Unit-IV-Video and Animation in Multimedia , Its Impact

वीडियो:-

वीडियो एक मल्टीमीडिया फॉर्मेट है। इसमें चलती हुई छवियों (moving images) का संग्रह होता है। ये इमेज एक निश्चित समय अंतराल पर प्ले की जाती हैं। वीडियो में दृश्य (visual) और अक्सर ध्वनि (audio) दोनों शामिल होते हैं, जिससे यह एक सुखद अनुभव प्रदान करता है।

विडियो पहली बार मेकनिकल टेलिविजन सेस्‍टम के लिए विकसित किया गया था। बाद में इसे कैथोड रे ट्यूब(CRT) सिस्‍टम में  उपयोग किया जाने लगा। वर्तमान में इनका उपयोग विभिन्‍न प्रकार के फ़्लैट पैनल डिस्‍पले में भी होने लगा है।

मल्‍टीमिडिया एप्‍लीकेशन के “विडियो एलिमेन्‍ट” की सहायता से थोड़े समय में ही बहुत सारी जानकारी दी जा सकती है। डिजिटल विडियो के माध्‍यम से जीवांत आब्‍जेक्‍ट प्रदर्शित किए जा सकते है।

डिस्‍पले रेश्‍युलेशन, एसपेक्‍ट  रेशियो, रिफ्रेश रेट, कलर कैपेबिलिटी या अन्‍य विशेषताओं  के आधार पर “वीडियो सिस्टम” एक दूसरे से अलग हो स‍कते है।

वीडियो के प्रकार (Type of video multimedia):-

एनालॉग वीडियो:-

पुराने समय में वीडियो को एनालॉग फॉर्मेट में रिकॉर्ड और प्रसारित किया जाता था। जैसे वीएचएस (VHS)- इसमें छवियां और ध्वनि, सिग्नल्स के रूप में रिकॉर्ड किए जाते थे।

डिजिटल वीडियो:- 

वर्तमान में वीडियो डिजिटल फॉर्मेट में रिकॉर्ड किए जाते हैं, जैसे MP4 या AVI( Audio video Interlope), इसमें डेटा बाइनरी फॉर्मेट (0s और 1s) में स्टोर किया जाता है, जो कंप्यूटर या अन्य डिजिटल डिवाइसेस में आसानी से पढ़ा जा सकता है।

AVI( Audio video Interlope) एवं MPEG( moving picture expert  group) दो सबसे ज्‍यादा प्रयोग होने वाले मल्‍टीमिडिया विडियो फार्मेट है।

मोबाइल डिवाइस और ऑनलाइन स्‍ट्रीमिगं के लिए  FLV( फ्लैश विडियो ), WMW( विन्‍डो मिडिया विडियो) और थर्ड जेनेरेशन पार्टनरशीप प्रोजेक्‍ट (3GP)वीडियो फार्मेट प्रयोग किये जाते है।

वीडियो के उपयोग:- मनोरंजन,  शिक्षा,  प्रमोशन और  विज्ञापन,  संचार

Video Signal Characteristics:-

Frame  Size:-  

वीडियो की फ्रेम साइज  उस वीडियो के प्रत्येक फ्रेम (frame) के पिक्सल्स की संख्या होती है। यह वीडियो की रिज़ॉल्यूशन को परिभाषित करती है। इसे आमतौर पर चौड़ाई x ऊँचाई (width x height) के रूप में मापा जाता है, जहां चौड़ाई और ऊँचाई पिक्सल्स में होती है।

240p (426×240):-  इन वीडियो में लो-क्वालिटी रिज़ॉल्यूशन होता है, इनमें 426 पिक्सल्स की चौड़ाई और 240 पिक्सल्स की ऊँचाई होती है। इनका उपयोग कम डेटा या छोटे स्क्रीन वाले डिवाइसेस पर होता है।

 360p (640×360):- ये लो-क्वालिटी रिज़ॉल्यूशन के वीडियो होते है। इनका उपयोग छोटे वीडियो और मोबाइल पर कम बैंडविड्थ के लिए होता है।

