IT Act 2000, Amendments and Relevant Sections | PGDCA New Syllabus Hindi Notes

E-Commerce & Cyber Security

Module 1- Fundamental of E-Commerce
Module 2- Online Payment Tran System
Module 3 Web Security Threat solutions
Module 4 – Cyber Security Digital Sign.
Module 5 – Cyber Laws Ethics Data Privacy
Module 6 -Trends Innovations in E-commerce


IT Act 2000, Amendments and Relevant Sections

भारत में इंटरनेट और E-Commerce के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध भी तेजी से बढ़े हैं। इन अपराधों को नियंत्रित करने और E-Commerce को कानूनी मान्यता देने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2000 में Information Technology Act, 2000 (IT Act 2000) पारित किया। यह अधिनियम साइबर स्पेस में होने वाले लेनदेन, डिजिटल हस्ताक्षर, साइबर अपराधों की परिभाषा और उनके लिए दंड का प्रावधान करता है।

बाद में बदलती तकनीकी जरूरतों को देखते हुए IT Act 2000 में 2008 और 2022 में महत्वपूर्ण संशोधन (Amendments) किए गए। IT Act 2000 की मूल संरचना, प्रमुख धाराओं, संशोधनों और Data Privacy से जुड़े प्रावधान निम्न है।

IT Act 2000 Introduction and Objectives

IT Act 2000 भारत का मुख्य साइबर कानून है जो 17 अक्टूबर 2000 को लागू हुआ। यह United Nations Commission on International Trade Law (UNCITRAL) द्वारा बनाए गए Model Law on Electronic Commerce पर आधारित है। इस अधिनियम के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

(1) इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों और डिजिटल हस्ताक्षरों को कानूनी मान्यता देना

(2) सरकारी कार्यालयों में E-Governance को बढ़ावा देना

(3) साइबर अपराधों जैसे हैकिंग, डेटा चोरी, पहचान की चोरी (Identity Theft) आदि के लिए दंड का प्रावधान करना

(4) E-Commerce को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना

(5) Data Privacy और सुरक्षा के नियम बनाना

Real-life Example: जब हम  UPI (Google Pay, PhonePe) से पैसे ट्रांसफर करते हैं तो यह लेनदेन IT Act 2000 के तहत ही कानूनी मान्यता प्राप्त करता है। इसी तरह, हमारा Aadhar Card से जुड़ा डिजिटल ऑथेंटिकेशन भी IT Act के प्रावधानों के अंतर्गत आता है।

IT Act 2000 की मुख्य धाराएं (Important Sections of IT Act 2000)

Sec 3 – Digital Signature और Electronic Signature (Imp.)

यह धारा डिजिटल हस्ताक्षर को कानूनी रूप से मान्यता देती है। Digital Signature एक क्रिप्टोग्राफिक तरीका है जिससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि दस्तावेज को छेड़ा (tamper) नहीं गया है। बाद में संशोधन के तहत Electronic Signature शब्द जोड़ा गया जिसमें Aadhar आधारित eSign, OTP आधारित सिग्नेचर भी शामिल हैं।

Real-life Example: जब हम  Income Tax Return (ITR) फाइल करते हैं तो हम Digital Signature या Aadhar OTP से साइन करते हैं ,यह Sec 3 के तहत वैध होता है।

Sec 4 – Electronic Records की कानूनी मान्यता (Imp.)

कोई भी सूचना या दस्तावेज जो इलेक्ट्रॉनिक रूप (email, PDF, digital file) में उपलब्ध है, वह कानूनी मामलों में भी मान्य होगा। अब कागजी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज में कोई अंतर नहीं है।

Real-life Example: Railway की e-ticket कोर्ट में सबूत के रूप में मान्य है।

Sec 43 – अनधिकृत पहुंच और डेटा क्षति (Unauthorized Access) (Imp.)

यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति के हमारे कंप्यूटर, कंप्यूटर सिस्टम, या नेटवर्क में प्रवेश करता है, डाउनलोड करता है, डेटा को डिलीट या बदलता है, तो वह दोषी माना जाएगा। इस धारा के तहत जुर्माना और हर्जाना (damages) देना पड़ता है। यह Non-cognizable अपराध है यानी सीधे गिरफ्तारी नहीं होती।

Example: कोई व्यक्ति  कंप्यूटर में बिना अनुमति लॉगिन करके फाइलें कॉपी कर लेता है –,यह Sec 43 का उल्लंघन है।

Sec 66 – Computer Related Offences (Imp.)

