Unit-II- Output Devices

आउटपुट डिवाइस Output Devices:-

आउटपुट डिवाइस की सहायता से कम्‍प्‍यूटर में प्रासेस होने के बाद हम परिणाम को देखते हैं। य‍ह परिणाम किसी भी प्रकार जैसे ध्‍वनि, डाटा, टेक्‍स्‍ट, इमेज और वीडियो इत्‍यादि के रूप में हो सकता है ।

कम्‍प्‍यूटर इनपुट डिवाइस से निर्देश एवं सूचना प्राप्‍त करते है.. था डाटा प्रोसेस करने के बाद आउटपुट डिवाइस से यूजर के समक्ष प्रस्‍तुत करते है। जैसे मॉनीटर , प्रिंटर , स्‍पीकर , इयरफोन और प्रोजेक्‍टर .

आउटपुट डिवाइस के प्रकार

1.मॉनीटर. 2. प्रिंटर. 3. प्रोजेक्‍टर 4. साउंड कार्ड 5.  इयरफोन

मॉनीटर:-

मॉनीटर कम्‍प्‍यूटर की प्राथमिक आउटपुट डिवाइस है। यह एक टी.वी.जैसी स्‍क्रीन पर आउटपुट को प्रदर्शित करती है। मॉनीटर को सामान्‍यत: उनके द्वारा प्रदर्शित रंगो के आधार पर तीन भागों में वर्गीक्रत किया गया है।

(a) मोनोक्रोम       (b) ग्रे- स्‍केल    (c) रंगीन मॉनीटर

मोनोक्रोम:-

मोनोक्रोम दो शब्दों मोनो अर्थात एकल तथा क्रोम अर्थात रंग से मिलकर बना है। इस प्रकार के मॉनीटर अपने आउटपुट को श्वेत–श्याम (ब्लैक & व्हाइट) रंग में प्रदर्शित करते है।

 ग्रे-स्‍केल:-

यह मॉनीटर मोनोक्रोम जैसे होते हैं।  ले‍किन यह किसी भी तरह के डिस्‍प्‍ले को ग्रे शेडस के आउटपुट में प्रदर्शित करते है। इस प्रकार के मॉनीटर अधिकतर हैण्‍डी कम्‍प्‍यूटर जैसे लैपटॉप, मेडिकल उपकरण में प्रयोग किये जाते है।

रंगीन मॉनीटर:-

ऐसा मॉनीटर “आर.जी.बी.RGB” रंगो के संयोग से रंगीन आउटपुट को प्रदर्शित करता है। आर.जी.बी. सिध्‍दांत के कारण ऐसे मॉनीटर उच्‍च रिज़ोल्यूशन के ग्राफिक्‍स प्रदर्शित करने  में सक्षम होते हैं। कम्‍प्‍यूटर मेमोरी की क्षमतानुसार ऐसे मॉनीटर 16 से लेकर 16 लाख तक के रंगों में आउटपुट प्रदर्शित कर सकते है।

मानीटर की विशेषताऍ:-

रिज़ोल्यूशन:-

रिजोल्युयशन स्क्रीन के चित्र की स्पष्टता को बताता है। अधिकतर डिस्पले डिवाइसेस में चित्र, स्क्रीन के छोटे-छोटे डॉट के चमकने से बनते है। स्क्रींन के ये छोटे-छोटे डॉट पिक्स्ल कहलाते है। पिक्सल शब्द एलीमेंट का संक्षिप्त रूप है।

स्क्रीन पर जितने अधिक पिक्सल होगे स्क्रीन का रिजोल्युोशन भी उतना अधिक होगा। अर्थात चित्र उतना ही स्पष्ट होगा। एक डिस्प‍ले रेजोल्युशन में 640×480 है। तो इसका अर्थ है कि स्क्रीन में 640 कॉलम और 480 डॉट की रो से मिलकर बनी है।