480p (854×480) (SD – Standard Definition):- यह स्टैंडर्ड-डेफिनिशन वीडियो माना जाता है, जिसका उपयोग यूट्यूब और अन्य वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर कम गुणवत्ता वाले वीडियो के लिए किया जाता है।

 720p (1280×720) (HD – High Definition):- यह हाई-डेफिनिशन रिज़ॉल्यूशन है। इनमें1280 पिक्सल्स की चौड़ाई और 720 पिक्सल्स की ऊँचाई होती है। इसे HD वीडियो कहा जाता है और यह काफी अच्छा गुणवत्ता प्रदान करता है।

 1080p (1920×1080) (Full HD): इसे फुल एचडी कहा जाता है और यह उच्च गुणवत्ता वाली वीडियो के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह टेलीविज़न, स्ट्रीमिंग, और हाई-डेफिनिशन रिकॉर्डिंग के लिए काफी लोकप्रिय है।

 4K (3840×2160) (Ultra HD): यह अल्ट्रा हाई डेफिनिशन (UHD) रिज़ॉल्यूशन है। इसमें 4K पिक्सल्स की चौड़ाई और 2160 पिक्सल्स की ऊँचाई होती है। बड़े स्क्रीन और उच्च-गुणवत्ता वाले वीडियो के लिए यह उपयुक्त होते है।

 8K (7680×4320):- यह अब तक की सबसे उच्च गुणवत्ता वाली वीडियो रिज़ॉल्यूशन है, जिसमें अत्यधिक डिटेल्स और स्पष्टता होती है। इसका उपयोग प्रोफेशनल फिल्ममेकिंग और फ्यूचर-प्रूफ वीडियो कंटेंट के लिए किया जाता है।

Aspect Ratio:-

वीडियो में Aspect Ratio किसी वीडियो फ्रेम या स्क्रीन की चौड़ाई और ऊँचाई के बीच का अनुपात (ratio) होता है। इसे चौड़ाई:ऊँचाई के रूप में दर्शाया जाता है। यह वीडियो या इमेज की आकृति और आकार निर्धारित करता है। Aspect Ratio बताता है कि वीडियो स्क्रीन पर कितना चौड़ा और कितना ऊँचा दिखाई देगा।

Aspect Ratio की प्रमुख श्रेणियां:-

4:3 (Standard Definition- SD) :-

यह पुराने टीवी और कंप्यूटर मॉनिटरों में उपयोग किया जाता था। इसे स्टैंडर्ड टीवी या फुलस्क्रीन फॉर्मेट कहा जाता है। पुराने टीवी प्रोग्राम, और कुछ पुराने वीडियो गेम्स इसी अनुपात में होते थे।

16:9 (Widescreen- HD and Full HD) :- 

यह सबसे अधिक उपयोग होने वाला अनुपात है, जिसे वाइडस्क्रीन फॉर्मेट कहा जाता है। यह अनुपात आमतौर पर हाई डेफिनिशन (HD) और फुल हाई डेफिनिशन (Full HD) वीडियो के लिए उपयोग किया जाता है।

इस Aspect Ratio का उपयोग आधुनिक टीवी, यूट्यूब वीडियो, और अधिकांश डिजिटल कैमरों द्वारा किया जाता है।

9:16 (Vertical video) :-

यह अनुपात वर्टिकल वीडियो फॉर्मेट के लिए होता है, जो स्मार्टफोन्स पर शूट किए गए और देखे जाने वाले वीडियो के लिये लोकप्रिय है। खासकर Instagram Stories, TikTok, और Snapchat जैसी ऐप्स पर।

1:1 (Square) :-

 यह अनुपात एक स्क्वायर (वर्गाकार) फॉर्मेट का होता है। सोशल मीडिया जैसे Instagram में इमेज और वीडियो के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

21:9 (CinemaScope or Ultra-Widescreen):-  

यह अनुपात फिल्मों और सिनेमा के लिए उपयोग किया जाता है। इसे सिनेमैटिक या अल्ट्रा-वाइडस्क्रीन अनुपात कहा जाता है।

कई फिल्मों का यह Aspect Ratio होता है, क्योंकि यह बड़ी स्क्रीन पर विस्तृत दृश्य और सिनेमैटिक अनुभव प्रदान करता है।

