Uniform Civil Code (समान नागरिक संहिता) में सभी धर्म, सम्प्रदाय और जातियों के लोगों के लिए एक समान कानून को लागू करने का प्रस्ताव है।
वर्तमान में क्रिमिनल लॉ (फौजदारी) और सिविल लॉ (दीवानी), common law, customary law, religious law एवं corporate law इत्यादि तरह के कानून देश में लागू है।
अधिकतर कानून गुलामी काल से विरासत में मिले है। अंग्रेजों द्वारा पहली बार लाये गए विभिन्न कानून आज भी संशोधित रूपों में लागू हैं।
मोदी सरकार द्वारा लगातार भारतीय परिवेश के अनुसार इन कानूनों को परिवर्तित किया जा रहा है।दीवानी और फौजदारी दोनों कानून हमारी भारतीय कानून व्यवस्था की रीढ़ हैं
नागरिक कानून civil law
व्यक्तिगत और सामाजिक मुद्दों के लिए है, जैसे संपत्ति, विवाह, तलाक, वसीयत, विपत्ति , उत्पादन, इत्यादि से सम्बंधित मामले।
क्रिमिनल लॉ Criminal Law,
अपराधों से संबंधित है। यह व्यक्ति या समुदाय द्वारा देश के कानूनों का उल्लंघन करने पर लगता है। ऐसे अपराध जिससे किसी व्यक्ति को चोट पहुंचती है तो यह पूरे समाज के प्रति अपराध माना जाता है। अपराध करने वाले व्यक्ति पर कारावास और/या आर्थिक दंड लगाया जाता है। इसमें अपहरण, चोरी, बलात्कार, हत्या इत्यादि के मामले आते है।
Criminal Law कमोबेश सभी भारतीय नागरिकों पर लागू होते है।
लेकिन सिविल कानून Personal Law के नाम पर विभिन्न धर्म और समुदाय जैसे , हिन्दू, सिख, ईसाई ,बौद्ध ,जैन ,मुसलमान सभी के लिए अलग अलग है।
इस नियम का अपवाद केवल गोवा है , जहां एक समान नागरिक संहिता लागू है, जिसमें सभी धर्मों में विवाह, तलाक और गोद लेने के संबंध में एक समान कानून है।
धर्म के आधार पर अलग-अलग कानून और मैरिज एक्ट होने से सामाजिक ढ़ांचा बिगड़ा हुआ है। यही कारण है कि देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड की मांग उठ रही है जिससे सभी जाति, धर्म, वर्ग और संप्रदाय एक ही क़ानूनी सिस्टम में आ जाएँ ।
समान नागरिक संहिता के अनुसार, विवाह, तलाक, संपत्ति, उत्तराधिकार और अन्य सामाजिक बातों के लिए एक समान क़ानूनी ढांचा होगा।
जिससे एक समृद्ध, समरस, और समानांतर समाज का निर्माण होगा। भारत के हर नागरिक, पुरुष हो या महिला ,उसको भेदभाव के उसके अधिकारों और कर्तव्यों का समान लाभ, अवसर और न्याय मिलेगा ।
गोवा के बाद भाजपा शासित देवभूमि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू की जा रही है।



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