Sound in Multimedia:-
‘साउंड’ या ध्वनि एक प्रकार की उर्जा है। यह वाइब्रेशन करने वाली वस्तुओं से उत्पन्न होती है। साउंड हवा, पानी या किसी दूसरे माध्यम से संचार कर सकती है।
ध्वनि लहरों के रूप में चलती है। जब ये लहरें हमारे कान तक पहुंचती हैं तो हमारे कान के इयर ड्रम में वाइब्रेशन से हमें ध्वनि का अनुभव होता है।
Importance of Sound in Multimedia:-
मल्टीमीडिया में साउंड का बहुत महत्व है, क्योंकि यह अनुभव को और भी संवेदनशील एवं समृद्व बनाता है।
साउंड विसुअल के साथ मिलकर एक समृद्व अनुभव प्रदान करते हैं। जैसे कोइ वीडियो डायलाग या संगीत के बिना अधूरा है। मल्टीमीडिया प्रोजेक्ट के लिए साउडं इफेक्ट का बहुत ज्यादा महत्व है। अच्छे साउडं इफेक्ट न होने से दर्शक का ध्यान हमारी प्रस्तुति से हट जायेगा।
मल्टीमीडिया प्रेजेंटेशन या वीडियो में साउंड के उपयोग से ही संवाद होता है। वाइसओवर और डायलाग से ही कंटेंट को व्यक्त किया जाता है।
एजूकेशनल मल्टीमीडिया में साउंड का उपयोग ज्ञान प्रदान करने से लिये होता है। लेक्चर या ट्यूटोरियल वीडियो में साउंड से ही समझाया जाता है।
अच्छे साउंड इफेक्ट या बैकग्राउंड संगीत से मल्टीमीडिया कंटेंट को आकृशक बनाया जाता है।
गेमिंग या इंटरेक्टिव एप्लीकेशन में साउंड का और भी ज्यादा महत्व होता है। साउंड गेम के अनुभव को और भी इंगेजिंग बनाता हे।
Sound And its Attribute, Characteristics:-
Sound Frequency (आवृत्ति):-
एक सेकेंड में साउंड वेव जितने वाइब्रेशन या Oscillate करती है। उसे उसकी फ्रिक्वेंसी कहते है। यह भौतिक माप है, जो बताती है कि प्रति सेकंड कितनी ध्वनि तरंगें गुजरती हैं। इसे Hertz (Hz) में मापा जाता है। 1 हर्ट्ज़ का मतलब है कि एक सेकंड में एक ध्वनि तरंग गुजरती है।
हमारे कान 20 से 20000 की Frequency तक Sound सुनने में सक्षम है।
उच्च आवृत्ति का मतलब है अधिक संख्या में तरंगें प्रति सेकंड (जैसे 1000 Hz)। और कम आवृत्ति का मतलब है कम संख्या में तरंगें प्रति सेकंड (जैसे 100 Hz)।
Pitch(पिच):-
पिच एक मानसिक या अनुभवात्मक गुण है। जो यह बताता है कि कोई ध्वनि कितनी ऊँची या नीची (sharp या flat) सुनाई देती है।
यह हमारे कानों और दिमाग द्वारा ध्वनि की आवृत्ति की व्याख्या करने का तरीका है। आम तौर पर, उच्च आवृत्ति की ध्वनि को ऊँचा (higher pitch) और निम्न आवृत्ति की ध्वनि को नीचा (lower pitch) महसूस किया जाता है।
पिच पूरी तरह से आवृत्ति पर निर्भर नहीं करती। ध्वनि की तीव्रता और अन्य कारक भी पिच को प्रभावित कर सकते हैं।
पिच और आवृत्ति में गहरा संबंध है। जैसे-जैसे आवृत्ति बढ़ती है, पिच भी ऊँची होती जाती है। आवृत्ति घटने पर पिच भी नीची हो जाती है।
हालांकि, पिच एक मानसिक अनुभव है, जबकि आवृत्ति एक मापने योग्य भौतिक गुण है।
उदाहरण :-
- यदि एक ध्वनि की आवृत्ति 440 Hz है, तो हम इसे “A4” पिच के रूप में सुनते हैं। (जो संगीत में एक मानक पिच है)।
- अगर हम एक ही आवृत्ति को बहुत अलग परिस्थितियों में सुनते हैं। तो ध्वनि की पिच का हमारा अनुभव थोड़ा अलग हो सकता है। भले ही आवृत्ति वही हो।
फ्रिक्वेंसी या आवृत्ति ऐक भौतिक माप है। जबकि पिच वह ध्वनि है जो हम सुनते हैं और अनुभव करते हैं।
Wave Length:-
साउंड वेभ में दो Pitch के बीच की दुरी को Wave Length कहते है। Sound Wave एक साइकल में 1 ‘Wave Length’ की दूरी तय करती है। वेव लेन्थ का संबध फ्रिक्वेंसी से होता है।
Sound Amplitude:-
