Unit I-Types of Printing – Lithography, Flexography, Gravure, Screen Printing, Offset printing

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प्रिंटिंग के प्रकार Types of Printing:- 

वर्तमान में कई प्रकार की टेक्नोलॉजी हैं जिनका उपयोग प्रिंट करने के लिए किया जाता है। डेस्कटॉप पब्लिकेशन में निम्न औद्योगिक प्रिंटिंग प्रक्रियाएं प्रयोग होती हैं:- 

ऑफसेट या ऑफसेट लिथोग्राफी (Offset or Offset lithography Printing):-

  यह प्रिन्टिंग के क्षेत्र में सबसे कॉमन प्रिन्टिंग प्रकिया हैं। अधिकतर प्रिन्‍टर्स ऑफसेट या ऑफसेट लिथोग्राफी का इस्‍तेमाल करते हैं। इनमे इंक की खपत कम होती हैं, साथ ही साथ मशीन को सेट करने में भी कम टाइम लगता हैं। यह प्रिंटिंग के उन्नत तरीकों में से एक है। यह बड़े और महंगे प्रिंटिंग प्रेस का उपयोग करता है और उपलब्ध प्रिंटिंग की उच्चतम गुणवत्ता का उत्पादन करता है। ऑफसेट प्रिंटिंग में, डिज़ाइन को आमतौर पर कंप्यूटर फ़ाइल के रूप में डिजिटल रूप में प्रदान किया जाता है। इस फाइल को प्रिंटिंग के लिए तैयार करने के लिए सॉफ्टवेयर का उपयोग करके कंप्यूटर पर प्रोसेस किया जाता है (इसे प्री-प्रेस कहा जाता है)।

अगले चरण में ’प्लेट्स’ बनाना शामिल है जिसका उपयोग ऑफसेट प्रिंटर में किया जाएगा। प्लेटों की संख्या प्रिंट रन में उपयोग किए जाने वाले रंगों की संख्या के बराबर होती है। आमतौर पर, उपयोग किए जाने वाले रंगों की सबसे कम संख्या 4 है, अन्य विकल्पों में 6 और 8 रंग प्रक्रियाएं हैं। स्रोत के रूप में रेडी-टू-प्रिंट फ़ाइल का उपयोग करके, प्लेटें बनाई जाती हैं और फिर ऑफसेट प्रिंटर में लोड की जाती हैं। इनमें से प्रत्येक प्लेट का उपयोग मीडिया पर इसके संबंधित रंग को प्रिंट करने के लिए किया जाता है। एक बार सभी रंगों के प्रिंट हो जाने के बाद, हम अंतिम डिज़ाइन प्राप्त करते हैं जो चार रंगों में अपना परिणाम देती है। उपयोग किए गए रंगों की संख्या, 4, 6 या अधिक वांछित गुणवत्ता पर आधारित है। रंगों की संख्या जितनी अधिक होती है, प्रिंट की गुणवत्ता उतनी ही अधिक होती है लेकिन इससे प्रिंट रन की लागत भी बढ़ जाती है।

फ्लेक्‍सोग्राफी प्रिन्टिंग (Flexography Printing):-

फ्लेक्‍सोग्राफी को अक्‍सर फ्लेक्‍सों कहा जाता  हैं। फ्लेक्सोग्राफी में जिस सामग्री को प्रिंट करने की आवश्यकता होती है, वह प्रिंटिंग प्लेट की एक रिलीफ पर होती है, जिसे रबर से बनाया जाता है। इस प्लेट पर स्याही लगाई जाती है और उस स्याही वाली इमेज को बाद में प्रिंटिंग सतह पर स्थानांतरित कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया को कागज के साथ-साथ प्लास्टिक, धातु, सिलोफ़न और अन्य सामग्रियों पर भी प्रिंट किया जा सकता है। फ्लेक्सो का उपयोग मुख्य रूप से पैकेजिंग और लेबल के लिए और कुछ हद तक समाचार पत्रों के लिए भी किया जाता है।

ग्रेवुरे प्रिंटिंग (Gravure printing):-

ग्रेवुरे प्रिंटिंग को रोटोग्रावुर के रूप में भी जाना जाता है, यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें एक इमेज को एक प्रिंटिंग सिलेंडर में उकेरा जाता है। उस सिलेंडर पर स्याही लगी होती है और यह स्याही बाद में कागज में स्थानांतरित हो जाती है। Gravure का उपयोग उच्च मात्रा में काम करने के लिए किया जाता है जैसे कि समाचार पत्र, पत्रिकाएं और पैकेजिंग।

