Plain and Formatted Text, RTF,OLE, Fonts | pgdca 1 computet Hindi notes

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Concept of Plain and Formatted Text:-

Plain Text:-

Plain text वाले डाक्यूमेंट में केवल टेक्स्ट जैसे शब्द, संख्या या बेसिक सिम्बल ही होते है। इनमें स्पेसिंग एवं सिंगल लाइन ब्रेक होता है जिससे ये पढ़े जा सकें। प्लेन टेक्स्ट का उपयोग ईमेल या प्रोग्रामिंग भाषा के कोड लिखने में होता है।

प्लेन टेक्स्ट फ़ाइल को “.txt” फ़ाइल इक्सटेन्शन के साथ सेव किया जाता है। इनमें बोल्ड B, इटालिक I, अंडरलाइन U, फॉण्ट साइज जैसे बेसिक फॉर्मेटिंग फीचर भी नहीं होते है । Notepad या wordpad में प्‍लेन टेक्‍सट फाइल खाेली या बनाई जा सकती है। प्‍लेन टेक्‍सट फाइल की साइज कम होती है जिससे इनका संधारण आसान होता है।

Formatted Text:

इसे स्‍टाइल Text या Rich Text भी कहते है। Plain Text के विपरीत इसमें मार्कअप और फर्मेटिंग फीचर का उपयोग कर सकते है।

जैसे-  Font  colour,  Font style,  Font  size, Underlines, Strike-through, Italics, Bold, Shadows and Highlights, Hyper link इत्यादि।  

RTF(Rich Text फार्मेट):-

यह एक Text फाइल का प्रारूप है जिसका उपयोग Microsoft आफिस और वर्ड द्धारा किया जाता है। RTF या Rich Text फार्मेट 1987 में  Microsoft ने अपने प्रोडेक्‍ट के लिए विकसित किया था। इस फार्मेट का उपयोग दुसरे OS प्‍लेटफार्म जैसे Mac, Linux में भी  किया जा सकता है। अर्थात यह क्रास प्‍लेटफार्म डाक्‍यूमेंट है।

RTF फाइलो को वर्ड प्रोसेसर द्धारा पढा और राइट किया जाता है। इन फाइलो मे Text के साथ इमेज भी रख सकते है। Microsoft वर्ड के सभी प्रोग्राम RTF फाइलो को पढ सकते है। इसके अलावा DTP (Desktop Publishing) Email client भी RTF File पढ़ सकते है।

फाइल मेनू में Save as का सलेक्‍सन कर के ‘फाइल टाइप’ में RTF सलेक्‍ट करके किसी भी Document को RTF Format मे Save कर सकते है।  RTF File में वाइरस नही फैलता। मैक्रो जो वर्ड फाइल मे इनवैड हो सकते है, RTF फाइल मे नही रखे जा सकते है ।

HTML(Hyper Text Markup Language):- 

Hyper Text Markup Language” य‍ह Web Page के लिए Formatting भाषा है।  इसका उपयोग Internet के वेब पेज बनाने के लिये  किया जाता है। HTML वेब पेज को दिखाने के लिये मार्कअप टैग्‍स का प्रयोग करती है।

इसमें हाइपर लिंक नामक कनेक्‍शन होते है जिससे ये दूसरे वेब पेज या उसी पेज के किसी दूसरे स्‍थान से जुड़े होते है। इसे क्‍लाइंट के कम्प्यूटर इंड पर Browser द्धारा पढ़ा और समझा जाता है ।

HTML/RTF difference: – 

HTML और ‘Rich Text’ दोनों, Text Matter को Formatting करके कैसा दिखेगा, यह सुनिश्‍चत करते है। दोनो की Formatting करने की क्षमता लगभग समान होती है ।

HTML और ‘Rich Text’ दोनो ही Text को ‘रंग’, ‘आकार’ और ‘फान्‍ट साइज’ देने में सक्षम है। दोनो पैराग्राफ की र्फामेंटिग कर सकते है।