इसे Loudness भी कहा जाता है। साउंड, माध्यम के कण को अपनी मूल स्थित से कितना हिलाता है, यह एम्पलीट्यूड दर्शाता है। ये साउंड की ताकत या इन्टेंसिटी को दर्शाती है। बड़ी एम्पलीट्यूड वाली साउंड ज्यादा लाउड होती है। जबकी छोटी एम्प्लीट्यूड वाला साउंड हलका होता है।
Sound Velocity:-
साउंड की गति अलग अलग माध्यम में अलग अलग होती है। Sound की गति जिस माध्यम में Sound Travel कर रही है, उसके प्रकार, तापमान और दबाव पर निर्भर करती है। सामान्य: परिस्थितियों मे Sound की गति हवा के दबाव पर निर्भर नही होती है।
Dry Air जिसका तापमान 20 डिग्री सेंटींग्रेट तक हो उसमे साउड की गति लगभग 343 प्रति सेकण्ड होगी। साउंड की Speed का समंबंध Wave Length से होता है ।
Tone:-
टोन (Tone) ध्वनि की वह विशेषता है जो उसकी पिच और गुणवत्ता को निर्धारित करती है। यह एक निश्चित आवृत्ति की साधारण और लगातार ध्वनि है, जिसमें एक निश्चित आवृत्ति होती है। टोन साउंड की पिच, टिम्बर और सम्पूर्ण रूप से साउंड का टेस्ट या फील से मिल कर बनती है।
इसका प्रभाव साउंड के स्रोत, फ्रिक्वेंसी, और एम्प्लीट्यूड पर पड़ता है। टोन मे केवल एक फ्रिक्वेंशी होती है। टोन की इंटेनसिटी चेंज हो सकती है। साउंड का टोन उसकी क्वालिटी और कैरेक्टर को दर्शाता है।
काम्पलेक्स टोन दो या दो से ज्यादा टोन से मिलकर बनती है। इन्हे ओवरटोन भी कहते है अच्छी टोन उसे कहते है जो कानो को सुनने में अच्छी लगे।
जैसे – अथारिटेटिव टोन, केयरिंग टोन, चिलफुल टोन, कैसुअल टोन इत्यादि ।
टोन से यह भी पता चलता है कि ध्वनि से कैसा महसूस होता है— ऊंचा, नीचा, मुलायम, या कठोर।
Intensity:-
ध्वनि तीव्रता (Sound Intensity) ध्वनि तरंगों की शक्ति को मापने का एक तरीका है। यह एक निश्चित क्षेत्र में, एक निश्चित समय के लिए, ध्वनि ऊर्जा की मात्रा को दर्शाती है। इसका SI इकाई वाट प्रति वर्ग मीटर (W/m²) होती है।
ध्वनि तीव्रता इस पर निर्भर करती है कि ध्वनि स्रोत से कितनी ऊर्जा निकलती है, और वह कितनी दूर तक फैलती है। यह मान जितना अधिक होगा, उतनी अधिक ध्वनि की तीव्रता होगी। सरल भाषा में, ध्वनि तीव्रता यह मापती है कि किसी स्थान पर कितनी ज़ोर से आवाज़ सुनाई दे रही है।
Timbre:-
Timber को हिंदी में “स्वर गुण” या “टिम्बर ” भी कहा जाता है। यह ध्वनि का वह गुण है जो हमें विभिन्न ध्वनि स्रोतों को एक-दूसरे से अलग पहचानने में मदद करता है, भले ही उनकी पिच और ध्वनि की तीव्रता समान हो। इसे हिंदी में “तान” या “स्वर” भी कहा जा सकता है।
उदाहरण के लिए, अगर एक ही नोट गिटार और पियानो पर बजाया जाए, तो दोनों की पिच और ध्वनि तीव्रता एक जैसी हो सकती है, लेकिन उनके ध्वनि का स्वर गुण (टimbre) अलग होता है, जिससे हम पहचान सकते हैं कि कौन सी ध्वनि गिटार से आ रही है और कौन सी पियानो से।
Exam Questions :-
1-मल्टीमीडिया में ध्वनि का क्या महत्व है ? मल्टीमीडिया में मोना और स्टीरियो ध्वनि के बीच में अंतर करो । june 2024
२ – साउंड के विभिन्न गुणों जैसे फ्रेक्वेंसी, पिच और इंटेंसिटी को समझाइये। जून २०२६
३ – एनालॉग और डिजिटल साउंड में उपयुक्त उदाहरण सहित अंतर बताइये। जून २०२६
४ –
https://en.wikipedia.org/wiki/Sound: Unit-II-Sounds in Multimedia- Importance, Attributes, Tone, Intensity, Frequency, Wavelength, Pitch https://en.wikipedia.org/wiki/Pitch_(music): Unit-II-Sounds in Multimedia- Importance, Attributes, Tone, Intensity, Frequency, Wavelength, Pitch https://en.wikipedia.org/wiki/Frequency: Unit-II-Sounds in Multimedia- Importance, Attributes, Tone, Intensity, Frequency, Wavelength, Pitch