स्‍क्रीन प्रिन्टिंग ( Screen Printing):-

स्क्रीन प्रिंटिंग छोटे एवं मध्‍यम डाटा को प्रिंट करने के लिए प्रयोग होती हैं। इसके लिए बहुत कम संसाधनों की आवश्‍यकता होती हैं। इस प्रकार की प्रिन्टिंग का प्रयोग ना सिर्फ कागज अपितु दूसरे माध्‍यम पर भी आसानी से कर सकते हैं। स्क्रिन प्रिंटिंग का उपयोग visiting card, शादी की पत्रिका आदि प्रिंट करने के लिए किया जाता हैं। इस प्रकार की प्रिंटिंग की गति कम होती हैं। स्क्रीन  प्रिंटिंग में विभिन्‍न रासयनिक पदार्थो का उपयोग किया जाता हैं। इस पद्धति में प्रिंटिंग गहरे (dark) कलर में आती हैं, लेकिन इसकी प्रति पेज प्रिं‍टिंग लागत अधिक होती हैं। यह प्रिंटिंग तकनीक संपूर्णत: मशीन रहित हैं। इस प्रकार की प्रिंटिंग कागज के अतिरिक्‍त दूसरे मीडिया जैसे कपड़ा, लेदर इत्‍यादि पर भी की जा सकती हैं।

Process of Offset Printing (ऑफसेट प्रिन्टिंग की प्रक्रिया):-

ऑफसेट मशीन में मुख्‍यत: तीन सिलेंडर होते हैं, पहले सिलेंडर पर मास्‍टर या प्‍लेट लगाई जाती है, दूसरे सिलेंडर पर रबर की परत होती हैं, जिससे इमेज प्रिन्‍ट की जाती हैं, तीसरे सिलेंडर पर कागज लगता हैं। इसके अतिरिक्‍त स्‍याही को अच्‍छे से मिलाने के लिए विभिन्‍न रबर के रोल होते हैं। ऑफसेट प्रिन्टिग में प्रिन्‍ट करने की निम्‍न विधि हैं।

  1. सबसे पहले जो डाटा प्रिन्‍ट करना हैं, उसे कम्‍प्‍यूटर द्वारा प्‍लास्टिक प्‍लेट पर या बड़ी एक्‍सपोजिंग मशीन द्वारा एल्‍युमीनियम की प्‍लेट पर उतारा जाता हैं।
  2. मशीन के पहले सिलेंडर को मास्‍टर सिलेंडर भी कहा जाता हैं|
  3. जिस रंग में छपाई करना हैं, उस रंग की स्‍याही इंक रोल में डाली जाती हैं। स्‍याही को मशीन में जिस जगह रखा जाता हैं, उस जगह को Ink Dust कहा जाता हैं।
  4. Ink Dust यह एक रोलर से जुड़ा होता हैं, वह रोलर Ink Dust से आवश्‍यकतानुसार स्‍याही लेता रहता हैं।
  5. इंक रोलर अन्य दो दो रोलर से जुड़ा होता हैं, उनमे एक रोलर दांए-बाएं भी घुमता रहता हैं, जिससे स्‍याही अच्‍छे से मिक्‍स हो जाती हैं। दूसरा इंक रोलर प्‍लेट के सिलेंडर से घसते हुए घुमता हैं।
  6. बेस रोल में पानी डाला जाता हैं। इस प्रकार की प्रिन्टिग मे पानी की बहुत अहम भूमिका होती हैं। इस प्रकार की प्रिन्टिंग में जिस हिस्‍से में प्रिन्टिंग होना हैं, वहॉ पर स्‍याही आती हैं, तथा जिस हिस्‍से में प्रिन्‍ट नही होना हैं, उस पर पानी की परत आती हैं। इस तरह से सिर्फ प्‍लेट पर छपा मैटर ही प्रिन्‍ट होती हैं। इससे स्‍याही प्‍लेट पर लग‍ती हैं। प्‍लेट के दूसरे हिस्‍से में पानी का रोल भी जुड़ा होता हैं। स्‍याही और पानी दोनो प्‍लेट पर एक साथ लगती जाती हैं।
  7. अब मशीन को चालू कर दिया जाता हैं। कुछ देर बाद स्‍याही या प्‍लेट सिलेंडर पर आती हैं।
  8. प्‍लेट सिंलेडर यह रबर के सिलेंडर (जिसे ब्‍लांन्‍केट कहा जाता हैं।) से घसते हुए घुमता हैं। इससे प्‍लेट पर लगी हुई स्‍याही रबर के सिलेंडर पर आती हैं।
  9. रबर के सिलेंडर से और एक सिलेंडर लगा होता हैं। उन दोनों के बीच में से पेपर जाता हैं। जो इमेज रबर के सिलेंडर पर आती वह पेपर पर प्रिन्‍ट होती हैं।
  10. प्‍लेट के जिस हिस्‍से में इमेज या टेक्‍स्‍ट हैं, उस पर स्‍याही की परत लग जाती हैं। बाकी हिस्‍से में पानी की परत आ जाती हैं।
  11. प्‍लेट पर जिस हिस्‍से में स्‍याही लगी हैं, उसकी मिरर इमेज दूसरे सिलेंडर पर आती हैं। इस सिलेंडर पर रबर की परत चढ़ी होती हैं।
  12. अंत में रबर की परत वाले सिलेंडर से पेपर पर इमेज प्रिन्‍ट होती हैं।

