विपक्ष में भगदड़ (लाभ / हानि)
बीजेपी के ,मध्य प्रदेश जैसे कई राज्यों में 20, और केंद्र में लगातार 10 वर्षों से सत्ता में रहने के कारण विपक्ष हताश है .
2014 से पहले ऐसा राजनीतिक पर्यावरण था ,जिसमें अधिकांश सत्ताधारी राजनितिक कार्यकर्ताओं के ,जीविका के साधन , सत्ता के नजदीक रहने से ही फलते-फूलते थे .
इसलिए, बड़ी मात्रा में आर्थिक ,और कुछ थोड़ी मात्रा वैचारिक कारण से, विपक्षी दलों के तमाम नेता और कार्यकर्त्ता सत्ताधारी बीजेपी से जुड़ रहे है.
विपक्षी नेताओं के इस भगदड़ से भाजपा को कई लाभ और कई हानियां भी हो सकती है।

भाजपा के लिए लाभ (Advantages):
राजनीतिक शक्ति का वृद्धि:
विपक्षी नेताओं के भाजपा में शामिल होने से उस क्षेत्र में पार्टी की राजनीतिक शक्ति और प्रभाव बढ़ता है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां उस नेता का प्रभाव अधिक होता है। असाम में डा हेमंत विस्वा शर्मा एक सुंदर उदाहरण है
वोटर बेस का विस्तार:
दूसरे दलों के नेताओं के साथ उनके समर्थक और वोटर बेस भी भाजपा की ओर आकर्षित होते है, जिससे पार्टी की जीत की सम्भावना बढती है ।
संगठनात्मक फायदा :
अनुभवी नेताओं के साथ आने से पार्टी को संगठनात्मक ताकत मिलती है, जो चुनावी अभियान प्रबंधन और मैदानी संगठन के लिए उपयोगी होता है।
रणनीतिक लाभ :
विपक्षी नेताओं के जुड़ने से भाजपा को प्रतिद्वंद्वी दलों की रणनीति, काम करने के तरीके और उनकी समझ की जानकारी हो जाती है . यह जानकारी विपक्ष को कमजोर करने में अत्यंत उपयोगी होती है ।

भाजपा के लिए हानियां (Disadvantages):
कार्यकर्ताओं में असहमति:
विपक्षी नेताओं के शामिल होने से भाजपा के छेत्रीय प्रशिक्षित काडर में असहमति हो सकती है, पार्टी के सदस्य अपने को अनदेखा और हताश महसूस कर सकते हैं ।
वैचारिक संघर्ष :
आने वाले विपक्षी नेता की राजनितिक विचारधारा भाजपा के मूल सिद्धांतों से बेमेल हो सकती है . कालांतर में यह वैचारिक विरोधाभास पार्टी की मूल विचारधारा एवं मूल्यों को हल्का कर सकता है। नेतृत्व के बीच संघर्ष पैदा हो सकता है।
जनता में अविश्वास :
अगर विपक्षी नेता का नाम पूर्व में भ्रष्टाचार, विवाद या अनैतिक आचरण से जुड़ा रहा है, तो उनके पार्टी में शामिल होने से पार्टी की छवि और जनता में पार्टी के प्रति विश्वास को धक्का लगता है ।
मूल समर्थकों में निराशा :
विरोधी विचारधारा की पार्टियों के नेताओं के साथ जुड़ने से भाजपा के कोर समर्थकों का पार्टी के प्रति मोहभंग हो सकता है. उन्हें लग सकता है की उनके साथ वैचारिक धोखा हुआ , जिससे जमीनी स्तर पर समर्थन में कमी आ सकती है।
निष्कर्ष –
विपक्षी नेताओं को भाजपा में शामिल करने से अल्पकालिक राजनीतिक और रणनीतिक लाभ मिल सकते हैं, लेकिन इसमें अन्तर्निहित जोखिम और चुनौतियाँ भी हैं।
भाजपा को अपनी चुनावी बढ़त और जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए इनसे प्रभावी ढंग से निपटना होगा।
यह भी समझना होगा की भाजपा की ताकत, हिंदुत्व और राष्ट्रवादी विचार के कारण भाजपा से जुड़े, उसके मैदानी कार्यकर्त्ता है।
विपक्ष के नेताओं को जोड़ने से , अगर पार्टी की हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की धार भोथरी होने की जगह , और पैनी हो तभी भाजपा की तरफ भगदड़ से भाजपा को दूरगामी लाभ होगा ।



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