India’s Initiatives: Digital Rupee and Blockchain Policies | Important Questions PGDCA-Hindi-Notes

Next Gen. Tech: AI Tools

Module 1- Foundations of Next Gen Tech
Module 2 – AI & ML
Module 3 – Gen AI & Tools
Module 4 – IOT & Smart Tech
Module 5 – Blockchain & DLT
Module 6 -Ethics & Future


Module – 5 Blockchain Technology (Important Questions)

अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Questions) – 2 अंक प्रत्येक

प्रश्न 1. Blockchain क्या है?

उत्तर: Blockchain एक Distributed Digital Ledger Technology है जिसमें डेटा को Blocks में संग्रहित किया जाता है और ये Blocks क्रिप्टोग्राफी (Hashing) की सहायता से एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। यह विकेंद्रीकृत, पारदर्शी और छेड़छाड़-रोधी (Tamper-Proof) होती है।

प्रश्न 2. Decentralization क्या है?

उत्तर: Decentralization का अर्थ है किसी प्रणाली का नियंत्रण किसी एक व्यक्ति या संस्था के पास न होकर अनेक प्रतिभागियों (Nodes) के बीच वितरित होना। Blockchain इसी सिद्धांत पर कार्य करती है।

प्रश्न 3. DLT का पूर्ण रूप क्या है?

उत्तर: DLT का पूर्ण रूप Distributed Ledger Technology है।

प्रश्न 4. Ledger क्या है?

उत्तर: Ledger का अर्थ है किसी संस्था या संगठन के लेन-देन का व्यवस्थित, कालानुक्रमिक और स्थायी रिकॉर्ड (बही-खाता)।

प्रश्न 5. Node क्या है?

उत्तर: Node DLT/Blockchain Network में जुड़ा प्रत्येक कंप्यूटर या उपकरण होता है। यह डेटा संग्रहित करता है और लेन-देन सत्यापित करता है।

प्रश्न 6. Genesis Block क्या है?

उत्तर: Blockchain का पहला Block (जिसका कोई पिछला Block नहीं होता) Genesis Block कहलाता है। इसका Previous Block Hash शून्य (0) होता है।

प्रश्न 7. Hashing क्या है?

उत्तर: Hashing एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी भी डेटा को एक निश्चित लंबाई के विशेष कोड (Hash Value) में परिवर्तित किया जाता है। यह एकतरफा प्रक्रिया है।

प्रश्न 8. SHA-256 क्या है?

उत्तर: SHA-256 (Secure Hash Algorithm 256-bit) एक Cryptographic Hash Function है जिसका उपयोग Bitcoin Blockchain में किया जाता है। यह किसी भी इनपुट को 256 बिट्स का हैश उत्पन्न करता है।

प्रश्न 9. Mining क्या है?

उत्तर: Mining वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा Blockchain में नए Blocks जोड़े जाते हैं तथा लेन-देन का सत्यापन किया जाता है। Mining करने वालों को Miners कहते हैं।

प्रश्न 10. Nonce क्या है?

उत्तर: Nonce एक यादृच्छिक संख्या है जिसे Miners Mining प्रक्रिया के दौरान समायोजित करते हैं। सही Nonce ढूँढ़कर Miner Proof of Work सिद्ध करता है।

प्रश्न 11. Proof of Work (PoW) क्या है?

उत्तर: Proof of Work एक Consensus Mechanism है जिसमें Miners को एक जटिल गणितीय पहेली (Nonce ढूँढ़ना) हल करनी होती है। यह Bitcoin में उपयोग होता है।

प्रश्न 12. Proof of Stake (PoS) क्या है?

उत्तर: Proof of Stake एक ऊर्जा-कुशल Consensus Mechanism है जिसमें Validators अपनी Cryptocurrency Stake करते हैं और यादृच्छिक रूप से Block बनाने के लिए चुने जाते हैं।

प्रश्न 13. Smart Contract क्या है?

उत्तर: Smart Contract एक स्व-निष्पादित (Self-executing) अनुबंध है जिसमें पूर्व-निर्धारित शर्तें पूरी होने पर कार्य स्वतः हो जाता है, बिना मध्यस्थ के।

प्रश्न 14. Digital Rupee क्या है?

उत्तर: Digital Rupee (e₹) भारत की आधिकारिक डिजिटल मुद्रा है जिसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी किया जाता है। यह CBDC का एक रूप है।

प्रश्न 15. CBDC का पूर्ण रूप क्या है?

उत्तर: CBDC का पूर्ण रूप Central Bank Digital Currency (केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा) है।

प्रश्न 16. UPI का पूर्ण रूप क्या है?

उत्तर: UPI का पूर्ण रूप Unified Payments Interface है।

प्रश्न 17. Immutability किसे कहते हैं?

उत्तर: Blockchain में Immutability का अर्थ है कि एक बार दर्ज किए गए डेटा को बदलना या हटाना असंभव है। यह Hashing और Consensus के कारण संभव होता है।

प्रश्न 18. Double Spending क्या है?

उत्तर: Double Spending एक ही Digital Currency (या संपत्ति) को दो बार खर्च करने की समस्या है। Blockchain इस समस्या का समाधान करती है।

प्रश्न 19. Blockchain Policy क्या है?

उत्तर: Blockchain Policy उन नियमों, दिशानिर्देशों और रणनीतियों का समूह है जो Blockchain Technology के उपयोग और विकास को नियंत्रित करती हैं।

प्रश्न 20. India Stack क्या है?