रिफरेश रेट:-

मानीटर लगातार कार्य करता रहता है। कंप्यूटर स्क्रीन पर इमेज दाए से बाए एवं ऊपर से नीचे मिटती बनती रहती है। यह प्रक्रिया एक इलेक्ट्रान गन से होती है। इसका अनुभव हम तभी कर पाते है जब स्क्रीन क्लिक करते है या जब रिफरेश रेट कम होती है। मानीटर में रिफरेस रेट को हार्टज में नापा जाता है।

डॉट पिच:-

डॉट पिच एक प्रकार की मापन तकनीक है। जो यह प्रदर्शित करती है कि दो पिक्सल के बीच ओरिजनल अंतर या दूरी कितनी है। इसका मापन मिलीमीटर में किया जाता है। यह मानीटर की गुणवत्ता को प्रदर्शित करता है। मानीटर में डॉट पिच कम होना चाहिए इसको फास्पर पिच भी कहा जाता है। कलर मानीटर की डॉट पिच 0.15 एम एम से प्वा्इंट 3.0 एम एम तक होती है।

इंटरलैसिंग या नान इंटरलैसिंग:-

यह एक एैसी डिस्पले तकनीक है, जो कि मानीटर में रिज़ोल्यूशन की गुणवत्त में और अधिक वृद्धि करती है। इंटरलैसिंग मानीटर में इलेक्ट्रान गन एक बार में एक (odd) लाइन छोड़-छोड़ कर डिस्प्ले करता है, छुटी हुई दूसरी (even) लाइन दूसरी बार में डिस्प्ले होती है। यह तकनीक एक बार में केवल आधी लाइन खीचती थी, क्योकि इंटरलैसिंग मानीटर एक समय में केवल आधी लाइन को ही रिफ्रेस करता है।

नान इंटरलेसिंग मानीटर एक समय में सभी लाइन इल्युमिनेट करता है। यह मानीटर प्रत्येक रिफ्रेस साइकल में सभी लाइनो को प्रदर्शित कर सकता है। इसकी केवल यह कमी थी कि इसका रिस्पांस टाइम धीमा होता था। दोनो प्रकार के मानीटर की रिजोल्युशन क्षमता अच्छी होती है परन्तु नान इन्टरलेसिंग मानीटर ज्यादा अच्छा होता है।

बिट मैपिंग:-

पहले जिन मानीटर का प्रयोग किया जाता था उनमें केवल टेक्सट को ही डिस्प्ले किया जा सकता था। क्योंकि इनमें पिक्सल, जिनसे टेक्स का निर्माण किया जाता था उनकी संख्या सीमित होती थी।

ग्राफिक्स प्रदर्शित करने के लिये बिट मैपिंग तकनीकी विकसीत की गई. इसमें टेक्सट और ग्राफिक्स दोनो को प्रदर्शित किया जा सकता है। इस तकनीक में ‘बिट मैप ग्राफिक्स’ का प्रत्येक पिक्सल आपरेटर के द्वारा नियंत्रित होता है। इससे आपरेटर के द्वारा किसी भी प्रकार की आकृति को स्क्रीन पर बनाया जा सकता है।

मॉनीटर के प्रकार

1. सी.आर.टी मॉनीटर           2.फ्लैट पैनल मॉनीटर  3.एल.सी.डी.          4.एल.ई.डी

सी.आर.टी मॉनीटर CRT:-

सी.आर. टी CRT मॉनीटर सबसे ज्‍यादा प्रयोग होने वाला आउटपुट डिवाइस हैं। जिसे वी.डी.यू. (विजुअल डि‍सप्‍ले  यूनिट) भी कहते है। इसमें एक कैथोड-रे ट्यूब होती हैं जिसे पिक्‍चर ट्यूब कहते है । यह टी.वी. सेट के समान होता है। यह ट्यूब सी.आर.टी. कहलाती हैं ।