3:2 :-

फोटो कैमरों के लिए अधिक उपयोग होता है। यह अनुपात भी वीडियो में तब उपयोग होता है जब फोटो को वीडियो में सम्मिलित किया जाता है।

Frame Rate:-  

फ्रेम रेट (Frame Rate) किसी वीडियो या एनिमेशन में प्रति सेकंड दिखाए जाने वाले फ्रेम्स की संख्या को कहा जाता है। इसे FPS (Frames Per Second) में मापा जाता है। फ्रेम रेट यह निर्धारित करता है कि वीडियो कितना स्मूथ और नेचुरल दिखाई देगा। आमतौर पर, 24, 30, या 60 फ्रेम प्रति सेकंड का उपयोग होता है।

फ्रेम रेट की सामान्य श्रेणियाँ:-

24 FPS (फिल्मों में उपयोग):-  यह फ्रेम रेट फिल्मों और सिनेमा के लिए मानक माना जाता है। 24 FPS को मानव आँख के लिए सबसे स्मूथ और प्राकृतिक गति प्रदान करने वाला फ्रेम रेट माना जाता है।

30 FPS (टीवी और ऑनलाइन वीडियो के लिए):- यह फ्रेम रेट टीवी ब्रॉडकास्टिंग और अधिकांश ऑनलाइन वीडियो, जैसे यूट्यूब, फेसबुक आदि पर उपयोग किया जाता है।, जिसमें वीडियो स्मूथ दिखाई देता है।

60 FPS (गेमिंग और हाई-स्पीड फुटेज के लिए): 60 FPS को ज्यादा स्मूथ और तेज़ गति वाले दृश्यों के लिए उपयोग किया जाता है, जैसे वीडियो गेम, स्पोर्ट्स इवेंट्स, और स्लो-मोशन वीडियो के लिए। हाई-एक्शन वीडियो और गेमिंग के लिए यह लोकप्रिय है, क्योंकि यह ज्यादा स्मूथ और स्पष्ट अनुभव प्रदान करता है।

 120 FPS और इससे ऊपर (स्लो-मोशन और स्पेशल इफेक्ट्स के लिए): 120 FPS या इससे ज्यादा फ्रेम रेट का उपयोग स्लो-मोशन वीडियो के लिए किया जाता है। जब इसे नॉर्मल गति (जैसे 30 या 60 FPS) पर प्ले किया जाता है, तो यह स्लो-मोशन प्रभाव प्रदान करता है। इसे हाई-एंड कैमरों और स्पेशल इफेक्ट्स के लिए उपयोग किया जाता है।

फ्रेम रेट का महत्व:-

  1. वीडियो की स्मूथनेस:- जितना अधिक फ्रेम रेट होगा, वीडियो उतना ही स्मूथ दिखाई देगा। उच्च फ्रेम रेट का मतलब है कि ज्यादा फ्रेम्स दिखाए जाते हैं, जिससे गति में तेजी और साफ़-सफाइ  रहती है।
  • प्राकृतिक गति:- मानव आँख 10-12 FPS तक अलग-अलग फ्रेम्स को देख सकती है, इसके बाद हमारे दिमाग उन्हें एक स्मूथ गति में जोड़ लेता है। 24 FPS से ऊपर की गति हमें प्राकृतिक रूप से दिखाई देती है, इसलिए फिल्मों के लिए 24 FPS को मानक माना जाता है।
  • एक्शन और गेमिंग में सुधार:- हाई-एक्शन गेम्स या फास्ट-मोविंग कंटेंट (जैसे स्पोर्ट्स) के लिए, उच्च फ्रेम रेट (जैसे 60 FPS) बेहतर होता है, क्योंकि यह तेज़ गति वाले दृश्यों को और भी स्पष्ट और शार्प बनाता है।
  • फाइल साइज और प्रोसेसिंग:- उच्च फ्रेम रेट के साथ, वीडियो की फाइल साइज और प्रोसेसिंग पावर की आवश्‍यकता भी बढ़ जाती है। अधिक फ्रेम्स कैप्चर करने और प्ले करने के लिए कंप्यूटर या डिवाइस को अधिक पावर की आवश्यकता होती है।