Rich Text में इंटरनेट से सम्‍बधिंत कुछ विशेषताओ का आभाव है, जैसे अन्‍य ‘वेब पेज’ फाइल में लिंक करना, ई-मेल जैसे अन्‍य प्रोटोकाल RTF में उपलब्‍ध नही है।  HTML में यह क्षमता है कि इसकी सहायता से एक वेबसाइड से दुसरी वेबसाइड के अन्‍दर दुसरे पेज मे आसानी से जाया जा सकता है।

 HTML एक Markup Language है। जिसका उपयोग Web Page बनाने के लिए किया जाता है जबकि ‘Rich Text’ Text Document एक प्रकार का टेक्‍सट Format है।      

Object Linking And Embedding (OLE):-

ऑब्जेक्ट लिंकिंग और एम्बेडिंग (OLE) एक ऐसी तकनीक है जिसकी सहायता से  उपयोगकर्ता  अलग-अलग ऍप्लिकेशन से प्राप्त ऑब्जेक्ट को  मिलाकर एक  दस्तावेज़ बना सकता है और एडिट  कर सकता है।

OLE की सहायता से एक Application के Object या फाइल को दुसरे Application से जोड़ कर उपयोग कर  सकते है ।

OLE को Microsoft Window 3.1 के लिए विकसित किया गया था। OLE के द्धारा सभी Windows Application अपने Component बना सकते है। ये  Component  Document में Text तथा विजुअल Object को एक साथ रखते है ।

जैसे :Animation, Sound, Video, Graphics, Spredsheet Etc.

प्रत्‍येक OLE एक इनडिंपेन्‍डेंट प्रोग्राम होता है, जो यूजर के साथ इंटरेक्‍ट  करता है। डेक्‍स्‍टॉप के अन्‍य ऑब्‍जेक्‍ट के साथ कम्‍युनिकेट करता है। सामान्‍यत: ऑब्‍जेक्‍ट डेक्‍स्‍टॉप मे एक आइकान के रूप मे दिखाइ देते है।

जब हम ऑब्‍जेक्‍ट पर डबल क्ल्कि करते है तो उस ऑब्‍जेक्‍ट से संबंधित Application खुल जाती है। उदाहरण के लिए हमारे पास एक्‍सल की स्‍प्रेड सीट है ,उसे हम ‘वर्ड एनीमेशन’ में खोलते है तो वर्ड एनीमेंशन के अन्‍दर एक्‍सल का इटंरफेस खुल जाता है ।

उदाहरण – कोरल ड्रा या पेजमेकर ऑब्‍जेक्‍ट लिंकिंग की सुविधा प्रदान करता है

लिंकिंग और एम्बेडिंग:

लिंकिंग और एम्बेडिंग दोनों, एक दस्तावेज़ की जानकारी को दूसरे दस्तावेज़ में उपयोग के लिये शामिल करते हैं, लेकिन ये दोनों  जानकारी को अलग-अलग तरीके से स्टोर करते हैं।  

लिंकिंग:-

लिंकिंग तब उपयोगी होती है, जब किसी ऑब्जेक्ट या फ़ाइल को एक से अधिक  फ़ाइलों में उपयोग करना हो। OLE के उपयोग से फ़ाइल का आकार बड़ा हो जाता है। लेकिन इसका लाभ यह है की आवश्यकता पड़ने पर, केवल स्रोत एप्लिकेशन में ऑब्जेक्ट में बदलाव करने से, यह बदलाव ऑब्जेक्ट का जहाँ-जहाँ उपयोग हुआ है, उन सभी जगह यह बदलाव हो जायेगा।   

एम्बेडिंग:-

एम्बेडिंग तब उपयोगी होती है जब आप सभी ऑब्जेक्ट्स को एक फ़ाइल में शामिल करना चाहते हैं। स्रोत और गंतव्य दोनों एप्लिकेशन में  OLE सपोर्ट  होना  चाहिए तभी एम्बेडिंग या लिंकिंग होगी। 

