Application of blockchain in secure transactions | PGDCA APSU New Syllabus Hindi Notes

E-Commerce & Cyber Security

Module 1- Fundamental of E-Commerce
Module 2- Online Payment Tran System
Module 3 Web Security Threat solutions
Module 4 – Cyber Security Digital Sign.
Module 5 – Cyber Laws Ethics Data Privacy
Module 6 -Trends Innovations in E-commerce


Application of blockchain in secure transactions(intro)

पारंपरिक डिजिटल लेन-देन प्रणाली में एक केंद्रीय संस्था, जैसे बैंक या सरकारी रिकॉर्ड कार्यालय, सभी रिकॉर्ड्स को नियंत्रित करती है, और इस केंद्रीय व्यवस्था पर ही पूरा विश्वास टिका होता है। यदि वह केंद्रीय डेटाबेस हैक हो जाए, उसमें छेड़छाड़ हो जाए, या वह संस्था स्वयं भ्रष्ट निर्णय ले, तो संपूर्ण व्यवस्था प्रभावित होती है।

ब्लॉकचेन एक ऐसी क्रांतिकारी तकनीक है जो इस केंद्रीकृत विश्वास मॉडल को पूरी तरह बदल देती है। यह एक ऐसी प्रणाली प्रस्तुत करती है जिसमें किसी एक केंद्रीय प्राधिकरण के बिना भी हजारों लोग आपस में सुरक्षित और विश्वसनीय लेन-देन कर सकते

ब्लॉकचेन की मूल अवधारणा (Imp.)

ब्लॉकचेन एक डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर तकनीक है, जिसका अर्थ है कि लेन-देन का रिकॉर्ड किसी एक केंद्रीय सर्वर पर नहीं बल्कि नेटवर्क में मौजूद हजारों कंप्यूटरों पर एक साथ संग्रहीत होता है। इन सभी कंप्यूटरों को नोड कहा जाता है, और हर नोड के पास संपूर्ण लेजर की एक समान प्रतिलिपि होती है। जब भी कोई नया लेन-देन होता है तो वह नेटवर्क के सभी नोड्स को भेजा जाता है, और सभी नोड्स मिलकर इस लेन-देन की वैधता की पुष्टि करते हैं।

ब्लॉकचेन का नाम इसकी संरचना से ही स्पष्ट होता है — डेटा को छोटे-छोटे ब्लॉक्स में संग्रहीत किया जाता है, और प्रत्येक नया ब्लॉक पिछले ब्लॉक से एक क्रिप्टोग्राफिक हैश के माध्यम से जुड़ा होता है, जिससे एक श्रृंखला बनती है। इस संरचना के कारण इसे ब्लॉकचेन कहा जाता है।

 हर ब्लॉक में तीन मुख्य भाग होते हैं — लेन-देन का डेटा, पिछले ब्लॉक की हैश वैल्यू, और स्वयं उस ब्लॉक की हैश वैल्यू। यह डिज़ाइन ब्लॉकचेन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता को जन्म देता है, जिसे इम्यूटेबिलिटी अर्थात अपरिवर्तनीयता कहते हैं — एक बार कोई ब्लॉक जुड़ जाने के बाद उसमें बदलाव करना व्यावहारिक रूप से असंभव हो जाता है, क्योंकि किसी एक ब्लॉक को बदलने से उसकी हैश वैल्यू बदल जाएगी, जिससे आगे की सभी ब्लॉक्स की श्रृंखला टूट जाएगी।

ब्लॉकचेन की मुख्य विशेषताएँ (Imp.)

ब्लॉकचेन की कुछ मौलिक विशेषताएँ इसे पारंपरिक डेटाबेस से अलग बनाती हैं। डिसेंट्रलाइजेशन अर्थात विकेंद्रीकरण इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है — कोई एक संस्था या व्यक्ति पूरे नेटवर्क को नियंत्रित नहीं करता, बल्कि निर्णय सामूहिक सहमति से होते हैं। ट्रांसपेरेंसी अर्थात पारदर्शिता का अर्थ है कि पब्लिक ब्लॉकचेन में हर लेन-देन नेटवर्क के सभी सदस्य देख सकते हैं, जिससे छिपे हुए भ्रष्ट लेन-देन की संभावना कम हो जाती है। इम्यूटेबिलिटी का अर्थ है कि एक बार रिकॉर्ड हो जाने के बाद डेटा में बदलाव नहीं किया जा सकता। कंसेंसस मैकेनिज्म वह प्रक्रिया है जिससे नेटवर्क के सभी नोड्स किसी नए लेन-देन की वैधता पर सामूहिक रूप से सहमत होते हैं, बिना किसी केंद्रीय अथॉरिटी की आवश्यकता के।

ब्लॉकचेन कैसे काम करता है (Imp.)