उत्तर: India Stack डिजिटल पहचान (Aadhaar), भुगतान (UPI), और डेटा सुरक्षा पर आधारित ओपन API प्लेटफॉर्म का एक सेट है।


लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions) – 4 अंक प्रत्येक

प्रश्न 1. Blockchain क्या है? इसकी प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: Blockchain एक Distributed Digital Ledger Technology है जिसमें डेटा को Blocks में संग्रहित किया जाता है और ये Blocks क्रिप्टोग्राफी (Hashing) की सहायता से एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। Blockchain की प्रमुख विशेषताएँ हैं — (1) Decentralization (विकेंद्रीकरण): डेटा किसी एक केंद्रीय संस्था के पास न होकर अनेक Nodes पर वितरित होता है। (2) Transparency (पारदर्शिता): सभी अधिकृत प्रतिभागी रिकॉर्ड देख सकते हैं। (3) Immutability (अपरिवर्तनीयता): एक बार दर्ज डेटा को बदलना असंभव है। (4) Security (सुरक्षा): क्रिप्टोग्राफी के कारण डेटा सुरक्षित रहता है। (5) Traceability (ट्रैसेबिलिटी): हर लेन-देन का इतिहास देखा जा सकता है।

प्रश्न 2. Centralized और Decentralized System में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: Centralized System में नियंत्रण एक केंद्रीय सर्वर या संस्था (जैसे बैंक, सरकार) के पास होता है। डेटा एक स्थान पर संग्रहित होता है। Single Point of Failure होता है — एक सर्वर डाउन होने पर पूरी प्रणाली ठप हो जाती है। पारदर्शिता कम होती है। उदाहरण: बैंक, Facebook। Decentralized System में नियंत्रण अनेक Nodes के बीच वितरित होता है। डेटा अनेक Nodes पर वितरित होता है। कोई Single Point of Failure नहीं होता — एक Node डाउन होने पर भी प्रणाली चलती है। पारदर्शिता अधिक होती है। उदाहरण: Blockchain (Bitcoin, Ethereum)।

प्रश्न 3. DLT और Traditional Database में अंतर लिखिए।

उत्तर: Traditional Database (केंद्रीयकृत) में नियंत्रण एक केंद्रीय प्राधिकरण (DBA, संस्था) के पास होता है। डेटा एक स्थान (Central Server) पर संग्रहित होता है। डेटा परिवर्तन आसान होता है (प्रशासक के पास उच्च अधिकार)। विफलता का एक बिंदु (Single Point of Failure) होता है। उदाहरण: SQL Server, Oracle। DLT में नियंत्रण नेटवर्क के सभी Nodes के बीच वितरित होता है। डेटा अनेक Nodes पर वितरित होता है। डेटा परिवर्तन अत्यंत कठिन होता है — नेटवर्क की सहमति (Consensus) आवश्यक। एक Node डाउन होने पर भी नेटवर्क चलता रहता है। उदाहरण: Blockchain (Bitcoin, Ethereum), Hyperledger Fabric।

प्रश्न 4. Blockchain और DLT में क्या संबंध है? समझाइए।

उत्तर: DLT (Distributed Ledger Technology) एक व्यापक अवधारणा (Broad Concept) है। इसमें वे सभी तकनीकें आती हैं जिनमें डेटा वितरित (Distributed) और अनेक Nodes पर साझा (Shared) होता है। Blockchain, DLT का एक विशेष प्रकार (Specific Type) है। Blockchain में रिकॉर्ड को Blocks के रूप में समूहबद्ध किया जाता है, और प्रत्येक Block पिछले Block से Hashing की सहायता से जुड़ा होता है, जिससे एक श्रृंखला (Chain) बनती है। अर्थात — सभी Blockchain, DLT हैं; लेकिन सभी DLT, Blockchain नहीं हैं। उदाहरण: IOTA (Tangle) एक DLT है लेकिन Blockchain नहीं है क्योंकि इसमें Blocks और Chain नहीं होती।

प्रश्न 5. Block की संरचना (Structure) का वर्णन कीजिए।

उत्तर: एक Block में निम्नलिखित जानकारियाँ होती हैं — (1) Transaction Data (लेन-देन डेटा): इस Block में संग्रहीत सभी लेन-देनों की सूची। (2) Timestamp (समय और तिथि): यह बताता है कि Block कब बनाया गया। (3) Hash of the Current Block (वर्तमान Block का Hash): इस Block के सभी डेटा का अद्वितीय डिजिटल फिंगरप्रिंट। (4) Hash of the Previous Block (पिछले Block का Hash): यह पिछले Block से Chain को जोड़ता है। (5) Nonce: एक यादृच्छिक संख्या जिसे Miners Mining में समायोजित करते हैं।

प्रश्न 6. Hashing की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: Hashing की प्रमुख विशेषताएँ हैं — (1) अद्वितीयता (Uniqueness): प्रत्येक अलग-अलग इनपुट का हैश अलग होता है। (2) निश्चित लंबाई (Fixed Length): चाहे इनपुट छोटा हो या बड़ा, हैश की लंबाई निश्चित रहती है (SHA-256 के लिए 64 हेक्स अक्षर)। (3) एकतरफा प्रक्रिया (One-Way Function): हैश से मूल डेटा प्राप्त करना अत्यंत कठिन (व्यावहारिक रूप से असंभव) होता है। (4) परिवर्तन का तुरंत पता लगाना (Avalanche Effect): यदि डेटा में एक अक्षर भी बदलाव किया जाए, तो हैश पूरी तरह बदल जाता है।

