुट कर सकते हैं.

Profit & Loss Account Format

Income :

  1. Sales Account
    1. Sales (+)                                                        Sales Return (-)
  2. Closing Stock
  3. Indirect Income
    1. Discount Received (+)                                   Interest Received (+)
  4. Other Income

Expenses : Final Account in Tally

  1. Opening Stock                      Purchase Account                Indirect Expenses

Ratio analysis  –

यह वित्तीय विश्लेषण के लिए एक शक्तिशाली उपकरण है । यह रिपोर्ट पहले से बने सूत्र का उपयोग करके व्यवसाय के स्वास्थ्य को बता देती है । उच्च या निम्न अनुपात व्यवसाय की अच्छी या खराब  स्थिति को दर्शाता है। यह रिपोर्ट न केवल एक फर्म के बाहर के लोगों जिनकी बैलेंस शीट, लाभ और हानि विवरण आदि जैसे अन्य महत्वपूर्ण वित्तीय विवरणों तक सीधी पहुंच नहीं है,  के लिए उपयोगी है, बल्कि आंतरिक प्रबंधन के लिए भी उपयोगी  है । Ratio analysis रिपोर्ट से  एक कंपनी  के हितधारक कंपनी के  खातों की बेहतर समझ और वर्तमान वित्तीय परिदृश्य की बेहतर समझ मिल जाती है ।

          इस रिपोर्ट में दो भाग  होते है। एक में एमाउंट शो हाता है । दसरे भाग  में रेशियो शो होता है । इस रिपोर्ट को प्रिंट भी किया जा सकता है ।  इसकी सहायता से ग्रास प्राफिट रेशियो , नेट प्राफिट रेशियो जाना जाता है। इसके अलावा भी इस रिपोर्ट में बहुत सी व्‍यवसायिक जानकारी होती है। यह एक शार्ट टर्म रिपोर्ट होती है।

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( shortcut key is R)

Trail Balance Sheet:-

  Trail Balance Sheet को  हिंदी में तलपट कहा जाता है, इससे यह जाना जाता है कि वाउचर इंट्री करते समय आंकिक गलती तो नहीं की गयी है। इससे Tally में गलतियों को पहचान कर सुधार लिया जाता है. । ट्रायल बैलेंस में यह पता चलता है कि डेबिट पक्ष का योग क्रेडिट पक्ष के येाग के बराबर है कि नहीं । एकाउंटिंग के डबल इंट्री सिस्‍टम में हमेशा डेबिट पक्ष का योग क्रेडिट पक्ष के योग के बराबर होना चहिये । 

Trail Balance Sheet में एक कंपनी के अंतर्गत बने हुए सभी Ledger Groups  दिखाई देते है, कौन सा लेजर किस ग्रुप का है यह भी दर्शाता है, । तलपट Debit और  Credit राशि को दिखाता है, जिसके माध्यम से त्रुटियों को ढूंढ कर सही कर सकते हैं।   यह सामान्‍यत: वर्ष के अंत में बनाया जाता है।

कई बार ऐसा हो सकता है कि ट्रायल बैंलेस मिल गया हो लेकिन फिर भी लेजर में अशुद्वियां हों । इसलिये ट्रायल बैलेंस को अंतिम रूप से बही की सत्‍यता का प्रमाण नहीं माना जा सकता है। यह गणितीय शुद्वता जांचने की एक पद्वति है। 

 Trail Balance Sheet (तलपट) का Shortcut key DT होता है.