सी.आर.टी. तकनीक सस्‍ती और उत्‍तम कलर में आउटपुट प्रदान करती है सी.आर.टी. में इलेक्‍ट्रान गन होता है। जो कि इलेक्‍ट्रान की बीम और कैथोड-रे को उत्‍सर्जित करती है । ये इलेक्‍ट्रान बीम, इलेक्‍ट्रानिक ग्रीड से पास की जाती है ताकि इलेक्‍ट्रान की स्‍पीड को कम किया जा सके।

सी.आर.टी. मॉनीटर की स्‍क्रीन पर फास्‍फोरस की कोडिंग की जाती है । इसलिए जैसे ही इलेक्‍ट्रान बीम स्‍क्रीन से टकराती है तो पिक्सल चमकने लगते हैं और स्‍क्रीन पर इमेज या ले-आउट दिखाई देता है।

एल.सी.डी मॉनीटर LCD :-

एल.सी.डी मॉनीटर को लिक्विड क्रिस्‍टल डिस्‍प्‍ले के नाम से जाना जाता है। यह डिजीटल तकनीक हैं जो एक फ्लैट सतह पर तरल क्रिस्‍टल के माध्‍यम से आकृति बनाता हैं। यह कम जगह लेता है। यह कम ऊर्जा लेता है । तथा सी.आर.टी की अपेक्षा कम गर्मी पैदा करता हैं। यह डिस्‍प्‍ले सबसे पहले लैपटॉप में प्रयोग होता था। परन्‍तु अब यह स्‍क्रीन डेस्‍कटॉप कम्‍प्‍यूटर के लिए भी प्रयोग हो रहा है।

एल.ई.डी मॉनीटर LED :-

एल.ई.डी मॉनीटर या एल.ई.डी डिस्‍प्‍ले एक फ्लैट स्‍क्रीन, फ्लैट पैनल कम्‍प्‍यूटर मॉनीटर या टेलीविजन है। यह बहुत हल्‍का होता है। ये एल.सी.डी मॉनीटर के संशोधित वर्जन है। एल.ई.डी मॉनीटर लाइट इमिटिंग डायोड पर आधारित होते है।

एल.सी. डी. की विशेषताऍं:-

  1. कम जगह लेते है।  २. कम झिलमिलाहट होती है।  ३.  कम ऊर्जा की खपत होती है।  ४. बिजली पर होने वाले खर्च को कम करता है।

एल. सी.डी. की कमियॉं:-

  • रंग की क्‍वालिटी अच्‍छी नही होती है।
  • इसमें केवल एक ही कोण से देखा जा सकता है।
  • यह सी.आर. टी. के मुकाबले में बहुत महँगा होता है।

सी.आर.टी. और एल.सी.डी. में अंतर

सी.आर.टी.

1. यह अधि‍क जगह लेता है 2. यह अधि‍क ऊर्जा की खपत करता है। 3. बिजली पर होने वाला खर्च कम अधि‍क होता है। 4.यह सस्‍ता होता है।    5.इसके रंग की क्‍वलिटी अच्‍छी होती है।

एल.सी.डी.

1. यह कम जगह लेता है        2.इसमे कम ऊर्जा की खपत करता है । 3.यह  बिजली पर होने वाला खर्च कम होता है।  4.यह बहुत महँगा होता है।        5.इसके रंग की क्‍वलिटी अच्‍छी नही होती है।

एल.सी.डी और एल.ई.डी में अंतर:-

एल.सी.डी:-

  • एल.सी.डी का पूर्ण रूप लिक्विड क्रिस्‍टल डिस्‍पले है।
  • इसमें पिक्‍चर की क्‍वालिटी एल.ई.डी से बेहतर होती है।
  • यह ज्‍यादा पावर लेती है।
  • कान्‍ट्रस्‍ट और ब्‍लैक लेवल अच्‍छा होता है।

