New Syllabus-Chapter2- Development platforms for multimedia, Types of multimedia: Linear and Non-linear, Identifying Multimedia elements Text, Images, Sound, Animation and Video, Multimedia Hardware and Software requirement. Making simple Multimedia with Power Point Text as a component of Multimedia,
मल्टीमीडिया डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म्स (Development Platforms)
डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म्स वे सॉफ्टवेयर टूल्स या एप्लीकेशन्स होते हैं जिनकी सहायता से मल्टीमीडिया कंटेंट तैयार, edit और integrate किया जाता है। इन प्लेटफॉर्म्स में text, image, audio, video और animation को आवश्यकतानुसार जोड़कर एक interactive या non-interactive presentation तैयार की जाती है। (Imp.)
मल्टीमीडिया डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म्स के प्रकार (Types of Development Platforms)
ऑथरिंग टूल्स (Authoring Tools) —
जैसे Adobe Director, Macromedia Authorware, जिनमें elements को drag-and-drop करके interactive content बनाया जाता है
वीडियो एडिटिंग टूल्स (Video Editing Tools) —
जैसे Adobe Premiere Pro, Filmora, जो video editing और production के लिए उपयोग होते हैं
ग्राफिक डिज़ाइन टूल्स (Graphic Design Tools) —
जैसे Adobe Photoshop, CorelDraw, जो images और graphics तैयार करने के लिए उपयोग होते हैं एनिमेशन टूल्स (Animation Tools) —
जैसे Adobe Animate, Blender, जो 2D और 3D animation बनाने के लिए उपयोग होते हैं
वेब आधारित प्लेटफॉर्म्स (Web-based Platforms) —
जैसे Canva, Powtoon, जो ऑनलाइन ही मल्टीमीडिया कंटेंट तैयार करने की सुविधा देते हैं
मल्टीमीडिया के प्रकार (Types of Multimedia)
मल्टीमीडिया को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया जाता है — रेखीय मल्टीमीडिया (Linear Multimedia) और अरेखीय मल्टीमीडिया (Non-linear Multimedia)। (Imp.)
रेखीय मल्टीमीडिया (Linear Multimedia)
रेखीय मल्टीमीडिया में कंटेंट एक निश्चित क्रम (sequence) में प्रस्तुत होता है, जिसे दर्शक केवल देख सकता है लेकिन उसमें कोई हस्तक्षेप (interaction) नहीं कर सकता। इसका प्रवाह शुरुआत से अंत तक एक सीधी रेखा की तरह चलता है, इसलिए इसे रेखीय कहा जाता है। उदाहरण के लिए टेलीविजन प्रसारण और फिल्में रेखीय मल्टीमीडिया के अंतर्गत आती हैं, क्योंकि दर्शक केवल content देख सकता है, उसमें बदलाव नहीं कर सकता।
अरेखीय मल्टीमीडिया (Non-linear Multimedia)
अरेखीय मल्टीमीडिया में यूज़र को content के साथ interaction करने की स्वतंत्रता मिलती है, जिसका अर्थ है कि यूज़र अपनी इच्छा अनुसार किसी भी क्रम में content को navigate कर सकता है। इसमें hyperlinks, buttons और menus की सहायता से यूज़र एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जा सकता है। उदाहरण के लिए interactive educational software, video games और websites अरेखीय मल्टीमीडिया के उदाहरण हैं।