प्रश्न 7. Proof of Work (PoW) और Proof of Stake (PoS) में अंतर लिखिए।

उत्तर: Proof of Work (PoW) में Trust का आधार कंप्यूटिंग शक्ति (Computational Power) है। इसमें Miners Nonce ढूँढ़ने के लिए जटिल गणितीय पहेली हल करते हैं। ऊर्जा खपत अत्यधिक उच्च होती है। Hardware विशेष ASIC Miners की आवश्यकता होती है। उदाहरण: Bitcoin। Proof of Stake (PoS) में Trust का आधार Staked Cryptocurrency है। इसमें Validators अपनी Cryptocurrency Stake करते हैं और यादृच्छिक रूप से चुने जाते हैं। ऊर्जा खपत बहुत कम (99.9% कम) होती है। Hardware सामान्य कंप्यूटर से भी Validation की जा सकती है। उदाहरण: Ethereum (PoS), Cardano, Solana।

प्रश्न 8. Blockchain में Hashing का क्या महत्व है?

उत्तर: Blockchain में Hashing का महत्व निम्नलिखित है — (1) Data Integrity (डेटा अखंडता): प्रत्येक Block का Unique Hash उसके डेटा का फिंगरप्रिंट होता है। डेटा में परिवर्तन होने पर Hash बदल जाता है, जिससे छेड़छाड़ तुरंत पकड़ी जा सकती है। (2) Linking Blocks (Blocks को जोड़ना): प्रत्येक Block अपने पिछले Block का Hash संग्रहीत करता है, जिससे Blocks एक श्रृंखला (Chain) में बँधते हैं। (3) Tamper-Proof: किसी पुराने Block में बदलाव करने के लिए उस Block और उसके बाद के सभी Blocks के Hash दोबारा बनाने पड़ते हैं, जो व्यावहारिक रूप से असंभव है। (4) Proof of Work (Mining): Mining में Miners को एक विशेष Nonce ढूँढ़ना होता है जिससे Block का Hash एक निश्चित Target से छोटा हो जाए।

प्रश्न 9. Smart Contract क्या है? इसके कोई दो उपयोग लिखिए।

उत्तर: Smart Contract एक स्व-निष्पादित (Self-executing) अनुबंध है जिसमें पूर्व-निर्धारित शर्तें (If-Then Conditions) होती हैं। जब शर्तें पूरी हो जाती हैं, तो अनुबंध स्वतः निष्पादित हो जाता है, बिना किसी मध्यस्थ (बैंक, ब्रोकर, वकील) के। Smart Contract Blockchain पर संग्रहीत होते हैं और Immutable होते हैं। उपयोग: (1) बीमा क्षेत्र में — यदि उड़ान विलंबित होती है, तो Smart Contract स्वतः यात्री को क्षतिपूर्ति भेज देता है। (2) Trade Finance (व्यापार वित्त) में — जब माल बंदरगाह पर पहुँचता है (IoT सेंसर द्वारा पुष्टि), तो Smart Contract स्वतः भुगतान जारी कर देता है।

प्रश्न 10. Digital Rupee और Cryptocurrency में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: Digital Rupee (e₹) RBI (भारतीय रिजर्व बैंक) द्वारा जारी किया जाता है। यह कानूनी मुद्रा (Legal Tender) है। इसका मूल्य स्थिर (Stable) होता है — 1 e₹ = 1 ₹। यह केंद्रीयकृत (Centralized — RBI के नियंत्रण में) होती है। Cryptocurrency (जैसे Bitcoin) किसी केंद्रीय प्राधिकरण द्वारा जारी नहीं होती; इसे Miners/Validators द्वारा बनाया जाता है। इसकी कोई कानूनी मान्यता नहीं होती (देश के अनुसार भिन्न)। इसका मूल्य अत्यधिक अस्थिर (Volatile) होता है। यह विकेंद्रीकृत (Decentralized) होती है।

प्रश्न 11. भारत में Blockchain के कोई चार संभावित अनुप्रयोग लिखिए।

उत्तर: भारत में Blockchain के चार संभावित अनुप्रयोग हैं — (1) भूमि अभिलेख (Land Records): Blockchain पर संपत्ति के स्वामित्व का अपरिवर्तनीय और पारदर्शी रिकॉर्ड रखना, जिससे भूमि विवाद कम हों। (2) शिक्षा प्रमाणपत्र (Educational Certificates): नकली डिग्रियों पर रोक लगाने के लिए Blockchain पर डिजिटल प्रमाणपत्र जारी करना और सत्यापन। (3) स्वास्थ्य सेवाएँ (Healthcare): रोगियों के मेडिकल रिकॉर्ड (EHR) को सुरक्षित रूप से संग्रहीत करना और अधिकृत डॉक्टरों के साथ साझा करना। (4) सप्लाई चेन प्रबंधन (Supply Chain): दवाओं और खाद्य उत्पादों की यात्रा को ट्रैक करना, नकली उत्पादों पर रोक लगाना।

प्रश्न 12. RBI का Digital Rupee (e₹) से क्या तात्पर्य है? इसके दो लाभ लिखिए।

उत्तर: Digital Rupee (e₹) भारत की आधिकारिक डिजिटल मुद्रा है जिसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जारी करता है। यह Central Bank Digital Currency (CBDC) का एक रूप है और भौतिक रुपये का डिजिटल विकल्प है। 1 e₹ = 1 ₹। इसके दो लाभ हैं — (1) तेज भुगतान: Digital Rupee से लेन-देन लगभग तुरंत (Real-time) होते हैं। (2) वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion): बिना बैंक खाते वाले लोग भी Digital Rupee Wallet का उपयोग कर सकते हैं, जिससे डिजिटल भुगतान तक पहुँच बढ़ेगी।

