Supervised, Unsupervised and Reinforcement Learning
Machine Learning (ML) कृत्रिम बुद्धिमत्ता(AI) की एक महत्वपूर्ण शाखा है . यह कंप्यूटर को डेटा से सीखने और अनुभव के आधार पर निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करती है। लेकिन सभी Machine Learning प्रणालियाँ एक ही प्रकार से कार्य नहीं करतीं। विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए मशीनों को अलग-अलग तरीकों से प्रशिक्षित किया जाता है।
Machine Learning को मुख्य रूप से तीन प्रमुख प्रकारों में विभाजित किया जाता है— Supervised Learning, Unsupervised Learning और Reinforcement Learning। इन तीनों विधियों का उद्देश्य मशीन को सीखने योग्य बनाना है। इन तीनों के सीखने की प्रक्रिया और कार्य करने का तरीका अलग-अलग होता है।
सीखने की अवधारणा
मनुष्य अपने अनुभवों से सीखता है। जब कोई विद्यार्थी बार-बार अभ्यास करता है तो वह धीरे-धीरे विषय को समझने लगता है। इसी प्रकार Machine Learning में भी मशीन को डेटा प्रदान किया जाता है। वह उस डेटा से सीखकर भविष्य में निर्णय लेने का प्रयास करती है। सीखने की प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि मशीन को किस प्रकार का डेटा दिया गया है और उससे क्या परिणाम अपेक्षित हैं।
1. सुपरवाइज्ड लर्निंग (Supervised Learning)
Supervised Learning Machine Learning की सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली विधि है। इसमें मशीन को पहले से तैयार और लेबल किए गए (Labelled) डेटा की सहायता से प्रशिक्षित किया जाता है। “लेबल्ड डेटा” का अर्थ ऐसे डेटा से है जिसमें इनपुट के साथ सही उत्तर (Output) भी पहले से दिया गया हो। इस प्रकार मशीन प्रशिक्षण के दौरान सही उत्तरों को देखकर सीखती है, और बाद में नए डेटा पर भविष्यवाणी करने का प्रयास करती है।
कार्यप्रणाली
मान लीजिए किसी शिक्षक ने विद्यार्थियों को प्रश्नों के साथ उनके उत्तर भी दे दिए। विद्यार्थी उत्तरों को देखकर प्रश्न हल करना सीख जाता है। इसी प्रकार Supervised Learning में मशीन को ‘इनपुट’ और अपेक्षित ‘आउटपुट’ दोनों दिए जाते हैं। उदाहरण के लिए, यदि मशीन को यह डेटा दिया जाए कि 2 घंटे पढ़ने पर परिणाम असफल, 5 घंटे पढ़ने पर उत्तीर्ण तथा 8 घंटे पढ़ने पर उत्कृष्ट आता है, तो वह इन उदाहरणों को देखकर यह सीख सकती है कि अध्ययन के समय और परिणाम के बीच क्या संबंध है। बाद में यदि किसी नए छात्र का अध्ययन समय दिया जाए तो मशीन उसके संभावित परिणाम का अनुमान लगा सकती है।
उपयोग
Supervised Learning का उपयोग ई-मेल स्पैम पहचान (मशीन को हजारों ई-मेल दिखाकर बताया जाता है कि कौन-से स्पैम हैं), मौसम पूर्वानुमान (पुराने मौसम डेटा के आधार पर भविष्य की भविष्यवाणी), परीक्षा परिणाम विश्लेषण (विद्यार्थियों के पुराने प्रदर्शन के आधार पर भविष्य के परिणामों का अनुमान) तथा चिकित्सा क्षेत्र (रोगी के लक्षणों के आधार पर संभावित रोग की पहचान) में किया जाता है।
लाभ और सीमाएँ
इस तकनीक का लाभ यह है कि यह सटीक है, समझने में सरल है और भविष्यवाणी के लिए उपयोगी है। इसका वास्तविक जीवन में व्यापक उपयोग हो रहा है। इसकी सीमाएँ यह हैं कि इसे बड़ी मात्रा में लेबल्ड डेटा की आवश्यकता होती है। इस प्रकार का डेटा तैयार करने में समय और लागत लगती है तथा गलत डेटा होने पर परिणाम भी गलत आते हैं।
2. अनसुपरवाइज्ड लर्निंग (Unsupervised Learning)
Unsupervised Learning में मशीन को ऐसा डेटा दिया जाता है जिसमें सही उत्तर या ‘लेबल’ उपलब्ध नहीं होते। इस स्थिति में मशीन स्वयं डेटा का विश्लेषण करती है और उसमें छिपे हुए पैटर्न, संबंध तथा समूहों को खोजने का प्रयास करती है। यह वैसा ही है जैसे किसी विद्यार्थी को बिना किसी निर्देश के विभिन्न वस्तुएँ दी जाएँ और उनसे समान वस्तुओं को अलग-अलग समूहों में रखने के लिए कहा जाए।
कार्यप्रणाली
मान लीजिए किसी दुकान के पास हजारों ग्राहकों का खरीदारी डेटा है, लेकिन यह जानकारी नहीं है कि कौन ग्राहक किस श्रेणी का है। ‘Machine Learning’ प्रणाली ग्राहकों की खरीदारी आदतों का अध्ययन करके उन्हें अलग-अलग समूहों में बाँट सकती है। उदाहरण के लिए, यह तकनीक, किसी व्यवसाय के लिए ग्राहकों के डेटा से, बिना पहले से किसी वर्गीकरण के उन्हें 1- नियमित ग्राहक, 2-कभी-कभी खरीदारी करने वाले ग्राहक तथा 3-अधिक खर्च करने वाले ग्राहक की श्रेणियों में बाँट सकती है।
उपयोग