रेखीय और अरेखीय मल्टीमीडिया में अंतर (Difference between Linear and Non-linear Multimedia)
रेखीय मल्टीमीडिया में content का क्रम निश्चित होता है, जबकि अरेखीय मल्टीमीडिया में यूज़र स्वयं क्रम चुन सकता है रेखीय मल्टीमीडिया में interaction नहीं होता, जबकि अरेखीय मल्टीमीडिया पूरी तरह interactive होता है रेखीय मल्टीमीडिया का उदाहरण फिल्म है, जबकि अरेखीय मल्टीमीडिया का उदाहरण website या game है
Multimedia Element:-
मल्टीमीडिया के पांच तत्व होते है:-
1- Text 2- Image 3- Audio 4- Video 5- Animation
1-Text:-
टेक्स्ट मल्टीमीडिया का सबसे बुनियादी element है, जिसके माध्यम से जानकारी को शब्दों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। टेक्स्ट का उपयोग headings, captions, instructions और descriptions देने के लिए किया जाता है। यह content को स्पष्टता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
टेक्स्ट मे अल्फान्युमेरिक करेक्टर होते है। टेक्स्ट का प्रयोग सूचना बनाने के लिए होता है। टेक्स्ट सबसे सरल डाटा टाइप है। इसे सबसे कम स्टोरेज स्पेस की आवश्यकता होती है।
2-Image:-
Image मल्टीमीडिया का दूसरा एलिमेन्ट है। यह प्लेन टैक्स्ट की अपेक्षा देखने वालो का ध्यान अपनी तरफ तुरंत आकर्षित करता है। लगभग सभी माल्टीमिडिया एप्लीकेशन में इमेज रखी जाती है। क्योंकि चित्र शब्दों की तुलना में जल्दी समझ में आते हैं। इमेज मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं — bitmap images, जो pixels से बनी होती हैं, और vector images, जो mathematical equations पर आधारित होती हैं।
कम्प्यूटर ग्राफिक्स दो प्रकार के होते है –
a. लाइन ड्राइंग:-
लाइन ड्राइंग में रेखाओं, वृत्तों तथा वक्राकार आकृतियों जैसे गणितीय ऑब्जेक्ट्स का उपयोग करके 2D एवं 3D चित्र बनाए जाते हैं। उदाहरण के लिए एक कुर्सी का चित्र लाइन ओर आर्क का प्रयोग करके बनाया जाता है।
b. ईमेज:-
ये ग्राफिक्स और फोटोग्राफ होते है जो पिैक्सल से मिलकर बनते है। इन्हे डिजिटल कैमरे, स्कैनर, फोटोशाप ओर पेन्ट की सहायता से बनाया जा सकता है ।
3-साउंड (Sound):-
यह मल्टीमीडिया का तीसरा घटक है। साउंड मल्टीमीडिया का वह element है जो audio के माध्यम से जानकारी या अनुभव प्रदान करता है। इसमें background music, voice narration, sound effects आदि शामिल होते हैं। साउंड का उपयोग content को अधिक प्रभावशाली और emotionally engaging बनाने के लिए किया जाता है, विशेष रूप से videos, games और presentations में।
ज्यादातर आडियो फाइल, मल्टीमिडिया मे प्लग-इन मिडिया प्लेयर की सहायता से जोड़ी जाती है। रियल आडियो, MIDI, Wave, WMA, और एमपी3 इत्यादि कुछ प्रसिद्ध आडियो फॉर्मेट है। आडियो फाइल को कम्प्रेस कर के जोडा जाता है, जिसेस फाइल जल्दी डाउनलोड हो जाये।
मल्टीमिडिया मे आडियो डालने के लिए निम्न हार्डवेयर डिवाइस आवश्यक है:-