ब्लॉकचेन में किसी लेन-देन को रिकॉर्ड करने की प्रक्रिया कई चरणों में होती है। जब कोई व्यक्ति एक नया लेन-देन शुरू करता है, तो यह लेन-देन नेटवर्क में मौजूद सभी नोड्स को प्रसारित किया जाता है। नेटवर्क के नोड्स कंसेंसस मैकेनिज्म के माध्यम से इस लेन-देन की वैधता की जाँच करते हैं — जैसे यह सुनिश्चित करना कि भेजने वाले के पास वास्तव में पर्याप्त बैलेंस है। एक बार वैधता सिद्ध हो जाने पर यह लेन-देन अन्य लेन-देनों के साथ मिलकर एक नया ब्लॉक बनाता है। यह नया ब्लॉक क्रिप्टोग्राफिक हैश के माध्यम से पिछले ब्लॉक से जुड़ जाता है और संपूर्ण नेटवर्क में वितरित हो जाता है। एक बार ब्लॉक नेटवर्क में जुड़ जाने के बाद उसे बदलना असंभव हो जाता है क्योंकि इसके लिए नेटवर्क के अधिकांश नोड्स पर एक साथ नियंत्रण आवश्यक होगा, जो व्यावहारिक रूप से असंभव है।

प्रूफ ऑफ वर्क और प्रूफ ऑफ स्टेक दो प्रमुख कंसेंसस मैकेनिज्म हैं। प्रूफ ऑफ वर्क में नोड्स — जिन्हें माइनर कहा जाता है — एक जटिल गणितीय पहेली हल करने में कंप्यूटिंग पावर खर्च करते हैं, और जो सबसे पहले हल करता है उसे नया ब्लॉक जोड़ने का अधिकार मिलता है। बिटकॉइन इसी मैकेनिज्म पर काम करता है। प्रूफ ऑफ स्टेक में नोड्स अपनी क्रिप्टोकरेंसी को नेटवर्क में स्टेक अर्थात गिरवी रखते हैं, और इस स्टेक की मात्रा के आधार पर ब्लॉक जोड़ने का अधिकार मिलता है — यह तकनीक प्रूफ ऑफ वर्क से बहुत कम ऊर्जा खपत करती है। एथेरियम ने 2022 में प्रूफ ऑफ वर्क से प्रूफ ऑफ स्टेक में परिवर्तन किया।

ब्लॉकचेन के प्रकार (Imp.)

ब्लॉकचेन को उसकी एक्सेस पॉलिसी के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।

पब्लिक ब्लॉकचेन में कोई भी व्यक्ति नेटवर्क में शामिल हो सकता है, लेन-देन देख सकता है और सत्यापन प्रक्रिया में भाग ले सकता है। बिटकॉइन और एथेरियम इसके प्रमुख उदाहरण हैं। यह पूर्णतः विकेंद्रीकृत और पारदर्शी है, परंतु इसकी गति धीमी होती है।

प्राइवेट ब्लॉकचेन में केवल अधिकृत सदस्य ही नेटवर्क में शामिल हो सकते हैं। यह आमतौर पर किसी एक संगठन द्वारा नियंत्रित होता है और आंतरिक उपयोग के लिए होता है। इसकी गति पब्लिक ब्लॉकचेन से बहुत अधिक होती है क्योंकि सत्यापन के लिए कम नोड्स शामिल होते हैं।

कंसोर्शियम ब्लॉकचेन कई संगठनों के एक समूह द्वारा संयुक्त रूप से नियंत्रित होता है, जैसे बैंकों का एक समूह जो आपस में एक साझा ब्लॉकचेन नेटवर्क चलाते हैं।

ब्लॉकचेन सुरक्षित लेन-देन क्यों सुनिश्चित करता है (Imp.)