Bit Rate:-

बिट रेट  किसी वीडियो, ऑडियो या डेटा स्ट्रीम में प्रति सेकंड प्रोसेस की जाने वाली बिट्स (bits) की संख्या को दर्शाता है। इसे kbps (किलोबिट्स प्रति सेकंड), Mbps (मेगाबिट्स प्रति सेकंड) या bps (बिट्स प्रति सेकंड) में मापा जाता है।

बिट रेट यह बताता है कि किसी डिजिटल मीडिया फाइल या स्ट्रीम में डेटा कितनी तेजी से ट्रांसफर या प्रोसेस किया जा रहा है। बिट रेट जितना ज्यादा होगा विडियो क्‍वालिटी उतनी बेहतर हेागी।

बिट रेट डिजिटल मीडिया फाइल की गुणवत्ता और साइज को नियंत्रित करता है। उच्च बिट रेट बेहतर गुणवत्ता और बड़ी फाइल साइज प्रदान करता है।

ऑडियो में बिट रेट:-

ऑडियो फाइल्स में बिट रेट यह निर्धारित करता है कि प्रति सेकंड कितनी मात्रा में ऑडियो डेटा प्रोसेस हो रहा है।

  • 128 kbps: यह लो-एंड क्वालिटी मानी जाती है। सामान्य उपयोग के लिए यह पर्याप्त होती है, जहां बहुत ही उच्च गुणवत्ता की आवश्यकता नहीं होती।
  • 256 kbps या 320 kbps: यह उच्च गुणवत्ता वाले ऑडियो के लिए उपयुक्त होती है। म्यूजिक स्ट्रीमिंग सर्विसेस जैसे स्पॉटिफाई और एप्पल म्यूजिक इसी प्रकार की बिट रेट का उपयोग करती हैं।

वीडियो में बिट रेट:-

वीडियो फाइल्स के लिए बिट रेट का प्रभाव उसकी स्पष्टता, डिटेल्स, और मूवमेंट की स्मूथनेस पर पड़ता है।

1000-2500 kbps: यह लो-रेजोल्यूशन वीडियो जैसे 480p के लिए पर्याप्त होता है।

5000-8000 kbps: HD (720p) या Full HD (1080p) वीडियो के लिए सामान्य बिट रेट।

20,000 kbps और उससे ऊपर: 4K या उच्च-रेजोल्यूशन वीडियो के लिए, अधिक बिट रेट का उपयोग किया जाता है, क्योंकि इसमें बहुत अधिक डिटेल्स और बड़ी फाइल्स होती हैं।

Importance of Video in Multimedia Presentation:-

-विडियो के सहायता से मल्‍टीमिडिया एप्‍लीकेशन  मे रियल  लाइफ आब्‍जेक्‍ट प्रदर्शित  किये जा सकते है ।

 -आडियो के साथ विडियो दर्शक का ध्‍यान तुरन्‍त आकर्शित  करता है।

-डिजिटल विडियो मैसेज मे व्‍यक्तिगत  फील और एथारिटी  ला देता है ।

-विडियो की फाईल दूसरी फाईल की तरह कम्‍प्‍युटर मे स्टोर की जा सकती। इससे इनकी क्‍वालिटी मे कोई परिवर्तन नहीं होता।

-विडियो कम्‍युनिकेशन होने से दर्शक को दिया गया मैसेज आसानी से याद हो जाता है ।

-विडियो सभी आयु वर्ग के सीखने वालो को सामान्‍य रूप से प्रभावित करता है।

-विडियो की सहायता से मैटर को समझना आसान होता है ।

-दर्शकों का ध्‍यान भटकने से रोकने के लिए विडियो एक महत्‍वपूर्ण साधन है। वीडियो मैसेज को कुछ ही सेकण्‍ड मे समझा देता है।