एल.ई.डी:-

  • एल.ई.डी. का पूर्ण रूप लाइट इमिटिंग डायोड है।
  • इसमें पिक्‍चर क्‍वालि‍टी बेहतर है।
  • यह कम पावर लेती है।
  • कन्‍ट्रक्‍सट और ब्‍लैक लेवल एल.सी.डी से कम होता है।

वीडियो मानक या डिस्‍पले पद्धति:-

वीडियो मानक से तात्‍पर्य मानीटर में लगाए जाने वाले तकनीक से है पर्सनल कम्‍प्‍यूटर की वीडियो तकनीक में दिन प्रतिदिन सुधार आता जा रहा है। अब तक विकसित हुए मानको में वीडियो स्‍टैर्ण्‍डड के कुछ उदाहारण निम्‍नलिखित है। 

  1. वीडियो ग्राफिक्‍स ऐरे
  2.  सुपर वीडियो ग्राफिक्‍स ऐरे
  3. एक्‍स्‍टेण्‍डेड ग्राफिक्‍स

वीडियो ग्राफिक्स अडैप्‍टर :-

इसे वीजीए भी कहते हैं। इसका निर्माण सन् 1987 में आई.बी.एम नामक कम्पनी ने किया था। आजकल बहुत सारे वीजीए मानीटर प्रयोग में लाये जा रहे हैं। वीजीए मॉनीटर का रिजोल्यूाशन इसमें प्रयोग होने वाले रंगों पर निर्भर करता है। आप 16 रंग 640×480 पिक्सेल पर या 256 रंग 320×200 पिक्सेल पर चुन सकते।

सुपर विडियो ग्राफिक्‍स ऐरे:-

आजकल सभी पीसी कम्‍प्‍यूटर में एसवीजीए का प्रयोग किया जा रहा है। यह मॉनीटर 1 करोड़ 60 लाख है कलर को प्रदर्शित करने की क्षमता रखता है। छोटे आकार के एसवीजीए मॉनीटर 800 पिक्‍सेल क्षैतिज तथा 600 पिक्‍सेल ऊर्ध्व प्रदर्शित करते हैं। बडे़ आकार के एसवीजीए मॉनीटर  1280*1224 या 1600*1200 पिक्‍सेल रेजोलुशन प्रदर्शित करते है।

एक्‍सटेण्‍डेड ग्राफिक्स अडैप्‍टर:-

इसे ईजीए कहते है। इसका निर्माण सन् 1990 में आई.बी.एम नामक कम्पनी ने किया था। यह डिस्‍पले सिस्टम वीजीए का उत्तरवर्ती (सक्सेसर) था जो 4814/A डिस्‍पले था। इसका अगला संस्करण एक्सजीए- 216 लाख रंगों में 800×600 पिक्सेल का रिजोलूशन, तथा 65536 मिलियन रंगों में 1024×768 पिक्से्ल का रिजोलूशन प्रदर्शित करता था।

प्रिंटर :-

प्रिंटर एक आनलाइन आउटपुट डिवाइस है जो कम्यूटर से प्राप्त जानकारी को कागज पर छापता है। कागज पर आउटपुट की यह प्रतिलिपि हार्डकापी कहलाती है। कम्यूटर से जानकारी का आउटपुट बहुत तेजी से मिलता है और प्रिंटर इतनी तेजी से कार्य नही कर पाता इसलिए यह आवश्‍यकता महसूस की गई थी कि जानकारियों को प्रिंटर में ही स्टोर किया जा सके। इसलिए प्रिंटर में भी एक मेमोरी होती है जहॉ से यह परिणामों को धीरे-धीरे प्रिंट करता है। प्रिंटर एक एैसा आउटपुट डिवाइस होता है जो साफ्टकापी को हार्डकापी में परिवर्तित करता है।