प्रश्न 13. Blockchain Policy के मुख्य उद्देश्य लिखिए।

उत्तर: Blockchain Policy के मुख्य उद्देश्य हैं — (1) तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना: स्टार्टअप्स, उद्योगों, और शिक्षण संस्थानों को Blockchain अनुसंधान और विकास के लिए प्रोत्साहित करना। (2) डेटा सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करना: उपयोगकर्ताओं की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा के लिए नियम बनाना। (3) पारदर्शिता बढ़ाना और धोखाधड़ी कम करना: सरकारी सेवाओं (भूमि रिकॉर्ड, सब्सिडी) में Blockchain अपनाकर भ्रष्टाचार को कम करना। (4) डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करना: Digital Rupee के माध्यम से एक कुशल, सुरक्षित भुगतान प्रणाली बनाना।

प्रश्न 14. Supply Chain Management में Blockchain के लाभ लिखिए।

उत्तर: Supply Chain Management में Blockchain के प्रमुख लाभ हैं — (1) ट्रैसेबिलिटी (Traceability): उत्पाद की उत्पत्ति (Origin) से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक पूरी यात्रा को ट्रैक किया जा सकता है। (2) पारदर्शिता (Transparency): सप्लाई चेन के सभी अधिकृत पक्ष उत्पाद की वर्तमान स्थिति देख सकते हैं। (3) नकली उत्पादों में कमी (Reduced Counterfeits): उत्पाद के पूरे इतिहास को सत्यापित किया जा सकता है। (4) त्वरित रिकॉल (Fast Recall): यदि किसी उत्पाद में समस्या हो तो उसके स्रोत का तुरंत पता लगाया जा सकता है (Walmart में 7 दिन से घटकर 2.2 सेकंड)।

प्रश्न 15. Blockchain Voting System के लाभ लिखिए।

उत्तर: Blockchain Voting System के प्रमुख लाभ हैं — (1) पारदर्शिता (Transparency): सभी वोट Blockchain पर दर्ज होते हैं और अधिकृत व्यक्ति (चुनाव आयोग, पर्यवेक्षक) उन्हें देख सकते हैं। (2) सुरक्षा और अपरिवर्तनीयता (Security and Immutability): एक बार वोट दर्ज होने के बाद उसे बदलना या हटाना असंभव है। (3) दूरस्थ मतदान (Remote Voting): प्रवासी नागरिक (NRIs), बीमार, बुजुर्ग, या दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोग घर बैठे मतदान कर सकते हैं। (4) त्वरित परिणाम (Instant Results): मतगणना सेकंडों या मिनटों में पूरी हो जाती है।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions) – 10 अंक प्रत्येक

प्रश्न 1. Blockchain क्या है? इसकी विशेषताओं, लाभों और चुनौतियों का विस्तार से वर्णन कीजिए।

उत्तर: Blockchain एक Distributed Digital Ledger Technology है जिसमें डेटा को Blocks में संग्रहित किया जाता है और ये Blocks क्रिप्टोग्राफी (Hashing) की सहायता से एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। यह विकेंद्रीकृत (Decentralized), पारदर्शी (Transparent) और छेड़छाड़-रोधी (Tamper-Proof) होती है। प्रत्येक Block में लेन-देन का डेटा, Timestamp, वर्तमान Block का Hash, पिछले Block का Hash, और Nonce होता है।

विशेषताएँ: (1) Decentralization: डेटा किसी एक केंद्रीय संस्था के पास न होकर अनेक Nodes पर वितरित होता है। (2) Transparency: सभी अधिकृत प्रतिभागी रिकॉर्ड देख सकते हैं (Public Blockchain में कोई भी देख सकता है)। (3) Immutability: एक बार दर्ज डेटा को बदलना असंभव है। (4) Security: Cryptographic Hashing और Digital Signatures से डेटा सुरक्षित रहता है। (5) Traceability: हर लेन-देन का पूरा इतिहास देखा जा सकता है। (6) Consensus: नेटवर्क के Nodes आपस में सहमति से ही नया Block जोड़ते हैं।

लाभ: (1) बेहतर सुरक्षा और डेटा अखंडता। (2) पारदर्शिता और विश्वास (Trustless System)। (3) धोखाधड़ी में कमी (Immutability के कारण)। (4) मध्यस्थों (Intermediaries) की आवश्यकता कम, जिससे लागत और समय दोनों कम। (5) डेटा की विश्वसनीयता और ऑडिट क्षमता (Auditability)। (6) विकेंद्रीकरण के कारण Single Point of Failure समाप्त।

चुनौतियाँ: (1) तकनीकी जटिलता। (2) उच्च ऊर्जा खपत (Proof of Work में)। (3) Scalability (विस्तार क्षमता) — Bitcoin में केवल 7 TPS। (4) कानूनी और नियामकीय अनिश्चितता। (5) डेटा गोपनीयता (Public Blockchain में सभी लेन-देन सार्वजनिक)। (6) उच्च प्रारंभिक लागत।