Animation :-

मल्टीमीडिया में एनिमेशन में विभिन्‍न तकनीकों और प्रक्रियाओं के माध्यम से स्थिर छवियों (static images) या ऑब्जेक्ट्स को लगातार बदलकर या हिलाकर ऐसा प्रभाव उत्पन्न किया जाता है, जिससे वे गतिशील (moving) प्रतीत होते हैं। एनिमेशन उन चित्रों या दृश्यों का एक सिलसिला है, जो तेजी से दिखाए जाते हैं ताकि ऐसा लगे कि वे गति कर रहे हैं।

इसका उपयोग फिल्मों, वीडियो गेम्स, विज्ञापनों, और शैक्षिक सामग्री में किया जाता है। एनिमेशन का मुख्य उद्देश्य दर्शकों को आकर्षित करना, सूचित करना और मनोरंजन प्रदान करना है।

पारम्‍परिक रूप से एनिमेशन बनाने के लिये एक परदर्शी  सेलुलाइड सीट में चित्र हाथ से बनाया या पेन्‍ट किया जाता था, फिर  इनकी फोटो खींचकर  इनको फिल्‍म में उपयोग करते थे।

वर्तमान मे ज्‍यादातर एनिमशन कम्‍प्‍युटर जेनेरेटेड इमेजरी (सी.जी.आई.) की सहायता से बनाये जाते है।

एनिमेशन की सहयता से तीन आयामी आब्‍जेक्‍ट बनाए जा सकते है जिससे जीवांत और वास्‍तविक प्रतिरूप  माडल तैयार हो जाते है।

एनिमेशन की सहायता से शिक्षा और रीसर्च के‍ लिए माडॅल भी तैयार किये जाते है।

एनिमेशन के उपयोग के क्षेत्र :-

फिल्में और कार्टून: एनिमेशन का सबसे अधिक उपयोग फिल्मों और कार्टूनों में किया जाता है, खासकर बच्चों के लिए।

वीडियो गेम्स: वीडियो गेम्स में पात्रों और वातावरण को जीवंत बनाने के लिए एनिमेशन का उपयोग किया जाता है।

शैक्षिक सामग्री: जटिल कॉन्सेप्ट्स को समझाने के लिए एनिमेशन का उपयोग शिक्षा और प्रशिक्षण में किया जाता है।

विज्ञापन और मार्केटिंग: इंटरैक्टिव और आकर्षक विज्ञापन बनाने में एनिमेशन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

Type of Animation:-

टू डी एनिमेशन:-

यह सबसे पुरानी एनीमेशन बनाने की विधि है।  इसका उपयोग कार्टून, प्रामोशनल  विडियो और एक्‍सप्‍लेनर  विडियो बनाने मे हेाता है। इसमें एनिमेशन के फ्रेम हाथ से बनाये जाते है, जिसमे बहुत समय लगता है। वर्तमान मे एनिमेटर डिजिटल टूल्‍स की मदद लेते है।

थ्री डी एनिमेशन:- 

 इनका उपयोग फुल लेन्‍‍थ मूवी, एडर्वटाइजमेंट,  कामर्शियल  और दुसरे मार्केटिंग संसाधनों में होता है। थ्रीडी एनिमेशन की सहायता से बने ए‍नीमेशन  वास्‍तविक, जीवांत और रूचिकर लगते है।

स्‍टाप मोशन एनिमेशन:-

 यह सबसे पुराने एनिमेशन तरीकों मे से एक है। कई क्‍लासिक एनिमेटेड  पिक्‍चर  मे इस विधि  का प्रयोग हुआ है।  इस विधि  में स्थिर वस्‍तु  की एक निश्चित  सिक्‍वेन्‍स  मे फोटो  खीची जाती है। फिर इन फोटो की इस तरह से क्रम से  व्‍यवस्थित करते है,  जिससे उस वस्‍तु के गति‍शील होने का भ्रम पैदा होता है। यह बहुत ही किफायती तरीका  है। इस विधि में  बहुत मंहगे उपकरण का उपयोग नही होता ।