यह धारा Sec 43 से अधिक गंभीर अपराधों को कवर करती है। यदि कोई व्यक्ति धोखाधड़ी (fraud) या हमराधिक इरादे से Sec 43 में बताए गए कार्य करता है, तो वह Sec 66 के तहत दंडनीय होगा। सजा – 3 साल तक की कैद या 5 लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों।

Real-life Example: किसी के बैंक अकाउंट में हैक करके पैसे निकालना , Sec 66 का मामला है।

Sec 66A – आपत्तिजनक संदेश भेजना (Struck down by Supreme Court in 2015)

यह धारा सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक, असत्य या उत्पीड़न वाले संदेश भेजने पर सजा का प्रावधान करती थी। लेकिन 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने Shreya Singhal vs Union of India केस में इसे असंवैधानिक (unconstitutional) करार दे दिया क्योंकि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech) का उल्लंघन करती है।

Sec 66B – चोरी किए गए डिवाइस या डेटा को प्राप्त करना (Imp.)

यदि कोई व्यक्ति जानते हुए भी किसी चोरी किए गए कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन या उसमें मौजूद डेटा को रखता है या बेचता है, तो सजा 3 साल की कैद या 1 लाख रुपये जुर्माना या दोनों।

Real-life Example: हमारा मोबाइल चोरी हो गया और कोई दूसरा उसे खरीद लेता है। वह जानता है कि यह चोरी का है तो Sec 66B के तहत दोषी होगा।

Sec 66C – Identity Theft (पहचान की चोरी) (Imp.)

किसी अन्य व्यक्ति का Digital Signature, Password, या अन्य विशिष्ट पहचान सूचना (Aadhar, PAN, Debit Card details) चुराकर उपयोग करना Identity Theft है। सजा 3 साल की कैद या 1 लाख रुपये जुर्माना।

Real-life Example: कोई हमारा Aadhar Number और OTP का उपयोग करके फर्जी सिम कार्ड बना लेता है , यह Sec 66C का अपराध है।

Sec 66D – धोखे से पहचान बनाकर संवाद करना

किसी अन्य व्यक्ति के कंप्यूटर संसाधन या पहचान का उपयोग करके धोखे से संदेश भेजना या संवाद करना (जैसे फर्जी कॉल, फिशिंग ईमेल) अपराध है। सजा  3 साल और 1 लाख रुपये जुर्माना।

Real-life Example: फर्जी बैंक कर्मचारी बनकर कॉल करना और OTP मांगना ,यह Sec 66D के तहत अपराध है।

Sec 66E – Privacy का उल्लंघन (Violation of Privacy) (Imp.)

किसी की निजता (privacy) का उल्लंघन करते हुए उसकी तस्वीर या वीडियो बिना सहमति के कैप्चर करना, प्रसारित करना अपराध है। विशेषकर ऐसी स्थिति जहां व्यक्ति को निजता की उचित उम्मीद हो (private place)। सजा 3 साल तक की कैद या 2 लाख रुपये जुर्माना।

Real-life Example: Hotel rooms या washroom में छुपा कैमरा लगाकर किसी की वीडियो बनाना और उसे social media पर डालना Sec 66E का मामला है।

Sec 67 – अश्लील सामग्री का प्रसारण (Publishing obscene material)

यदि कोई व्यक्ति इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील (obscene) सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करता है, तो पहली बार में 5 साल की कैद और 10 लाख जुर्माना; दूसरी बार में 10 साल और 10 लाख जुर्माना।

Sec 67A – यौन स्पष्ट सामग्री (Sexually explicit content)

अश्लील सामग्री से अधिक गंभीर, यौन स्पष्ट सामग्री प्रसारित करने पर 7 साल से 10 साल की कैद और 10 लाख जुर्माना।

Sec 67B – बाल अश्लीलता (Child Pornography)

बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री बनाना, प्रसारित करना, डाउनलोड करना गंभीर अपराध है। सजा 5 साल से 7 साल और 10 लाख जुर्माना।

Sec 69 – राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सूचना का अवरोधन (Interception) (Imp.)

सरकार (केंद्र या राज्य) को यह अधिकार है कि यदि राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, या मैत्रीपूर्ण संबंधों को खतरा हो तो वह किसी भी कंप्यूटर संसाधन की जानकारी को मॉनिटर या अवरोधित (intercept) कर सकती है। लेकिन इसके लिए प्रक्रिया और उच्च स्तरीय अनुमति आवश्यक है।

Real-life Example: राष्ट्रिय सुरक्षा और आतंकवादी गतिविधियों के दौरान सरकार WhatsApp जैसी इलेक्ट्रोनिक कमुनिकेशन  चैट्स को मॉनिटर और जाँच  कर सकती है।

Sec 72A – Data Privacy का उल्लंघन (Breach of Data Privacy) (Imp.)