प्रश्न 2. Distributed Ledger Technology (DLT) क्या है? Centralized Database और DLT के बीच तुलनात्मक अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: Distributed Ledger Technology (DLT) एक ऐसी डिजिटल प्रणाली है जिसमें लेन-देन और डेटा का रिकॉर्ड किसी एक केंद्रीय सर्वर या संस्था के पास न होकर, नेटवर्क में जुड़े अनेक कंप्यूटरों (Nodes) पर साझा और वितरित रूप से संग्रहीत किया जाता है। नेटवर्क का प्रत्येक Node रिकॉर्ड की एक प्रति रख सकता है। जब कोई नया लेन-देन होता है, तो उसे नेटवर्क के सभी Nodes पर प्रसारित किया जाता है, Nodes उसकी वैधता की जाँच करते हैं (Consensus Mechanism के द्वारा), और फिर सहमति बनने पर उसे रिकॉर्ड में जोड़ दिया जाता है।

Centralized Database और DLT में तुलनात्मक अंतर:

विशेषताCentralized DatabaseDLT (Distributed Ledger Technology)
नियंत्रणएक केंद्रीय प्राधिकरण (DBA, बैंक, सरकार) के पासनेटवर्क के सभी Nodes के बीच वितरित
डेटा भंडारणडेटा एक स्थान (Central Server) परडेटा अनेक Nodes पर वितरित
डेटा परिवर्तनआसान (प्रशासक के पास उच्च अधिकार)अत्यंत कठिन — नेटवर्क की सहमति आवश्यक
पारदर्शितासीमित (केवल प्रशासक के पास पूर्ण डेटा)अधिक (सभी Nodes के पास डेटा की प्रति)
विफलता का एक बिंदुहाँ — एक सर्वर क्रैश होने पर पूरी प्रणाली ठपनहीं — एक या कई Nodes डाउन होने पर भी सिस्टम चलता है
विश्वासतीसरे पक्ष (Central Authority) पर भरोसा आवश्यकTrustless System — गणित और सहमति पर आधारित
गति और प्रदर्शनअधिक तेज (कोई Consensus नहीं)अपेक्षाकृत धीमा (Consensus में समय लगता है)
उदाहरणबैंक का डेटाबेस, SQL Server, OracleBlockchain (Bitcoin, Ethereum), Hyperledger Fabric

प्रश्न 3. Blockchain की कार्यप्रणाली (Working) को चरणबद्ध रूप से समझाइए। Blocks, Hashing और Mining की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: Blockchain की कार्यप्रणाली निम्नलिखित चरणों में होती है:

चरण 1: लेन-देन का निर्माण (Transaction Creation): कोई उपयोगकर्ता नेटवर्क में एक नया लेन-देन दर्ज करता है (जैसे A, B को 1 Bitcoin भेजना चाहता है)। यह लेन-देन उपयोगकर्ता के Private Key से डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित होता है।

चरण 2: प्रसारण (Broadcast): यह लेन-देन नेटवर्क के सभी Nodes (Miners) में प्रसारित कर दिया जाता है।

चरण 3: सत्यापन (Validation): Miners लेन-देन की वैधता की जाँच करते हैं — Digital Signature सही है या नहीं, A के पास पर्याप्त बैलेंस है या नहीं, Double Spending तो नहीं है।

चरण 4: Block का निर्माण (Block Formation): सभी वैध लेन-देनों को एकत्र कर एक Block में रखा जाता है। Block में Transaction Data, Timestamp, Previous Block Hash, और Nonce होता है।

चरण 5: Mining (Proof of Work): Miners Nonce को बदल-बदल कर Block Header का Hash कैलकुलेट करते हैं। लक्ष्य है कि Hash एक निश्चित Target (कठिनाई) से छोटा हो जाए। यह एक ट्रायल-एंड-एरर प्रक्रिया है।

चरण 6: Block का जोड़ना और पुरस्कार: जो Miner सबसे पहले सही Nonce ढूँढ़ता है, वह अपने Block को नेटवर्क में Broadcast करता है। अन्य Nodes उस Block को सत्यापित करते हैं और फिर उसे अपनी Blockchain में जोड़ लेते हैं। Miner को Block Reward + Transaction Fees मिलती है।

Blocks, Hashing और Mining की भूमिका:

  • Blocks: डेटा (लेन-देन) को संग्रहीत करते हैं और उसे एक संरचित, समय-मुहरबंद इकाई में बदलते हैं। Blocks में Previous Block Hash होता है, जो Chain को बनाता है।
  • Hashing: डेटा को एक अद्वितीय डिजिटल फिंगरप्रिंट (Hash) में बदलता है। यदि डेटा में परिवर्तन होता है तो Hash बदल जाता है (Avalanche Effect), जिससे छेड़छाड़ पकड़ी जा सकती है। यह Blocks को आपस में जोड़ता है (Previous Hash) और Proof of Work का आधार है।
  • Mining (PoW): नए लेन-देनों को सत्यापित करता है, नए Blocks को Blockchain में जोड़ता है, और सुनिश्चित करता है कि सभी Nodes एक ही सही Ledger पर सहमत हों। Mining डेटा में बदलाव को अत्यंत कठिन (और महंगा) बना देता है।

प्रश्न 4. Proof of Work (PoW) और Proof of Stake (PoS) की तुलनात्मक व्याख्या कीजिए।

उत्तर: Proof of Work (PoW) और Proof of Stake (PoS) दोनों Consensus Mechanisms हैं जो Blockchain Network में लेन-देन की सत्यता और Blocks को जोड़ने की सहमति सुनिश्चित करते हैं।