Fonts:-

टाइपोग्राफी में उपयोग किए जाने वाले अक्षरों  की अलग-अलग विशिष्ट शैली, आकृ‍ति, बनावट और आकार से मिलकर एक फान्‍ट बनता  है। एक फांट में अक्षर,  संख्या,  विराम चिह्नों और सिम्‍बल का एक सेट होता है, जिनकी डिज़ाइन एक समान होती है। फ़ॉन्ट देखने में और आकार में भिन्न होते हैं, जिससे सामग्री की लिखावट देखने में भिन्‍न लगती है ।

किसी ‘फांट-सेट’ की डिजाइन की टाइप, उस फांट की ‘टाइपफेस’ कही जाती है। इस डिजाइन में थोड़ा-बहुत परिवर्तन करके उस टाइपफेस के कई फांट बनते है, जिससे उस ‘फांट टाइफेस’ की फैमली बनती है। उदाहरण के लिये Helvetica एक फांट की टाइफेस फैमिली है,  ‘Helvetica italic’  typeface है ,और ‘Helvetica italic 10-point’ एक फांट हैं।

फ़ॉन्ट्स को आम तौर पर  सेरिफ़, सेन्स-सेरिफ़, स्क्रिप्ट इत्यादि  में वर्गीकृत किया जाता है, और प्रत्येक फांट फैमिली में कई भिन्नताएं हो सकती हैं, जैसे बोल्ड, इटैलिक या लाइट। फ़ॉन्ट का चुनाव डिजिटल और प्रिंट मीडिया दोनों में पठनीयता, टोन और लिखावट की सुंदरता को प्रभावित करता है।

Needs :-

फांट टेक्‍सट मैटर को और ज्‍यादा अर्थ एवं महत्‍व प्रदान करते हैं। टेक्‍सट में उपयोग किये गये फांट के कलर, उनकी साइज से पढने वाले को और ज्‍यादा सूचना दी जाती है।

Types of Fonts:-

फ़ॉन्ट्स मुख्य रूप से चार प्रकार के होते हैं:

1. शेरिफ Serif Fonts:-

‘शेरिफ’ एक डच शब्‍द है जिसका अर्थ ‘डैश’ या लाइन होता है। शेरिफ फांट के अक्षरों के कोनों पर छोटे-छोटे निशान या डैश होते हैं। सेरिफ़ फ़ॉन्ट से गंभीरता, क्लास या अभिजात्‍यता  प्रिर्दशित होती है।  प्राचीन रोम में पत्थर में तराशे गये शिलालेखें से इनकी शुरूआत  हुई है।

 उचित रूप से उपयोग किए जाने पर ये फांट सुसंस्कृत, परिष्कृत और आधिकार या पावर महसूस कराते हैं। इनका उपयोग फैशन, शैक्षणिक और सांस्कृति क्षेत्र में किया जाता है।

पुरानी उपन्‍यास के बाडी टेक्‍सट में शेरिफ फांट का उपयोग अधिकतर किया जाता है, क्‍योंकि शेरिफ फांट में लिखे बड़े नावेल पढने में आसानी होती है।

इनके अक्षर  प्रमुखता से उभरते हैं, इस कारण शेरिफ फांट एक बड़े छपे हुये उपन्‍यास को पढना आसान बना देते है। Times New Roman, Georgia, एवं Garamond सामान्‍य तरह के शेरिफ टाइपफेस है।  Rolex, Tiffany & Co. एवं  Mercedes-Benz  traditional और  luxurious ब्रैंड हैं, ये अपने लोगो में शेरिफ फांट का उपयोग करते हैं।