ब्लॉकचेन की सुरक्षा कई तकनीकी आधारों पर टिकी है जो इसे पारंपरिक डेटाबेस से अधिक सुरक्षित बनाते हैं।

क्रिप्टोग्राफिक हैशिंग के कारण हर ब्लॉक एक अद्वितीय हैश वैल्यू से जुड़ा होता है। यदि कोई हमलावर किसी पुराने ब्लॉक के डेटा में बदलाव करने का प्रयास करे, तो उस ब्लॉक की हैश वैल्यू बदल जाएगी, जिससे आगे के सभी ब्लॉक्स की श्रृंखला अमान्य हो जाएगी और यह छेड़छाड़ तुरंत स्पष्ट हो जाएगी।

51% Attack

डिस्ट्रिब्यूटेड नेचर के कारण डेटा किसी एक स्थान पर नहीं बल्कि हजारों नोड्स पर संग्रहीत होता है। किसी एक नोड को हैक करने से पूरा नेटवर्क प्रभावित नहीं होता, क्योंकि अन्य सभी नोड्स के पास वही सही डेटा मौजूद रहता है। इसके विपरीत किसी डेटा में बदलाव करने के लिए हमलावर को नेटवर्क के अधिकांश — सामान्यतः 51 प्रतिशत से अधिक — नोड्स पर एक साथ नियंत्रण प्राप्त करना होगा, जिसे 51 प्रतिशत अटैक कहा जाता है। यदि कोई व्यक्ति या समूह नेटवर्क की 50% से अधिक कंप्यूटिंग शक्ति या वैलिडेशन शक्ति पर नियंत्रण प्राप्त कर ले, तो वह कुछ लेन-देन को प्रभावित करने या डबल स्पेंडिंग का प्रयास कर सकता है। बड़े पब्लिक ब्लॉकचेन में यह व्यावहारिक रूप से असंभव है क्योंकि इसके लिए अत्यधिक कंप्यूटिंग पावर चाहिए होगी।
बड़े सार्वजनिक ब्लॉकचेन में यह अत्यंत कठिन और महंगा होता है।

डिजिटल सिग्नेचर का उपयोग ब्लॉकचेन में हर लेन-देन को प्रमाणित करने के लिए होता है। जब कोई व्यक्ति अपनी क्रिप्टोकरेंसी भेजता है, तो वह अपनी प्राइवेट की से उस लेन-देन पर हस्ताक्षर करता है, जिससे यह सिद्ध होता है कि लेन-देन वास्तव में वही व्यक्ति कर रहा है जिसके पास वह संपत्ति है।

स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट एक स्व-निष्पादित प्रोग्राम है जो ब्लॉकचेन पर पूर्व-निर्धारित शर्तें पूरी होने पर स्वचालित रूप से कार्य करता है, बिना किसी मध्यस्थ की आवश्यकता के। उदाहरण के लिए एक स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट यह सुनिश्चित कर सकता है कि सामान की डिलीवरी की पुष्टि होने पर भुगतान स्वचालित रूप से जारी हो जाए।

ब्लॉकचेन के व्यावहारिक उपयोग — विशेषकर भारतीय संदर्भ में (Imp.)

क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल मुद्रा ब्लॉकचेन का सबसे प्रसिद्ध उपयोग है। बिटकॉइन और एथेरियम जैसी क्रिप्टोकरेंसी पूर्णतः ब्लॉकचेन पर आधारित हैं। भारत का सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी अर्थात डिजिटल रुपी भी ब्लॉकचेन-आधारित तकनीक का उपयोग करता है, जिसे RBI ने 2022 में पायलट के रूप में लॉन्च किया।

सप्लाई चेन मैनेजमेंट में ब्लॉकचेन का उपयोग किसी उत्पाद की संपूर्ण यात्रा को पारदर्शी रूप से ट्रैक करने के लिए होता है। भारत में कुछ राज्य सरकारों ने कृषि उत्पादों की सप्लाई चेन में ब्लॉकचेन का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिससे किसान से उपभोक्ता तक उत्पाद की संपूर्ण यात्रा और मूल्य निर्धारण पारदर्शी बनाया जा सके।

लैंड रजिस्ट्री अर्थात भूमि रिकॉर्ड में ब्लॉकचेन का उपयोग भारत के कई राज्यों में पायलट स्तर पर हो रहा है। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों ने भूमि रिकॉर्ड को ब्लॉकचेन पर रखने का प्रयोग किया है, जिससे भूमि स्वामित्व के दस्तावेज़ों में फर्जीवाड़ा और विवाद कम हो सकें, क्योंकि एक बार ब्लॉकचेन पर दर्ज रिकॉर्ड में बदलाव करना अत्यंत कठिन है।