प्रिंटिग विधि :-

प्रिटिंग विधि दो प्रकार की होती है

1.इम्पैक्ट प्रिंटिग विधि 2.नान इम्पैक्ट प्रिंटिग विधि  

इम्पैक्‍ट प्रिंटिग:-

इम्पैक्ट प्रिंटिग प्रिंटर वह प्रिंटर होते है जो अपना प्रभाव छोड़ते है जैसे – टाइप राइटर। प्रिंटिग की यह विधि टाइपराइटर की विधि के समान होती है। इसमें धातु का एक हैमर या प्रिंट हेड होता है जो कागज व रिबन से टकराता है। इम्पैक्ट प्रिंटिग में अक्षर या करेक्टर ठोस मुद्रा अक्षरो या डॉट मैट्रिक्स विधि से कागज पर उभरते है। 

नान इम्पैजक्टज प्रिटिंग विधि:-

नान इम्पैैक्टर प्रिंटिंग विधि में प्रिंट हेड या कागज के मध्य संपर्क नही होता इसमें लेजर प्रिंटिग द्वारा तकनीक दी जाती है इसलिए इसकी क्‍वालिटी हाई होती है।  

प्रिंटर के प्रकार:-

1. इम्‍पैक्‍ट प्रिंटर:-

1.डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर 2.डेजी व्हील प्रिंटर 3.लाइन प्रिंटर 4.ड्रम प्रिंटर 5.चैन प्रिंटर 6.बैंड प्रिंटर  

नान इम्‍पैक्‍ट प्रिंटर:-

1. लेजर प्रिंटर  2.थर्मल प्रिंटर  3.फोटो प्रिंटर  4.इंकजेट प्रिंटर  5.पोर्टेबल प्रिंटर

डॉट मैट्रिक्‍स प्रिंटर:-

यह एक इम्‍पैक्‍ट प्रिंटर है अत: यह प्रिटिंग करते समय बहुत शोर करता है। इस प्रिंटर की प्रिंट हेड में अनेक पिनो का एक मैट्रिक्‍स होता है और प्रत्‍येक पिन के रिबन और कागज पर स्‍पर्श से एक डॉट छपता है। अनेक डॉट मिलकर एक करेक्‍टर बनाते है। प्रिंट हेड में 7,9,14,18 या 24 पिनो का ओरिजनल समूह होता है। एक बार में एक कॉलम की पिने प्रिंट हेड से बाहर निकलकर डॉट छापती है। जिससे एक करेक्‍टर अनेक चरणो में बनता है और लाइन की दिशा में प्रिंट हेड आगे बढ़ता जाता है।

डॉट मैट्रिक्‍स प्रिंटर की प्रिटिंग गति 30 से 600 करेक्‍टर प्रति सेकण्‍ड होती है। डॉट मैट्रिक्‍स प्रिंटर में पूर्व निर्मित मुद्रा अक्षर नही होते। इसलिए ये विभिन्‍न आकार प्रकार और भाषा के करेक्‍टर ग्राफिक्‍स आदि छाप सकता है। यह प्रिंट हेड की मदद से करेक्‍टर बनाते है जो कि कोड (0 और 1) के रूप में मेमोरी से प्राप्‍त करते है। प्रिंट हेड में इलेक्‍ट्रानिक सर्किट मौजूद रहता है। जो करेक्‍टर को डिकोड करता है इस प्रिंटर की प्रिंटिग क्‍वालिटी अच्‍छी नही होती।

डॉट मैट्रिक्‍स प्रिंटर की विशेषताऍ:-

  1. इसमें फार्म या कार्बन कापियो पर छापने के लिए उपयुक्‍त।
  2. प्रति पृष्‍ठ प्रिटिंग लागत बिल्‍कुल कम।
  3. लगातार फार्म वाले कागज पर छपाई तथा डाटा लागिन के लिए उपयोगी।
  4. विश्‍वसनीय तथा टिकाऊ।