* साउडं कार्ड।
* आउटपुट डिवाइस जैसे स्पीकर, हेडफोन।
* इनपुट डिवाइस जैसे माइक्रोफोन, जो आडियो को रिकार्ड करेगा।
* साउन्ड एडिटर साफ्टवेयर, जो साउडं क्लीपिंग को कट करते है और स्पेशल इफ्टैक्ट देते है।
4-Video:-
मल्टीमीडिया का चौथा इलीमेंट वीडियो है। वीडियो मल्टीमीडिया का सबसे प्रभावशाली element माना जाता है, क्योंकि इसमें image, sound और movement तीनों एक साथ शामिल होते हैं। वीडियो का उपयोग training programs, entertainment, documentaries और online tutorials में बड़े पैमाने पर किया जाता है। यह जानकारी को सबसे realistic और engaging तरीके से प्रस्तुत करता है।
इंटरनेट में विडियो अक्सर मल्टीमिडिया मे प्रयोग होते हुए देखे जाते है। flash, MPEG, AVI, WMV, Quick, Time. कुछ विडियो फार्मेट के उदाहरण है। विडियो का उपयोग देखने वालो का ध्यान आकर्षित करने के लिए किया जाता है।
कम्प्युटर विडियो इमेज के स्वीकेंस की रिकार्डिग और डिस्पले के साथ काम करता है। प्रत्येक अलग-अलग इमेज, जिस स्वीकेंस मे होती है उन्हें फ्रेम कहते हे। एक जर्क फ्री मोशन की विडियो के लिए प्रति सेकण्ड 25से 30 फ्रेम प्रति सेकेंड डिस्पले की जाती है।
5-Animation:-
एनिमेशन का अर्थ है स्थिर चित्रों (still images) को क्रमबद्ध रूप से तेजी से प्रदर्शित करना, जिससे गति (movement) का आभास होता है।
कम्प्यूटर एनीमेशन कई ईमज के एक सेट से बनते है, इन इमेज का सीक्वेंस से लगातार इस प्रकार डिस्पले किया जाता है जिससे गतिशीलता का प्रभाव दिखाई पड़ता है। जिससे यह एक मूवी की तरह दिखाई देता है। एनीमेशन, मल्टीमिडिया मे सूचना दिखाने का सबसे शक्तिशाली माध्यम है। एनीमेशन बनाने के लिए एडोफ्लेस का सबसे ज्यादा उपयोग हेाता है. यह मुख्यतः 2D animation और 3D animation दो प्रकार की होती है।
एनिमेशन का उपयोग complex processes को सरलता से समझाने, educational content को interesting बनाने और advertisements में आकर्षण जोड़ने के लिए किया जाता है।
Multimedia Hardware requirement:-
मल्टीमीडिया एप्लीकेशन को सुचारू रूप से चलाने के लिए कंप्यूटर सिस्टम में कुछ आवश्यक हार्डवेयर components होना जरूरी है। (Imp.)-
प्रोसेसर (Processor) — तेज गति वाला processor आवश्यक होता है क्योंकि मल्टीमीडिया फाइलों को process करने में अधिक computing power लगती है
मॉनीटर:- मॉनीटर कम्प्यूटर का उपयोग आउटपुट देखने के लिये होता है। मल्टीमीडिया पीसी में SVGA (Super Video Graphics Array) मानीटर होना चहिये ।
वीडियो कैप्चर कार्ड (Video capture card):- यह कार्ड VCR या वीडियो कैमरे जैसे र्सोत से प्राप्त एनालॉग सिगनल को डिजिटल फार्मेट में परिर्वतित करता है |
रैम (RAM) — पर्याप्त मात्रा में RAM आवश्यक है ताकि video editing और animation जैसे कार्य smoothly चल सकें
ग्राफिक्स कार्ड (Graphics Card) — high-quality visuals और video processing के लिए उपयोग होता है
साउंड कार्ड (Sound Card) — audio output और recording के लिए आवश्यक होता है