यदि कोई व्यक्ति या कंपनी जिसके पास दूसरे व्यक्ति की गोपनीय जानकारी (personal information) है, उसे बिना अनुमति के प्रकट करता है या बेचता है, तो वह दोषी होगा। सजा 3 साल की कैद या 5 लाख जुर्माना या दोनों।

Real-life Example: Hospital किसी मरीज की medical history बिना अनुमति के बीमा कंपनी को बेच देती है  Sec 72A का उल्लंघन है।

Sec 79 – Intermediaries को सुरक्षा (Safe Harbor) (Imp.)

यह धारा Intermediaries जैसे Google, Facebook, YouTube, Amazon जैसे प्लेटफॉर्म को उनके यूजर्स द्वारा अपलोड की गई सामग्री के लिए सीधे दायित्व (liability) से बचाती है, बशर्ते वे:

  • केवल डेटा ट्रांसमिट कर रहे हों या होस्ट कर रहे हों
  • कंटेंट को शुरू नहीं करते और न ही बदलते हैं
  • Due diligence का पालन करना और क़ानूनी आदेश मिलने पर अवैध कंटेंट को हटाना
  • 2022 के संशोधन में सेफ हार्बर हटाने की बात की गई, लेकिन अभी तक लागू नहीं हुआ Due diligence का पालन न करने पर intermediary Safe Harbor प्रोटेक्शन खो सकता है।

IT Act 2000 में संशोधन (Amendments) IT Amendment Act 2008 (Imp.)

वर्ष 2008 में मुंबई आतंकी हमले के बाद सरकार ने IT Act में बड़े बदलाव किए। यह संशोधन 27 अक्टूबर 2009 को लागू हुआ। मुख्य बदलाव:

(1) Digital Signature के साथ Electronic Signature शब्द जोड़ा गया , अब OTP और Aadhar eSign भी मान्य।

(2) Sec 66A, 66B, 66C, 66D, 66E, 66F (Cyber Terrorism) जैसी नई धाराएं जोड़ी गईं।

(3) Sec 43A – Sensitive Personal Data को लापरवाही से हैंडल करने वाली कंपनियों को प्रभावित व्यक्ति को हुए नुकसान के अनुसार हर्जाना देना पड़ सकता है .

(4) Sec 72A – Data Privacy के उल्लंघन पर सजा।

(5) Sec 79 – Intermediaries की liability और Due Diligence के नियम।

(6) Cyber Terrorism की परिभाषा जोड़ी गई – Sec 66F।

Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 me 2022 ke amendments (imp.)

यह हाल का संशोधन है जो वर्ष 2022 में आया। मुख्य बिंदु:

(1) Intermediaries के लिए नए नियम – अब उन्हें 24 घंटे के भीतर शिकायत का समाधान करना होगा।

(2) Grievance Appellate Committee (GAC) का गठन – यदि कोई यूजर प्लेटफॉर्म के फैसले (जैसे अकाउंट बंद करना) से संतुष्ट नहीं है तो वह GAC में अपील कर सकता है।

(3) Social Media Platforms को अपने प्लेटफॉर्म पर होने वाले विवादों (डीपफेक, फर्जी समाचार) के लिए अधिक जवाबदेह बनाया गया।

(4) Gaming Platforms और Crypto से जुड़े प्रावधान जोड़े गए।

Cyber Ethics और Data Privacy (साइबर नैतिकता और डेटा प्राइवेसी)

Cyber Ethics से तात्पर्य – इंटरनेट का उपयोग करते समय नैतिक नियमों का पालन करना, दूसरों की निजता का सम्मान करना, बिना अनुमति डेटा न चुराना, कॉपीराइट का उल्लंघन न करना, साइबर धमकी (cyber bullying) से बचना।

Data Privacy – यह किसी व्यक्ति का अधिकार है कि उसकी व्यक्तिगत जानकारी (नाम, पता, Aadhar, Bank details, Health records) कौन एकत्र करेगा, कैसे उपयोग करेगा और किसके साथ साझा करेगा। IT Act में Sec 43A, Sec 72A और Sec 66E Data Privacy से जुड़ी महत्वपूर्ण धाराएं हैं।