डॉट मैट्रिक्‍स प्रिंटर की कमियॉ:-

  1. शोर युक्‍त
  2. सीमित प्रिंटिग क्‍वालिटी
  3. कम प्रिंटिग गति
  4. सीमित रंगो मे प्रिंटिग

इं‍कजेट प्रिंटर:-

यह नान इम्‍पैक्‍ट प्रिंटर है। जिसमें एक नोजल से कागज पर स्‍याही की बूदो की बौछार करके करेक्‍टर व ग्राफिक्‍स प्रिंट किए जाते है। इस प्रिंटर का आउटपुट बहुत स्‍पष्‍ट होता है क्‍योंकि इसमें अक्षर का निर्माण कई डॉट से मिलकर होता है।

रंगीन इंकजेट प्रिंटर में स्‍याही के 4 नोजल होते है नीला, लाल, पीला, काला इसलिए इसको CMYK प्रिंटर भी कहा जाता है। तथा ये चारों रंग मिलकर किसी भी रंग को उत्‍पन्‍न कर सकते है इसलिए इनका प्रयोग सभी प्रकार के रंगीन प्रिंटर में किया जाता है।

इस प्रिंटर में एक मुख्‍य समस्‍या है कि इसके प्रिंट हेड में इंक क्‍लौगिंग हो जाती है। यदि इससे कुछ समय तक प्रिंटिग न किया जाए तो इसके नोजल के मुहाने पर स्‍याही जम जाती है। जिससे इसके छिद्र बंद हो जाते है इस समस्‍या को इंक क्‍लोगिंग कहा जाता है। आजकल इस समस्‍या को हल कर लिया गया है। इसके अलावा इस प्रिंटर की प्रिंटिग पर यदि नमी आ जाए तो इंक फैलजाती है। इसकी प्रिंटिग क्‍वालिटी 300 डॉट पर इंच होती है।

इंकजेट प्रिंटर की विशेषताऍ:-

  1. कम लागत।
  2. उच्‍च स्‍तर का परीणाम।
  3. चमकीले रंग में छपाई करने में सक्षम।
  4. चित्रों की छपाई के लिए उत्‍तम।
  5. उपयोग में आसान।

इंकजेट प्रिंटर की कमियॉ:-

  1. प्रिंट हेड कम टिकाऊ।
  2. स्‍याही कार्टेज का बदलना।
  3. बड़ी संख्‍या में प्रिंन्टिग के लिए अच्‍छा नही।
  4. इसकी प्रिंन्टिग गति‍ तेज नही।
  5. जलीय स्‍याही पानी संवेदी होती है।

लेजर प्रिंटर:-

लेजर प्रिटंर नॉन इम्‍पैक्‍ट प्रिटंर होते है। लेजर प्रिंटर का प्रयोग कम्‍प्‍यूटर सिस्‍टम में 1970 के दशक से हो रहा है पहले ये मेनफ्रेम कम्‍प्‍यूटर में प्रयोग किये जाते थे। ये प्रिंटर आजकल अधि‍क लोकप्रिय हैं क्‍योंकि ये आपेक्षाकृत अधिक तेज और उच्‍च क्‍वालिटी में टेक्‍स्‍ट और ग्राफिक्‍स छापने में सक्षम हैं।

अधि‍कांश लेजर प्रिंटर में एक अतिरिक्‍त माइक्रो प्रोसेसर रैम व रोम का प्रयोग किया जाता है। यह प्रिंटर भी डॉट्स के द्वारा ही कागज पर प्रिंट करता है। परन्‍तु ये डॉट्स बहुत ही छोटे व पास-पास होने के कारण बहुत स्‍पष्‍ट प्रिंट होते  है। इस प्रिंटर में कार्टेज का प्रयोग किया जाता है। इसमें सूखी स्‍याही भरा जाता है।