इनपुट-आउटपुट डिवाइस (Input-Output Devices) — जैसे माइक्रोफोन, स्पीकर, scanner, webcam आदि
स्टोरेज डिवाइस (Storage Devices) — हार्ड डिस्क या SSD, क्योंकि मल्टीमीडिया फाइलें (videos, images) बड़े आकार की होती हैं
कम्प्यूटर आउटपुट माइक्रोफिल्म:- यह कंप्यूटर आउटपुट को माइक्रोफिल्म रील या माइक्रोफिल्म कार्ड पर उतारने की तकनीक है। इस तकनीक से कागज की लागत और स्टोरेज स्पेस की बचत होती हे।
फिल्म रिकार्डर:- यह कैमरे के समान डिवाइस है। इसकी सहायता से उच्च रिजाल्यूशन के चित्रों को सीधे ३५एमएम की स्लाइड, फिल्म और ट्रान्सपेरेंसी पर ला सकते है। प्रेजेंटेशन बनाने के लिये इस तकनीक का ही प्रयोग किया जाता है।
साउंड कार्ड एवं स्पीकर:- साउंड कार्ड का उपयोग साउंड की इडिटिंग एवं इसको आउटपुट करने में होता है। आधुनिक मदरबोर्ड में साउंड कार्ड पहले से ही इनबिल्ड होता है। हम अलग से भी कार्ड इनहेंस कर सकते हे।
इयर फोन:- इसे हेडफोन, इयरबड के नाम से भी जाना जाता है। इसमें ट्रांसडयूसर का एक जोड़ा एवं कानों के समीप स्पीकर होते है। इसे इंटरनेट पर वाइस चैटिंग, टेलिफोन काल या संगीत सुनने में करते हैं।
प्रोजेक्टर, डीवीडी, इनपुट आउटपुट डिवाइसेस, फोटो सीडी इत्यादि मल्टीमीडिया के लिये आवश्यक हार्डवेयर है।
Multimedia Software requirement:-
Multimedia Software, हार्डवेयर को यह निर्देशित करता है कि क्या करना है। उदाहरण के लिये कौन सा कलर डिस्पले करना है, या क्या साउंड प्ले करना है।हार्डवेयर के साथ-साथ मल्टीमीडिया कंटेंट तैयार करने के लिए विशेष सॉफ्टवेयर की भी आवश्यकता होती है। (Imp.)
विभिन्न मल्टीमीडिया इलीमेंट जैसे मूवी, साउंड, टेक्सट, एनीमेशन, ग्राफिक्स इत्यादि तैयार करने के लिये निम्न विभिन्न प्रकार के साफ्टवेयर बाजार में उपलब्ध है-
जैसे पेंटब्रश, फोटो फिनीश,एनीमेटर, फोटोशाप, ३डी स्टूडियो, कोरल ड्रा, साउंड ब्लास्टर, एपल हाइपर कार्ड, फोटो मैजिक, पिक्चर पब्लिशर, IMAGINATE इत्यादि।
मल्टीमीडिया साफ्टवेयर की निम्न कैटेगरी होती है:-
1 डीवाइस ड्राइवर साफ्टवेयर:- इनका उपयोग विभन्न मल्टीमीडिया पेरिफेरल को इन्सटाल करने में होता है।
2 मिडिया प्लेयर:– इनका उपयोग एक या एक से अधिक मीडिया फाइल फार्मेट को प्ले करने में किया जाता है। विनएंम्प या विंडो मीडिया प्लेयर , वीएलसी प्लेयर, MS Playerina plain and Formated |Text (एंड्राइड के लिये)
3 मिडिया कनवरसन टूल:- इनके उपयोग से एक तरह की मीडिया फाइल फार्मेट को दूसरे फार्मेट में बदल सकते है।
4 मल्टीमीडिया इडीटिंग टूल:– इनके उपयोग से डिजिटल मल्टीमीडिया डाटा एडिट या क्रियेट किया जा सकता है।
5 मल्टीमीडिया एथराजिंग टूल:– इनके उपयोग से विभिन्न प्रकार के मीडिया फार्मेट को जोड़कर एक मल्टीमीडिया कंटेट बनाया जा सकता है। Front Page
मल्टीमीडिया एप्लीकेशन निम्न तरह के टूल और पैकेज का उपयोग करके बनाये जाते है:-
1- टेक्सट इडीटिंग टूल्स:- वर्ड प्रोसेसर, नोट पैड, वर्ड पैड, एमस वर्ड .