2.सैन्स-सेरिफ़ फ़ॉन्ट्स Sans-Serif Fonts:-

 र्फेच  में ‘Sans’ का अर्थ, बिना या रहित होता है। अत:  “sans serif” का मतलब बिना serif के या serif रहित। इनमें सेरिफ़ नहीं होते, यानी अक्षरों के कोनों पर कोई निशान नहीं होते।

sans-serif टाइफेस का उपयोग एवं विकास वर्तमान में विज्ञापन, व्‍यवसायिक संवाद में होता हैा १९वी एवं २०वीं शताब्दि में विज्ञापन में प्रयोग से इनका उपयोग बढ़ा। कंपनी के लोगो एवं हेडलाइन के लिये ये उपयुक्‍त फांट हैं। बाडी टेक्‍सट के लिये भी ये उपयुक्‍त फांट हैं।

 sans-serif फांट की चिकनी, साफ रेखाएं, सादगी, और कार्यक्षमता को व्यक्त करती हैं।

उदाहरण के लिए- Arial और Helvetica फाँट।

3.स्लैब-सेरिफ़- Slab Serif Fonts:-

कई पारंपरिक सेरिफ़ की प्राकृतिक सुंदरता के विपरीत, स्लैब सेरिफ़ अधिक मोटे, सपाट और ब्‍लाकी हेाते है। इनके शेरिफ और ज्‍यादा चौडें  होते जिससे ये ज्‍यादा बोल्‍ड दिखते हैं । अलंकृत शिलालेखों की तुलना में पुराने यांत्रिकी  टाइपराइटर की ये फांट अधिक याद दिलाते है। जब  all-caps में बड़े आकार में इनका  उपयोग किया जाता है, तो ये अमेरिकी ओल्ड वेस्ट के पोस्टर की याद दिलाते हैं। उदाहरण –  Rockwell, Courier.

4.स्क्रिप्ट फ़ॉन्ट्स (Script Fonts):-

ये फ़ॉन्ट्स हाथ से लिखे हुए अक्षरों, कर्सिव, हैंडराइटिंग या कैलीग्राफी  की तरह सुंदर आर्टिस्टिक एवं व्‍यक्तिगत  दिखते हैं। इनके स्‍ट्रोक हाथ की लिखावट जैसे विविध और घुमावदार होते हैं। इन स्क्रिप्‍ट में अक्षर या वर्ण एक-दूसरे के साथ जुड़े हो सकते हैं ।

उदाहरण के लिए- Brush Script और Pacifico,  Lobster.

स्क्रिप्ट टाइपफेस में, दो बुनियादी वर्गीकरण होते हैं: formal और  casual ।

फार्मल या औपचारिक फ़ॉन्ट अत्यधिक बारीक़ और डिजाइन में कलात्‍मक होते  हैं। इनके घुमाव बड़े होते हैं और वे अलग एवं आधिकारिक दिखते हैं।

 फार्मल लिपियाँ अक्सर सत्रहवीं और अठारहवीं शताब्दी में हस्तलिखित पत्र-पत्रिकाओं में ज्‍यादा उपयोग हुई हैं।  उनका उपयोग निमंत्रण और डिप्लोमा जैसे सुरुचिपूर्ण डिजाइनों के लिए किया जाता है ।

इनर्फामल या  कैज़ुअल स्क्रिप्ट, अनौपचारिक स्क्रिप्ट, होते हैं। ये कम औपचारिक स्क्रिप्ट टाइपफेस होते हैं, जो रोजमर्रा की लिखावट की तरह दिखते हैं।

Cadillac, Cartier, एवं  Budweiser ब्रांड  formal script fonts को प्रयोग करते हैं। जबकि Sharpie, Barbie, and Ray-Ban अधिकतर  informal script fonts का प्रयोग अपने ब्रांड की पहचान के लिये करते हैं।

Types of Fonts: The Ultimate Guide to Fonts Styles | Looka

Exam Questions :

1- टेक्‍स्‍ट डॉक्‍यूमेंट बनाने के लिए विभिन्‍न प्रकार के फोंट का वर्णन करें। – june 2024

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