इस प्रकार प्रिन्टिंग सिर्फ एक समान के पेपर पर ही की जा सकती हैं। यदि बहुरंगी प्रिन्टिंग करना हैं, तब उसे एक से अधिक बार प्रिन्‍ट किया जाता हैं। नीले, लाल, पीले एवं काले रंग से लगभग सभी रंग प्रिन्‍ट किये जाते हैं। कुछ बड़ी मशीनों में यह चारों रंग एक साथ प्रिन्‍ट होते हैं।

Advantages of Offset printing (ऑफसेट प्रिन्टिंग प्रणाली के लाभ):-

  1. इसमें डाटा साफ एवं स्‍पष्‍ट प्रिंट होता हैं। इसमें टेक्‍स्‍ट के साथ ग्राफिक की भी प्रिन्टिग की जा सकती हैं।
  2. इसकी गति बहुत अधिक होती हैं। यह सामान्‍यत: 1000 पेज प्रति घंटे से 10,000 पेज प्रति घंटे तक प्रिंट कर सकता हैं |
  3. किसी पेज का मास्‍टर बनने के बाद, बहुत कम समय में मशीन पर प्रिन्टिंग चालू कर सकते हैं।
  4. इसमे प्‍लेट बनाने के बाद उस प्‍लेट से एक बार से कितनी भी प्रिन्टिंग की जा सकती है।
  5. इस प्रकार की मशीनों मे स्‍याही की खपत एवं अपव्‍यव बहुत कम होता हैं, इसलिए यह एक सस्‍ती प्रणाली हैं।
  6. इस प्रणाली से की गई प्रिन्टिंग करने के बाद कोई और प्रक्रिया नही करनी पड़ती हैं।
  7. बड़े आकार की प्रिन्टिंग भी की जा सकती हैं।
  8. इस प्रकार की प्रिन्टिंग में बहुत अधिक कुशल व्‍यक्तियों की आवश्‍यकता नही होती हैं।
  9. अधिक मात्रा की प्रिन्टिंग के लिए यह सबसे सस्‍ती प्रणाली हैं।
  10. बहुरंगी प्रिन्टिंग की जा सकती हैं।
  11. प्रिन्टिंग के समय बहुत शोर नही होता हैं, जैसे की Letterpress Printing में होता हैं।

Disadvantages of Offset printing (ऑफसेट प्रिन्टिंग प्रणाली की कमीयॉं):-

  1. ऑफसेट मशीन की लागत अधिक होती हैं| 2- इसमें इलेक्ट्रिक पावर की आवश्‍यकता अधिक होती हैं।
  2. इस प्रिंटिंग के लिए अर्धकुशल कर्मचारियों की आवश्‍यकता होती हैं।  4-एक बार बनाई प्‍लेट को बार बार प्रयोग नही किया जा सकता हैं।  5- कम मात्रा की प्रिन्टिंग के लिए महंगी प्रणाली हैं।
  3. फोटो क्‍वालिटी प्रिन्टिंग अच्छी नही होती हैं।

वर्तमान में इस प्रकार की प्रिन्टिंग लगभग सभी छपाई के काम के लिए प्रयोग हो रही हैं। किताब, समाचार पत्र, बहुरंग पोस्‍टर आदि का उत्‍पादन इस प्रकार की प्रिन्टिंग प्रणाली से किया जाता हैं।

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