 रोटो स्‍कोप एनिमेशन:-

इस विधि  में वास्‍तविक लोकेशन के फुटेज खींचे जाते हैं। फिर  एक रोटोस्‍कोप टूल्‍स की सहायता से इन्‍हें ट्रैस किया  जाता है। इस विधि से इनिमेशन बनाना  स्‍टैन्‍डर्ड  थ्रीडी एनिमेशन बनाने से सस्‍ता होता  है। इन एनीमेशन के  पात्र अपने वातावरण से  ज्‍यादा  वास्‍तविक तरीके से घुलमिल जाते हैं। इनका उपयोग कामर्शियल में और फिल्‍मों में होता है ।

स्‍टाप मोशन एनिमेशन:-

 यह सबसे पुराने एनिमेशन तरीकों मे से एक है। कई क्‍लासिक एनिमेटेड  पिक्‍चर  मे इस विधि  का प्रयोग हुआ है।  इस विधि  में स्थिर वस्‍तु  की एक निश्चित  सिक्‍वेन्‍स  मे फोटो  खीची जाती है। फिर इन फोटो की इस तरह से क्रम से  व्‍यवस्थित करते है,  जिससे उस वस्‍तु के गति‍शील होने का भ्रम पैदा होता है। यह बहुत ही किफायती तरीका  है। इस विधि में  बहुत मंहगे उपकरण का उपयोग नही होता ।

मोशन कैप्‍चर:-

यह थ्रीडी एनिमेशन का आधुनिक तरीका है। मोशन कैप्‍चर की सहायता से ऐनिमेटर लाईव एक्‍शन सीन की सहायता से एनीमेशन के पात्र के चेहरे पर वास्‍तविक हाव-भाव दिखाते हैं।

 इस विधि में किसी एक्‍टर को एनिेमेशन कैरक्‍टर के जैसे कपड़े  पहना कर उसके मुवमेंट और हावभाव  को रिकॉर्ड किया जाता है।, फिर इसकी मदद से कम्‍प्‍यूटर ग्राफिक्‍स की सहायता से इसके समान ऐनिमेशन बनाए जाते है।

टाइपोग्राफी ऐनिमेशन:-

ऐनिमेटेड टेस्‍ट बनाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।फिल्‍म के टाइटल इत्‍यादि बनाने के लिये इस तरीके का उपयोग होता है।

मकैनिकल ऐनिमेशन :-

इस ऐनिमेशन में किसी यंत्रिकी  उपकरण के कार्य करने की  प्रक्रिया  और संरचना को टुकड़ो में बांटकर समझााया जाता है। इस विधि में  मशीन के सभी भाग के चित्र बनाये जाते हैं और उनको एनीमेटे किया जाता है, जिससे एनीमेशन से मशीन की समस्‍त जानकारी आसानी से समझायी  जा सके ।

Claymation Or Clay animation क्‍लेमेशन :-

यह  स्‍टाप मोशन ऐनिमेशन का ही एक प्रकार है। इसमें ऐनिमेशन कैरेक्‍टर के मिट्टी के माडल बनाते है। फिर  उनके मुवमेंट की एक सीक्‍वेंस में फोटा खींचते है, जैसे स्‍टापमोशन एनीमेशन में किया जाता है। इस विधि में समय बहुत लगता है। ये छोटे प्रोजेक्‍ट के लिए बहुत उपयोगी होते है।

कट आउट एनिमेशन:-

यह भी स्‍टाप मोशन ऐनिमेशन की ही एक रूप है। इसमें पात्र का पेपर में कट आउट बनाया जाता है। फिर इसे ऐनिमेशन प्रक्रिया में प्रयोग करते है। आधुनिक कटआउट ऐनिमेशन में कटआउट को स्‍कैन करके प्रयोग करते  है। कार्टून, कहानियां और एक्‍सप्‍लेनर वीडियो के लिये ये ज्‍यादा उपयोगी हैं।

स्‍टैन्‍डर्ड 2डी, 3डी और मोशन ग्रफिक ऐनिमेशन बिजनेस मर्केटिंग  में प्रयोग  के लिए सर्व श्रेष्‍ठ है। बजट और आवश्‍यकता के अनुसार उपरोक्‍त विधियों में से एक  चुना जाता है।


इंग्लिश नोट्स के लिए ARUN COMPUTER क्लिक करें

error: Content is protected !!