Proof of Work (PoW): यह Bitcoin और कई अन्य Blockchains में उपयोग होता है। इसमें Miners को एक जटिल गणितीय पहेली (सही Nonce ढूँढ़ना) हल करनी होती है। इस पहेली को हल करने के लिए अत्यधिक कंप्यूटिंग शक्ति और बिजली की आवश्यकता होती है। जो Miner सबसे पहले पहेली हल करता है, उसे नया Block बनाने का अधिकार और पुरस्कार (Block Reward + Fees) मिलता है। PoW अत्यधिक सुरक्षित है (51% Attack बहुत महंगा), लेकिन इसकी ऊर्जा खपत बहुत अधिक है (Bitcoin Mining में उतनी बिजली खर्च होती है जितनी कुछ छोटे देशों की)।

Proof of Stake (PoS): यह एक ऊर्जा-कुशल विकल्प है। इसमें Mining के स्थान पर Validators (सत्यापनकर्ता) होते हैं। Validators अपनी Cryptocurrency (Ethereum में 32 ETH) को नेटवर्क में Stake (लॉक) करते हैं। Staked amount के अनुपात में Validator को नया Block बनाने के लिए यादृच्छिक रूप से चुना जाता है। यदि Validator गलत या धोखाधड़ी वाला Block बनाता है, तो उसकी Staked Amount जब्त (Slash) कर ली जाती है। PoS की ऊर्जा खपत PoW के मुकाबले 99.9% कम है। Ethereum ने सितंबर 2022 में PoW से PoS में परिवर्तन कर लिया है।

तुलनात्मक अंतर:

विशेषताProof of Work (PoW)Proof of Stake (PoS)
Basis of Trustकंप्यूटिंग शक्ति (Computational Power)Staked Cryptocurrency
ऊर्जा खपतअत्यधिक उच्चबहुत कम (99.9% कम)
हार्डवेयरविशेष ASIC Minersसामान्य कंप्यूटर / Validator Node
Block CreatorMinerValidator
जोखिम51% Attack (महंगा)Slashing (Staked Amount जब्त)
गति (TPS)कम (Bitcoin ~7 TPS)अधिक (Ethereum PoS ~30-100 TPS)
उदाहरणBitcoin, Litecoin, DogecoinEthereum (PoS), Cardano, Solana, Polygon

प्रश्न 5. Supply Chain Management में Blockchain के अनुप्रयोगों, लाभों और चुनौतियों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: Supply Chain Management (सप्लाई चेन प्रबंधन) वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से कोई उत्पाद निर्माता से उपभोक्ता तक पहुँचता है। पारंपरिक सप्लाई चेन में जानकारी की कमी, नकली उत्पाद, पारदर्शिता का अभाव, और ट्रैकिंग में कठिनाई जैसी समस्याएँ होती हैं। Blockchain इन समस्याओं का समाधान प्रदान करती है।

Blockchain आधारित Supply Chain — कैसे काम करता है: उत्पाद के प्रत्येक चरण (कच्चा माल, उत्पादन, परिवहन, भंडारण, वितरण, बिक्री) का रिकॉर्ड Blockchain पर सुरक्षित, पारदर्शी और अपरिवर्तनीय रूप से संग्रहीत किया जाता है। प्रत्येक उत्पाद को एक Unique ID (QR Code, RFID Tag) दिया जाता है। जब भी उत्पाद एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाता है, एक Transaction नेटवर्क पर दर्ज किया जाता है।

लाभ: (1) पारदर्शिता: सभी अधिकृत पक्ष उत्पाद की स्थिति देख सकते हैं। (2) ट्रैसेबिलिटी (Traceability): उत्पाद की उत्पत्ति (Origin) से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक पूरी यात्रा को ट्रैक किया जा सकता है। (3) नकली उत्पादों में कमी: उत्पाद के पूरे इतिहास को सत्यापित किया जा सकता है। (4) त्वरित रिकॉल (Fast Recall): यदि किसी उत्पाद में समस्या हो (जैसे खाद्य संदूषण), तो उसके स्रोत का तुरंत पता लगाया जा सकता है (Walmart में 7 दिन से घटकर 2.2 सेकंड)। (5) विश्वास में वृद्धि: निर्माता, वितरक, विक्रेता और उपभोक्ता के बीच विश्वास बढ़ता है।

चुनौतियाँ: (1) उच्च प्रारंभिक लागत (सेंसर, RFID, सॉफ्टवेयर, प्रशिक्षण)। (2) तकनीकी जटिलता और विशेषज्ञों की कमी। (3) Scalability — बहुत बड़ी सप्लाई चेन (अरबों उत्पाद) के लिए Blockchain का प्रदर्शन। (4) विभिन्न कंपनियों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी (Interoperability) की समस्या।

वास्तविक उदाहरण: Walmart और IBM Food Trust ने Blockchain का उपयोग करके खाद्य उत्पादों को ट्रैक करने का समय 7 दिन से घटाकर 2.2 सेकंड कर दिया।

प्रश्न 6. Banking Sector में Blockchain के अनुप्रयोगों और लाभों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: बैंकिंग क्षेत्र में प्रतिदिन लाखों वित्तीय लेन-देन होते हैं। पारंपरिक बैंकिंग की चुनौतियों में लेन-देन में समय लगना (विशेषकर क्रॉस-बॉर्डर में 2-5 दिन), अधिक शुल्क (SWIFT फीस, मध्यस्थों की फीस), धोखाधड़ी का जोखिम, और मध्यस्थों पर निर्भरता शामिल हैं। Blockchain इन चुनौतियों का समाधान प्रदान करती है।

Banking में Blockchain के प्रमुख अनुप्रयोग:

(1) Digital Payments और Remittances: Blockchain आधारित भुगतान (Bitcoin, USDC) से कोई भी व्यक्ति बिना बैंक खाते के वैश्विक स्तर पर सेकंडों या मिनटों में पैसा भेज सकता है।

(2) Cross-Border Transactions (क्रॉस-बॉर्डर भुगतान): Ripple (XRP) और Stellar (XLM) जैसे Blockchains से अंतर्राष्ट्रीय भुगतान सेकंडों में और बहुत कम शुल्क (SWIFT के मुकाबले) पर होते हैं।

(3) Fraud Detection and Prevention: Blockchain की Immutability के कारण फर्जी लेन-देन या डेटा में हेराफेरी लगभग असंभव हो जाती है।

(4) KYC/AML Record Management: ग्राहक की KYC जानकारी को Blockchain पर संग्रहीत किया जा सकता है। एक बार KYC करवाने के बाद ग्राहक अन्य बैंकों के साथ (सहमति से) वही डेटा साझा कर सकता है।

(5) Smart Contracts: स्व-निष्पादित अनुबंध। उदाहरण: Trade Finance में जब माल बंदरगाह पर पहुँचता है, तो Smart Contract स्वतः भुगतान जारी कर देता है।

(6) CBDC (Central Bank Digital Currency): Digital Rupee (e₹) RBI द्वारा जारी डिजिटल मुद्रा।

लाभ: (1) तेज लेन-देन (दिनों से सेकंडों/मिनटों में)। (2) अधिक सुरक्षा (Cryptography और Immutability)। (3) कम लागत (मध्यस्थों की आवश्यकता कम)। (4) बेहतर पारदर्शिता (सभी लेन-देन ऑडिट करने योग्य)। (5) धोखाधड़ी में कमी। (6) वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) — बिना बैंक खाते वाले लोग भी डिजिटल वॉलेट का उपयोग कर सकते हैं।

प्रश्न 7. Digital Rupee (e₹) क्या है? इसकी विशेषताओं, लाभों और चुनौतियों का वर्णन कीजिए। Digital Rupee और Cryptocurrency के बीच अंतर भी स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: Digital Rupee (e₹) भारत की आधिकारिक डिजिटल मुद्रा है जिसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जारी करता है। यह Central Bank Digital Currency (CBDC) का एक रूप है। Digital Rupee भौतिक रुपये (नोट और सिक्के) का डिजिटल विकल्प है — 1 e₹ = 1 ₹।

विशेषताएँ: (1) RBI द्वारा जारी — इसे RBI जारी करता है और इसके पीछे RBI की गारंटी होती है। (2) कानूनी मान्यता (Legal Tender) — यह कानूनी मुद्रा है। (3) डिजिटल स्वरूप — केवल डिजिटल रूप में उपलब्ध (मोबाइल ऐप, डिजिटल वॉलेट, स्मार्ट कार्ड)। (4) मूल्य स्थिरता — 1 e₹ = 1 ₹, इसमें कोई उतार-चढ़ाव नहीं। (5) RBI का प्रत्यक्ष नियंत्रण — RBI यह निर्धारित करेगा कि कितना Digital Rupee प्रचलन में होगा।

लाभ: (1) तेज भुगतान — लेन-देन लगभग तुरंत (Real-time)। (2) कम लागत — नकदी छापने, वितरण, और सुरक्षा पर होने वाला खर्च कम होगा। (3) वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) — बिना बैंक खाते वाले लोग भी Digital Rupee Wallet का उपयोग कर सकते हैं। (4) पारदर्शिता — काले धन और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण में मदद मिल सकती है। (5) नकदी प्रबंधन में सुविधा — नकदी छापने, परिवहन करने, सुरक्षित रखने की लागत कम होगी।

चुनौतियाँ: (1) तकनीकी बुनियादी ढाँचा — ग्रामीण क्षेत्रों में तेज इंटरनेट और स्मार्ट डिवाइस की कमी। (2) गोपनीयता और निगरानी — RBI द्वारा लेन-देन ट्रैक किए जा सकते हैं, जो गोपनीयता का उल्लंघन हो सकता है। (3) साइबर सुरक्षा जोखिम — हैकिंग और डिजिटल वॉलेट की सुरक्षा। (4) उपयोगकर्ता जागरूकता — आम जनता को Digital Rupee का उपयोग करना सिखाना।

Digital Rupee और Cryptocurrency में अंतर:

विशेषताDigital Rupee (e₹)Cryptocurrency (Bitcoin, Ethereum)
जारीकर्ताRBI (Central Bank)कोई केंद्रीय प्राधिकरण नहीं; निजी नेटवर्क
कानूनी मान्यतापूर्ण कानूनी मुद्रा (Legal Tender)कई देशों में सीमित या अनियमित
मूल्य स्थिरतास्थिर (1 e₹ = 1 ₹)अत्यधिक अस्थिर (Volatile)
नियंत्रणकेंद्रीयकृत (Centralized)विकेंद्रीकृत (Decentralized)
उदाहरणDigital Rupee (e₹), e-CNYBitcoin (BTC), Ethereum (ETH)

प्रश्न 8. Voting System में Blockchain के उपयोग का वर्णन कीजिए। इसके लाभ और चुनौतियाँ भी लिखिए।

उत्तर: लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदान एक पवित्र और महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। पारंपरिक मतदान प्रणाली में मतदाता पहचान संबंधी समस्याएँ (फर्जी वोटिंग), मतदान प्रक्रिया की जटिलता, रिकॉर्ड प्रबंधन की कठिनाइयाँ, परिणामों पर संदेह, और दूरस्थ मतदान की असंभवता जैसी चुनौतियाँ होती हैं। Blockchain आधारित Voting System इन चुनौतियों का समाधान प्रदान करता है।

