बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ 🌷🌷
परमार राजवंश के शासक राजा भोज ने धार में वर्ष 1034 में एक महाविद्यालय की स्थापना की थी। इसे बाद में भोजशाला के रूप में जाना जाने लगा।
राजा भोज माता सरस्वती के महान उपासक थे। उन्होंने भोजशाला में एक भव्य माता सरस्वती की एक प्रतिमा स्थापित की। इसे तब सरस्वती सदन कहा था। भोजशाला को माता सरस्वती का प्राकट्य स्थान भी माना जाता है।
भोजशाला विश्व का प्रथम संस्कृत अध्ययन केंद्र भी था। इस विश्वविद्यालय में देश-विदेश के हजारों विद्वान आध्यात्म, राजनीति, आयुर्वेद, व्याकरण, ज्योतिष, कला, नाट्य, संगीत, योग, दर्शन आदि विषयों का ज्ञान प्राप्त करने के लिए आते थे।
इसके अतिरिक्त इस शिक्षा केंद्र में वायुयान, जलयान तथा कई अन्य स्वचालित (ऑटोमैटिक) यंत्रों के विषय में भी अध्ययन किया जाता था।
इस्लामिक आक्रमण

ऐतिहासिक तथ्यों के मुताबिक, सन् 1305 में मुस्लिम आक्रांता अलाउद्दीन खिलजी ने भोजशाला पर आक्रमण किया और उसे नष्ट कर दिया। बाद में सन् 1401 में दिलावर खां ने भोजशाला के एक भाग में मस्जिद का निर्माण करा दिया।
अंततः सन् 1514 में महमूद शाह खिलजी ने भोजशाला के शेष बचे हिस्से पर मस्जिद का निर्माण करा दिया। समय के साथ यहाँ विवाद बढ़ता गया और अंग्रेजी हुकूमत के दौरान भोजशाला को संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया गया।
ब्रिटिश काल में 1902 में मेजर किनकैड भारत की कई अमूल्य वस्तुओं के साथ मां सरस्वती की एक अद्भुत प्रतिमा को भी अपने साथ लंदन ले गए. तब से आज तक मां सरस्वती की यह मूर्ति लंदन के एक म्यूजियम में कैद है. इसे वापिस लाने की कई नाकाम कोशिशें भी जा चुकी हैं.
माँ सरस्वती आप को बुद्धि विवेक और शक्ति का वरदान दे ।🙏🙏
हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी ,अम्ब विमल मति दे। ॥
जग सिरमौर बनाएं भारत, वह बल विक्रम दे। ॥
साहस शील हृदय में भर दे, जीवन त्याग-तपोमय कर दे,
संयम सत्य स्नेह का वर दे, स्वाभिमान भर दे। ॥1
हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी
अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥
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