Unit-III- Computer Coding System

ASCII (अमेरिकनस्‍टैंर्ण्‍ड कोड फॉर इन्‍फोर्मेशन इंटरचेंज):-

ASCII एक कंप्यूटर इन्कोडिंग स्टैंडर्ड है। ASCII स्टैंडर्ड 7-bit करेक्‍टर के सेट से 128 करेक्‍टर को प्रर्दशित करता है। 7-बिट सिस्टम प्रत्येक अक्षर/चिन्ह को 128 अलग-अलग कॉम्बिनेशन से दर्शाता है। इन 128करेक्टर में 95 छापे जाने लायक अक्षर (Letters upper and lower case English letters from A to Z),  संख्याओं (Numbers 0-9), या विशेष चिन्हों (Symbols) होते है। एवं शेष 33 कंट्रोल करेक्टर(esc, del, can  etc.) होते है।

 प्रत्‍येक करेक्‍टर को 0 से 128 तक एक दशमलव संख्‍या व्‍यक्‍त करती  जिसे उस कैरेक्‍टर का ASCII मान कहते हैं। जैसे 97- lowercase ‘a’ के लिये (बाइनरी में 1100001), 98- lowercase ‘b’ के लिये(बाइनरी में 1100011)

अधिकतर माइक्रोप्रोसेर और ‘आई.बी.एम.पी.सी.’ इसी ASCII कोड का उपयोग करते हैं।

ISCII (इंडियन स्क्रिप्‍ट कोड फॉर इन्‍फॉरमेशन इन्‍टरचेंज):-

भारत की विभिन्‍न लिखित प्रणालियों को प्रदर्शित करने हेतु कोडिंग स्‍कीम है। यह मुख्‍य इण्डिया स्‍क्रीप्‍टस तथा रोमन ट्रान्‍सलेशन को इनकोड करती है इसके द्वारा सपोर्ट की जाने वाले स्क्रिप्‍ट आसामी, बंगाली, देवनागरी, गुजराती, गुरूमुखी, कन्‍नड, मलयालम, ऊरई, तमिल तथा तेलगु है।

ISCII कोड की मुख्‍य विशेषताऍ है:-

  1. यह सभी भारतीय स्क्रिप्‍ट हेतु एक मात्र रिप्रजेन्‍टेशन है।
  2. भाषा के अक्षरो हेतु ऊपरी ASCII क्षेत्र में कोड निर्धारित किए गए है।
  3. स्‍कीम मात्राओं हेतु भी कोड निर्धारित करती है।

इसे 1991 में भारतीय स्‍टेण्‍डर्ड ब्‍यूरो द्वारा एक स्‍टेण्‍डर्ड की तरह स्‍थापित किया गया था यह भारतीय स्क्रिप्‍ट को प्रदर्शित करने हेतु 8 बिट कोड है।

यूनिकोड:-

कम्‍प्‍यूटर के बढ़ते व्‍यवहार तथा अलग-अलग भाषाओं में कम्‍प्‍यूटर के उपयोग में एक पब्लिक कोड की आवश्‍यकता को जन्‍म दिया। जिसमें संसार के प्रत्‍येक करेक्‍टर के लिए एक नियत अलग कोड निर्धारित हो ताकि प्रत्‍येक भाषा में प्रत्‍येक प्रोग्राम तथा प्रत्‍येक साफ्टवेयर में उसका प्रयोग किया जा सके, इसके लिए यूनीकोड की व्‍यवस्‍था की गई है, जिसमें 1 लाख कैरेक्‍टर के निरूपण क्षमता है।

यूनिकोड विश्‍व की सभी भाषाओं में प्रयुक्‍त पहले 256 कैरेक्‍टर का निरूपण ASCII कोड के समान ही है। इसमें प्रत्‍येक कैरेक्‍टर को 32 बिट में निरूपित किया जाता है। यूनिकोडमें 3 प्रकार की व्‍यवस्‍था प्रयोग में लायी जाती है।

यू.टी.एफ-8 (यूनिकोड ट्रासफारमेशन फार्मेशन-8) :-

यू.टी.एफ.-8 फार्मेट में समस्‍त यूनिकोड अक्षरो को एक, दो, तीन या चार बाइट के कोड में बदला जाता है।

यू.टी.एफ-2:-

इस फार्मेट में यूनीकोड अक्षरो को एक या दो शब्‍दो (एक शब्‍द = 16 बिट) के कोड में बदला जाता है अत: इसे वर्ड ओरियन्‍टेड फार्मेट भी कहते है। 

यू.टी.एफ-32 :-

इस कोड में समस्‍त अक्षरो को दो शब्‍द यानि 32 बिट के यूनिकोड में बदला जाता है।

नंबर सिस्‍टम आफ कम्‍प्‍यूटर:-

नंबर सिस्टम (Number System) किसी भी संख्या को प्रस्तुत करने का एक तरीका है। यह गणित में संख्याओं को लिखने, पढ़ने और उन पर गणना करने की एक प्रणाली है। नंबर सिस्टम में अंक (Digits) और आधार (Base) होते हैं, जो संख्याओं के मान को निर्धारित करते हैं।

 किसी संख्‍या में अंको की स्थिति दाऍ से बाऍ और गिनी जाती है किसी संख्‍या में प्रत्‍येक अंक का मान उसके संख्‍यात्‍मक मान तथा स्‍थानीय मान पर निर्भर होता है। इसी संख्‍या का कुल मान प्रत्‍येक अंक के मान के योगफल होता है। डेसीमल नंबर सिस्‍टम सर्वाधिक प्राचीन और सबसे प्रचलित संख्‍या पद्धति है।