लेजर प्रिंटर के कार्य करने की विधि फोटो कॉपी की तरह होती है। फोटोकॉपी मशीन मे तेज रोशनी का प्रयोग किया जाता है। लेजर प्रिंटर 300 से 600 डॉट पर इंच तक या उससे भी अधि‍क रेजोलुशन की छपाई करता है। रंगीन लेजर प्रिंटर उच्‍च क्‍वालिटी का रंगीन आउपुट देता है। इसमे विशेष टोनर होता है जिसमें विभिन्‍न रंगो के कण उपलब्‍ध रहते है। यह प्रिंटर बहुत महॅंगे होते है क्‍योंकि इनके छापने गति उच्‍च होती है। यह प्‍लास्टिक की सीट या अन्‍य सीट पर आउटपुट को प्रिंट कर सकते है।

लेजर प्रिंटर की विशेषताऍ:-

  1. उच्‍च रेजोलुशन।
  2. उच्‍च प्रिंटिंग गति ।
  3. बड़ी मात्रा मे छपाई के लिए उपयुक्‍त।
  4. कम कीमत प्रति पृष्‍ठ छपाई ।
  5. दाग धब्‍बा रहित छपाई।

लेजर प्रिंटर की कमियॉ:-

  1. इंकजेट से अधि‍क महॅंगा।
  2. टोनर तथा ड्रम का बदलना महँगा।
  3. इंकजेट प्रिंटर्स से बड़ा तथा भारी।
  4. वार्मअप टाइम आवश्‍यक।

प्‍लॉटर:-

प्‍लाटर एक आउटपुट डिवाइस है जो प्रिंटर की तरह होता है। यह वेक्‍टर ग्राफिक्‍स को प्रिंट करने के लिए उपयोग किया जाता है। यह पारंपरिक प्रिंटर की तरह डॉटस की एक श्रंखला खींचने के लिए टोनर का उपयोग नहीं करता। यह कागज पर लाइनो को खींचने के लिए एक पेन, पेंसिल, मार्कर या किसी अन्‍य लेखन डिवाइस का उपयोग करता है।

प्‍लाटर प्रिंटर की तुलना में बड़े ग्राफिक्‍स प्रिंट करता है। इससे बड़े चित्र, चार्ट, ग्राफ आदि को प्रिंट किया जाता है। यह 3 डी प्रिंटिंग भी कर सकते हैं। इसके द्वारा बैनर पोस्‍टर आदि को प्रिंट किया जा सकता हैं।

3डी प्रिंटर:-

3 डी प्रिंटर एक आउपुट डिवाइस है। इससे किसी ऑब्‍जेक्‍ट के 3 डी कैड (कम्‍प्‍यूटर एडेड डिजाइन) को चित्र के रूप में प्रिंट कर सकते है। एयरोस्‍पेस, इंजीनियरिंग, दंत चिकित्‍सा, पुरातत्‍व और जैव प्रौद्योगिकी आदि के लिए डिजाइन।

साउण्‍ड कार्ड एवं स्‍पीकर:-

साउण्‍ड कार्ड एक विस्‍तारक बोर्ड होता है। इसका उपयोग साउण्‍ड को सम्‍पादित करने तथा आउटपुट देने के लिए किया जाता है। कम्‍प्‍यूटर में गाना सुनने, फिल्‍म देखने या गेम खेलने  के लिए इसका उपयोग आवयश्‍क होता है। आजकल साउण्‍ड कार्ड मदर बोर्ड में पूर्व निर्मित या इनबिल्ट होता है ।

साउण्‍ड कार्ड तथा स्‍पीकर एक दूसरे के पूरक होते हैं . साउण्‍ड कार्ड की सहायता से ही स्‍पीकर ध्‍वनि उत्‍पन्‍न करता हैं . सभी साउण्‍ड कार्ड “एम.आई.डी.आई MIDI ” सपोर्ट करतेहै। मीडी संगीत को इलेक्‍ट्रॉनिक रूप में व्‍यक्‍त करने का एक मानक हैं।