Unsupervised Learning का उपयोग ग्राहक वर्गीकरण (व्यापारिक संस्थाएँ ग्राहकों को उनकी रुचि के आधार पर समूहों में बाँटती हैं), बाजार अनुसंधान (ग्राहकों की पसंद और व्यवहार का विश्लेषण), सोशल मीडिया विश्लेषण (उपयोगकर्ताओं की गतिविधियों के आधार पर समूह बनाना) तथा डेटा विश्लेषण (बड़े डेटा में छिपे पैटर्न खोजना) में किया जाता है।
लाभ और सीमाएँ
इस तकनीक का लाभ यह है कि इसमें लेबल्ड डेटा की आवश्यकता नहीं होती, यह छिपे हुए पैटर्न खोजने में सक्षम है तथा बड़े डेटा विश्लेषण में बहुत उपयोगी होती है। इसकी सीमाएँ यह हैं कि इसके परिणामों की व्याख्या करना कठिन हो सकता है, इसके सटीकता का मूल्यांकन अपेक्षाकृत कठिन होता है तथा कभी-कभी प्राप्त समूह व्यावहारिक रूप से उपयोगी नहीं होते।
3. रिइन्फोर्समेंट लर्निंग(Reinforcement Learning)
Reinforcement Learning ऐसी विधि है जिसमें मशीन अनुभव और प्रतिक्रिया (Feedback) के आधार पर सीखती है। इस प्रक्रिया में मशीन को कोई कार्य दिया जाता है। यदि मशीन सही निर्णय लेती है तो उसे पुरस्कार (Reward) मिलता है और यदि गलत निर्णय लेती है तो दंड (Penalty) मिलता है। समय के साथ मशीन अधिक पुरस्कार प्राप्त करने के लिए सही निर्णय लेना सीख जाती है।
कार्यप्रणाली
मान लीजिए किसी छोटे बच्चे को साइकिल चलाना सिखाया जा रहा है। शुरुआत में वह कई गलतियाँ करता है, लेकिन अभ्यास और अनुभव के आधार पर धीरे-धीरे संतुलन बनाना सीख जाता है। इसी प्रकार Reinforcement Learning में मशीन बार-बार प्रयास करती है और अपने अनुभव से सीखती है।
मुख्य घटक
इसके मुख्य घटक हैं— Agent (सीखने वाला तत्व अर्थात मशीन या प्रोग्राम), Environment (वह वातावरण जिसमें Agent कार्य करता है), Action (Agent द्वारा किया गया कार्य), Reward (सही कार्य करने पर मिलने वाला पुरस्कार) तथा Penalty (गलत कार्य करने पर मिलने वाला दंड)।
उपयोग
Reinforcement Learning का उपयोग रोबोटिक्स (रोबोट को विभिन्न कार्य सिखाने में), वीडियो गेम (गेम खेलने वाली बुद्धिमान प्रणालियों में), स्वचालित वाहन (सड़क की परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने में) तथा संसाधन प्रबंधन (उद्योगों और नेटवर्क प्रणालियों में) में किया जाता है।
लाभ और सीमाएँ
Reinforcement Learning का लाभ यह है कि यह अनुभव से सीखने की क्षमता रखती है, जटिल समस्याओं के समाधान में उपयोगी है तथा स्वायत्त निर्णय लेने में सक्षम होती है। इसकी सीमाएँ यह हैं कि यह प्रणाली सीखने में अधिक समय लेती है, इसके लिए अत्यधिक कंप्यूटिंग संसाधनों की आवश्यकता हो सकती है तथा इसमें सही Reward System बनाना कठिन होता है।
तीनों प्रकारों की तुलना
Supervised Learning में Labelled Data का उपयोग होता है तथा यह सही उत्तर देखकर सीखती है, इसका मुख्य उद्देश्य भविष्यवाणी करना है। Unsupervised Learning में Unlabelled Data का उपयोग होता है तथा यह पैटर्न खोजकर सीखती है, इसका मुख्य उद्देश्य समूह एवं संबंध खोजना है। Reinforcement Learning में Feedback Based Data का उपयोग होता है तथा यह पुरस्कार एवं दंड से सीखती है, इसका मुख्य उद्देश्य सर्वोत्तम निर्णय सीखना है।
Supervised Learning का उदाहरण Spam Detection है, Unsupervised Learning का उदाहरण Customer Segmentation है तथा Reinforcement Learning का उदाहरण Self-Driving Car है।
वास्तविक जीवन में उपयोग
आज अधिकांश AI प्रणालियाँ इन तीनों तकनीकों का उपयोग करती हैं। Netflix और YouTube उपयोगकर्ता की पसंद समझने के लिए Machine Learning का उपयोग करते हैं। बैंकिंग संस्थाएँ धोखाधड़ी की पहचान के लिए Supervised Learning का उपयोग करती हैं।
ई-कॉमर्स कंपनियाँ ग्राहकों को समूहों में विभाजित करने के लिए Unsupervised Learning का उपयोग करती हैं। स्वचालित वाहन Reinforcement Learning की सहायता से निर्णय लेना सीखते हैं।
निष्कर्ष
Machine Learning की Supervised, Unsupervised तथा Reinforcement Learning तीनों विधियाँ आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता की आधारशिला हैं। Supervised Learning लेबल्ड डेटा की सहायता से भविष्यवाणी करती है, Unsupervised Learning डेटा में छिपे पैटर्न खोजती है, जबकि Reinforcement Learning अनुभव और प्रतिक्रिया के आधार पर सीखती है। विभिन्न प्रकार की समस्याओं के समाधान के लिए इन तीनों तकनीकों का व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा है और भविष्य में इनका महत्व और अधिक बढ़ने की संभावना है।