भारत में Data Privacy का वर्तमान परिदृश्य (2025 तक का अपडेट)

(1) Digital Personal Data Protection Act (DPDP) 2023 – यह IT Act से अलग एक नया कानून है जो विशेष रूप से Data Privacy पर केंद्रित है। यह EU के GDPR की तर्ज पर बनाया गया है। इसमें Data Fiduciary (डेटा लेने वाला) और Data Principal (डेटा देने वाला) की अवधारणा है।

(2) 2025 तक DPDP Act की कुछ धाराएं लागू हो चुकी हैं। “DPDP Act 2023 भारत का नया Data Privacy कानून है . इसके नियमो को चरणों में लागु किया जा रहा है . कंपनियों को अब स्पष्ट सहमति (consent) लेनी होती है। डेटा उल्लंघन पर 250 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

(3) IT Act की Sec 43A अभी भी मौजूद है लेकिन DPDP Act अधिक विस्तृत है। भविष्य में IT Act के Data Privacy वाले हिस्सों को DPDP Act में मिलाने की संभावना है।

Real-life Indian Examples

(1) Aadhar Case (Justice K.S. Puttaswamy vs Union of India) 2017 – सुप्रीम कोर्ट ने Privacy को मौलिक अधिकार (Art 21) का हिस्सा माना। IT Act के Sec 66E को मजबूती मिली।

(2) Railway IRCTC – Eticketing Sec 4 के तहत मान्य है।

(3) UPI Fraud (20232024) – कई मामलों में Sec 66C (Identity Theft) और Sec 66D (फर्जी कॉल) के तहत FIR दर्ज की गई।

(4) WhatsApp Privacy Policy 2021 – IT Act की Sec 72A और DPDP Act के तहत सवाल उठे थे।

(5) Boat और अन्य कंपनियों का डेटा लीक 2024 – Sec 43A के तहत जांच हुई।

IT Act 2000 के फायदे और नुकसान

फायदे (Advantages) :

(1) ECommerce को कानूनी मान्यता मिली – अब डिजिटल कॉन्ट्रैक्ट वैध हैं।

(2) साइबर अपराधों के लिए सजा का प्रावधान – लोगों में जागरूकता बढ़ी।

(3) Intermediaries के लिए Safe Harbor ने डिजिटल प्लेटफॉर्म को बढ़ने में मदद की।

(4) Data Privacy को कानूनी सुरक्षा मिली (हालांकि अभी DPDP Act अधिक प्रभावी है)।

(5) सरकार को साइबर आतंकवाद (Sec 66F) से निपटने की शक्ति मिली।

नुकसान (Disadvantages) :

(1) 2009 तक लागू होने में देरी हुई, इस दौरान कई अपराध अनदेखे रहे।

(2) Sec 66A के कारण फ्री स्पीच पर असर पड़ा – सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया।

(3) Sec 69 (Interception) के दुरुपयोग की आशंका – सरकारी निगरानी बढ़ी।

(4) Data Privacy के प्रावधान अधूरे थे – इसलिए DPDP Act 2023 लाना पड़ा।

(5) ग्रामीण क्षेत्रों में इस कानून की जानकारी बहुत कम है।

संभावित प्रश्न (Exam के लिए)

2 अंक (बहुत छोटे उत्तर) :

(1) IT Act 2000 कब लागू हुआ?
(2) Sec 66A क्यों रद्द हुई?
(3) Digital Signature को कौन सी धारा मान्यता देती है?
(4) Sec 66C में Identity Theft की सजा क्या है?
(5) Safe Harbor का क्या मतलब है? कौन सी धारा इसे देती है?
(6) IT Amendment Act 2008 में कौन सी नई धाराएं जोड़ी गईं?
(7) Sec 66E किस अपराध से संबंधित है?

5 अंक (मध्यम उत्तर) :

IT Act 2000 के उद्देश्यों को समझाइए।
(2) Sec 43 और Sec 66 में अंतर स्पष्ट कीजिए।
(3) Sec 66C, 66D और 66E को उदाहरण सहित समझाइए।
(4) Sec 79 (Intermediaries Liability) की व्याख्या कीजिए। Safe Harbor क्यों महत्वपूर्ण है?
(5) IT Amendment Act 2008 के मुख्य बदलाव लिखिए।
(6) Data Privacy से संबंधित IT Act की किन्हीं तीन धाराओं का वर्णन कीजिए।
(7) Sec 69 के तहत सरकार की क्या शक्तियां हैं? कोई दो उदाहरण दीजिए।

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