शैक्षणिक प्रमाणपत्र सत्यापन में कुछ विश्वविद्यालयों ने डिग्री और प्रमाणपत्रों को ब्लॉकचेन पर दर्ज करना शुरू किया है, जिससे फर्जी डिग्री प्रमाणपत्रों की समस्या कम हो सके और कोई भी नियोक्ता तुरंत प्रमाणपत्र की वास्तविकता सत्यापित कर सके।

हेल्थकेयर रिकॉर्ड में ब्लॉकचेन मरीज के मेडिकल रिकॉर्ड को सुरक्षित और सत्यापन-योग्य बनाने में सहायक है, जहाँ मरीज स्वयं नियंत्रित कर सकता है कि उसका डेटा किस डॉक्टर या संस्था के साथ साझा हो।

GST और टैक्स प्रणाली में कुछ विशेषज्ञों ने प्रस्ताव दिया है कि ब्लॉकचेन का उपयोग करके इनवॉइस का सत्यापन वास्तविक समय में किया जा सकता है, जिससे फर्जी इनवॉइस के माध्यम से होने वाली टैक्स चोरी पर रोक लगाई जा सके।

ब्लॉकचेन के लाभ और सीमाएँ (Imp.)

ब्लॉकचेन के लाभों में किसी केंद्रीय अथॉरिटी की आवश्यकता न होना, डेटा में छेड़छाड़ की असंभवता के कारण उच्च सुरक्षा, संपूर्ण पारदर्शिता, और मध्यस्थों को हटाकर लेन-देन की लागत कम करना शामिल है। ब्लॉकचेन में बिचौलियों की अनुपस्थिति के कारण लेन-देन सीधे दो पक्षों के बीच हो सकता है, जिससे प्रोसेसिंग समय और लागत दोनों कम होती है।

ब्लॉकचेन की सीमाओं में स्केलेबिलिटी की समस्या प्रमुख है — पब्लिक ब्लॉकचेन में हर नोड को संपूर्ण लेजर की प्रतिलिपि रखनी होती है, जिससे नेटवर्क बढ़ने पर गति धीमी हो जाती है और भारी मात्रा में स्टोरेज की आवश्यकता होती है।

ऊर्जा खपत प्रूफ ऑफ वर्क आधारित ब्लॉकचेन में अत्यधिक है — बिटकॉइन जैसी Proof of Work आधारित प्रणालियाँ अत्यधिक ऊर्जा खपत करती हैं। कई अध्ययनों के अनुसार बिटकॉइन नेटवर्क की वार्षिक बिजली खपत कुछ मध्यम आकार के देशों की कुल बिजली खपत के बराबर या उससे अधिक हो सकती है।

नियामकीय अस्पष्टता भी एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि भारत सहित कई देशों में क्रिप्टोकरेंसी और ब्लॉकचेन-आधारित संपत्तियों के लिए कानूनी ढाँचा अभी भी विकसित हो रहा है। इसके अतिरिक्त इम्यूटेबिलिटी एक दोधारी तलवार है — जहाँ यह सुरक्षा प्रदान करती है, वहीं यदि किसी लेन-देन में गलती हो जाए तो उसे ठीक करना भी असंभव हो जाता है।

संभावित प्रश्न

2 अंक:

  • ब्लॉकचेन की परिभाषा दीजिए।
  • इम्यूटेबिलिटी क्या है?
  • प्रूफ ऑफ वर्क और प्रूफ ऑफ स्टेक में अंतर बताइए।
  • स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट क्या है?

5 अंक:

  • ब्लॉकचेन की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  • पब्लिक, प्राइवेट और कंसोर्शियम ब्लॉकचेन की तुलना कीजिए।
  • ब्लॉकचेन सुरक्षित लेन-देन कैसे सुनिश्चित करता है, समझाइए।
  • भारत में ब्लॉकचेन के व्यावहारिक उपयोग के उदाहरण दीजिए।
  •  51% Attack क्या है? यह ब्लॉकचेन के लिए खतरा क्यों माना जाता है?

15 अंक:

  • ब्लॉकचेन की मूल अवधारणा, कार्यप्रणाली और इसकी सुरक्षा विशेषताओं का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए। यह किस प्रकार पारंपरिक केंद्रीकृत प्रणाली से भिन्न और अधिक सुरक्षित है, विश्लेषण कीजिए।
  • भारतीय संदर्भ में ब्लॉकचेन के व्यावहारिक उपयोगों का विस्तृत विवेचन कीजिए, साथ ही इसके लाभ और सीमाओं का संतुलित विश्लेषण प्रस्तुत कीजिए।

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