कम्‍प्‍यूटर  में नंबर सिस्‍टम का प्रयोग:-

हम गणना के लिए दशमलव आधारित संख्‍या पद्धति (डेसीमल नंबर सिस्‍टम) का प्रयोग करते हैं। जिसमें 0 से 9 तक ( कुल 10) अंको का प्रयोग किया जाता हैं। अन्‍य सभी अंक इन्‍हीं अंको से मिलकर बनते हैं। परन्‍तु कम्‍प्‍यूटर डेसीमल नंबर सिस्‍टम का प्रयोग नही करता है। कम्‍प्‍यूटर बाइनरी नंबर सिस्‍टम प्रयोग करता है।

कम्‍प्‍यूटर में प्रयोग होने वाली नंबर सिस्‍टम है:-

  1. द्विआधारी संख्‍या पध्‍दति (बाइनरी नंबर सिस्‍टम)
  2. आक्‍टल संख्‍या पध्‍दति (आक्‍टल नंबर सिस्‍टम)
  3. हैक्‍साडेसीमल संख्‍या पध्‍दति ।

बाइनरी नंबर सिस्‍टम:-

बाइनरी नंबर सिस्‍टम में दो अंक 0 और 1 होते है तथा इनके कुल अंको की संख्‍या 2 होती हैं। इसलिए इस नंबर सिस्‍टम का बेस 2 होता है। बाइनरी नंबर सिस्‍टम में 0 और 1 के अंको को बाइनरी  डिजिट या बिट कहते हैं।किसी बाइनरी नबंर का मान दायीं से बायीं के क्रम में उसके स्‍थानीय मान के बेस पर निकाला जाता है। जैसे 110011.

कंप्यूटर बाइनरी सिस्‍टम प्रयोग करता है क्‍योंकि  इलेक्ट्रॉनिक सर्किट्स केवल हाई (1) और लो (0) वोल्टेज को समझते हैं। एवं बाइनरी लॉजिक (AND, OR, NOT गेट्स) पर कंप्यूटर की सारी गणना निर्भर करती है।

आक्‍टल नंबर सिस्‍टम:-

आक्‍टल नंबर सिस्‍टम में कुल 8 अंक ( 0,1,2,3,4,5,6,7) होते हैं। इसलिए इस नंबर सिस्‍टम का बेस 8 होता है। ऑक्‍टल संख्‍या के प्रत्‍येक अं‍क का  स्‍थानीय मान इस प्रकार होता है। जैसे

डेसीमल नंबर सिस्‍टम:-

डेसीमल नंबर सिस्‍टम में कुल 10 (0,1,2,3,4,5,6,7,8,9) तक के अंक होते है। इस नंबर सिस्‍टम का बेस 10 होता है। क्‍योंकि इसमें 10 संकेत या अंक होते है डेसीमल नंबर में लिखी गई किसी संख्‍या का मान निम्‍नलिखित 2 गुण या अर्थ रखता है।

  1. संकेतमान (सिम्‍बल वैल्‍यू) :- ये 0 से 9 तक के अंक होते है।
  2. स्‍थानीयमान (प्रोजेशनल वैल्‍यू) :- संख्‍या के दायीं से बायीं दिशा में बेस 10 की घात (पावर) के क्रम में जैसे – हजार, सैकड़ा, दहाई, इकाई आदि वृद्धि होती है। ये क्रमश: इस प्रकार व्‍यवस्थित होते हैं – हजार  सैकड़ा दइाई  इकाई

हेक्‍सा डेसीमल नंबर:-

 हेक्‍साडेसीमल नंबर सिस्‍टम में कोई 16 अंक  (0-9 , A=10, B=11, …, F=15) 10,11, 12,13,14,15) अंक होते है। 10 अंक डेसीमल नंबर सिस्‍टम के अंतर्गत आने वाले 0 से 9 तथा शेष 6, A से F तक के वर्णमाल के अक्षर होते है। A से F, 10 से 15 तक की मात्रा को व्‍यक्‍त करता है।

प्रत्‍येक हेक्‍साडेसीमल अंक 4 बाइनरी अंको को व्‍यक्‍त करता है। हेक्‍साडेसीमल नम्‍बर सिस्‍टम में कुल 16 अंक होते है। इसलिए इसका बेस 16 होता है।

IMPORTENT QUESTION-

1 -निम्नलिखित की व्याख्या कीजिये :Dec 2019

(i) Floppy Disk

(ii) Hard Disk

(iii) Zip Drive

(iv) Memory Card

2- निम्नलिखित की व्याख्या कीजिये :Dec 2019

(i) Magnetic Disk

(ii) Vedio Disk

(iii) Blue Ray Disk

(iv) Flash Drive

3- ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है ? इसके प्रमुख कार्य लिखिए। Dec 2025

4- कंप्यूटर में प्रमुख कोडिंग सिस्टम ( ASCII, ISCII, Unicode) पर टिप्पणी लिखिए। Dec 2025

5 .(A) सिस्टम सॉफ्टवेयर और एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर क्या है ? उनके अंतर को समझाइए। जून 2026

(B ) कंप्यूटर नंबर सिस्टम क्या है ? नंबर सिस्टम की विशेषताएँ बताइये। जून 2026

6 . (A ) ऑपरेटिंग सिस्टम को परिभाषित कीजिये। अलग -अलग तरह के ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में बताइए। जून 2026

(B ) निम्नलिखित को समझाइये :

(i) Word Processing

(ii) Database management

(iii) High level language

(iv) ASCII

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