2- पेंटिंग और ड्राइग टूल्स:- इनका उपयोग ड्राइंग फाइल बनाने के लिए होता है। किसी भी प्रकार की आकृति और किसी भी रंग की आकृति इन टूल्स की सहायता से बनायी जा सकती है। निम्न फार्मेट की ड्राइंग फाइल बनाई जाती है .gif, .tif, .jpg, .bmp इत्यादि।
ड्राइंग साफ्टवेयर के निम्न उदाहरण हैं:-
कोरल ड्रा, एडोब फोटो शाप, पेंट शाप प्रो, Canva इत्यादि ।
3- इमेज इडिटिग टूल:- स्कैनर और डीजिटल कैमरा से खीची गई फोटो को एडोब फोटो शॉप, पेन्ट शॉप प्रो जैसे साफ्टवेयर से एडिट किया जाता है।
4- साउडं इडीटिंग टूल:- इन टूल बाक्स का उपयोग साउडं को मल्टीमीडिया फाइल मे जोडने के लिए किया जाता है इनकी सहायता से साउडं फाइल को कट , कापी पेस्ट या किसी एक सिग्मेंट को इडिट कर सकते है ।
जैसे – कूल इडिट प्रो , साउडं फोर्ज , Audacity, Laxis Audio Editor – इनकी सहायता से अपनी आवाज गाने या संगीत रिकार्ड भी कर सकते है।
5- वीडियो इडीटिगं टूल:- इन टूल्स का उपयोग वीडियो एवं आडियो फाइल को इडिट, कट, कापी, और पेस्ट करने के लिए होता है।
जैसे – एडोब प्रीमियम, एडोब आफ्टर इफेक्ट, Camtasia, Filmora, Handbrake, Openshot, Blenders, mobile के लिये VN app, kineMaster ,
6- एनीमेशन एडं माडलिंग टूल्स:- एनीमेंशन की सहायता से स्थिर इमेंज को एक दिये गये गति से रन करने पर विजुअल इफेक्ट पैदा होता है। यह इफेक्ट एनीमेंशन और माडिली टूल्स से पैदा किया जा सकता है ।
जैसे – 3DMax Studio, Maya
5 मल्टीमीडिया एथराजिंग टूल:– इनके उपयोग से विभिन्न प्रकार के मीडिया फार्मेट को जोड़कर एक मल्टीमीडिया कंटेट बनाया जा सकता है। Front Page
संभावित प्रश्न
2 अंक: रेखीय और अरेखीय मल्टीमीडिया में अंतर बताइए। 2 अंक: मल्टीमीडिया डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म क्या है? 2 अंक: मल्टीमीडिया के कोई दो elements बताइए।
5 अंक: मल्टीमीडिया डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म्स के प्रकार समझाइए। 5 अंक: मल्टीमीडिया एलिमेंट्स — टेक्स्ट, इमेज, साउंड का वर्णन कीजिए। 5 अंक: एनिमेशन और वीडियो में अंतर स्पष्ट कीजिए।
15 अंक: मल्टीमीडिया डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म्स, मल्टीमीडिया के प्रकार (रेखीय और अरेखीय) तथा मल्टीमीडिया के सभी elements (टेक्स्ट, इमेज, साउंड, एनिमेशन, वीडियो) का विस्तार से वर्णन कीजिए। साथ ही भारतीय उदाहरण देते हुए इसके फायदे और नुकसान भी बताइए।
पावरपॉइंट से सरल मल्टीमीडिया बनाना (Making Simple Multimedia with PowerPoint) (Imp.)
माइक्रोसॉफ्ट पावरपॉइंट एक ऐसा सरल सॉफ्टवेयर है जिसकी सहायता से बिना किसी विशेष technical knowledge के मल्टीमीडिया प्रेजेंटेशन तैयार की जा सकती है। पावरपॉइंट में टेक्स्ट, इमेज, ऑडियो, वीडियो और एनिमेशन एक साथ जोड़े जा सकते हैं, जिससे यह एक संपूर्ण मल्टीमीडिया टूल बन जाता है।
पावरपॉइंट में मल्टीमीडिया बनाने के चरण (Steps to Create Multimedia in PowerPoint)
1. Open Microsoft PowerPoint and create a new presentation.
2. Select a suitable theme and slide layout.
3. Add text for titles, headings, and content.
4. Insert images and graphics to improve visual appeal.
5. Add audio clips and sound effects where required.
6. Insert video files or multimedia objects.
7. Apply animations to text and objects.
8. Add slide transition effects.
9. Preview and edit the presentation.
10. Save and run the slideshow as a multimedia presentation.
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