Blockchain Voting की कार्यप्रणाली (चरणबद्ध):

चरण 1 — मतदाता पंजीकरण: प्रत्येक पात्र मतदाता को एक Unique Digital Identity (Blockchain Address + Private Key) दी जाती है। एक Digital Voting Token जारी किया जाता है (जिसका उपयोग केवल एक बार किया जा सकता है)।

चरण 2 — मतदान: मतदाता अपने मोबाइल ऐप या कियोस्क पर अपना वोट दर्ज करता है। वोट मतदाता के Private Key से डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित होता है।

चरण 3 — सत्यापन और रिकॉर्डिंग: Nodes वोट की वैधता की जाँच करते हैं। सत्यापन के बाद वोट को एक Block में सम्मिलित किया जाता है और Blockchain पर अपरिवर्तनीय रूप से रिकॉर्ड कर दिया जाता है।

चरण 4 — मतगणना: मतदान समाप्त होने के बाद, Smart Contract स्वतः सभी वोटों की गणना कर सकता है। परिणाम तुरंत (सेकंडों या मिनटों में) उपलब्ध हो जाता है।

लाभ: (1) पारदर्शिता: सभी वोट Blockchain पर दर्ज होते हैं और अधिकृत व्यक्ति (चुनाव आयोग, पर्यवेक्षक) उन्हें देख सकते हैं। (2) सुरक्षा और अपरिवर्तनीयता: एक बार वोट दर्ज होने के बाद उसे बदलना या हटाना असंभव है। (3) दूरस्थ मतदान (Remote Voting): प्रवासी नागरिक (NRIs), बीमार, बुजुर्ग घर बैठे मतदान कर सकते हैं। (4) त्वरित परिणाम: मतगणना सेकंडों में पूरी हो जाती है। (5) धोखाधड़ी में कमी: नकली वोट, डबल वोटिंग, मतपेटियों से छेड़छाड़ समाप्त। (6) मतदाता विश्वास: पारदर्शिता और Immutability के कारण मतदाताओं का विश्वास बढ़ता है।

चुनौतियाँ: (1) डिजिटल डिवाइड: सभी मतदाताओं के पास स्मार्टफोन और इंटरनेट नहीं है। (2) निजी कुंजी (Private Key) का प्रबंधन — यदि मतदाता अपनी Private Key खो देता है तो वह वोट नहीं डाल पाएगा। (3) मतदाता गुमनामी (Anonymity): सार्वजनिक Blockchain पर सभी लेन-देन सार्वजनिक होते हैं — Zero-Knowledge Proofs (ZKP) की आवश्यकता है। (4) साइबर सुरक्षा खतरे: 51% Attack, Sybil Attack। (5) कानूनी स्वीकार्यता: क्या निर्वाचन आयोग Blockchain मतदान को मान्यता देगा?

प्रश्न 9. भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वाली प्रमुख पहलों का वर्णन कीजिए। Digital Rupee इन पहलों में कहाँ फिट बैठता है?

उत्तर: भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था (Digital Economy) की ओर बढ़ रहा है। डिजिटल अर्थव्यवस्था वह आर्थिक व्यवस्था है जिसमें डिजिटल तकनीकों (इंटरनेट, मोबाइल, क्लाउड, Blockchain, AI) के माध्यम से व्यापार, भुगतान, सेवाएँ और सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाता है।

भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वाली प्रमुख पहलें:

(1) UPI (Unified Payments Interface): NPCI द्वारा विकसित, भारत का रियल-टाइम भुगतान प्रणाली। UPI से कोई भी व्यक्ति स्मार्टफोन से किसी को भी तुरंत पैसा भेज सकता है (24×7, 365 दिन)। UPI मासिक लेन-देन अब 10 बिलियन से अधिक है। UPI को भूटान, नेपाल, फ्रांस, यूएई, सिंगापुर, मॉरीशस, श्रीलंका जैसे देशों में भी अपनाया गया है।

(2) Aadhaar आधारित सेवाएँ: 12 अंकों की यूनिक आईडी, विश्व का सबसे बड़ा बायोमेट्रिक डिजिटल आईडी सिस्टम (लगभग 1.4 बिलियन लोग)। Aadhaar से AePS (Aadhaar Enabled Payment System) और eKYC सुविधाएँ मिलती हैं।

(3) DigiLocker: नागरिकों के डिजिटल दस्तावेज़ (Driving License, RC, Marksheets, Certificates) स्टोर करने और शेयर करने का क्लाउड-आधारित प्लेटफॉर्म।

(4) BHIM App: UPI पर आधारित भुगतान ऐप जो सरल और सुरक्षित डिजिटल भुगतान प्रदान करता है।

(5) Digital India Mission: भारत सरकार का प्रमुख कार्यक्रम जिसका उद्देश्य भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था में बदलना है।

(6) e-Governance Platforms: e-District, e-Courts, GeM (Government e-Marketplace), UMANG (एक ही ऐप पर सभी सरकारी सेवाएँ)।

(7) India Stack: डिजिटल पहचान (Aadhaar), भुगतान (UPI), डेटा सुरक्षा और सहमति पर आधारित ओपन API प्लेटफॉर्म का सेट।

Digital Rupee (e₹) इन पहलों में कहाँ फिट बैठता है? Digital Rupee भारत की आधिकारिक डिजिटल मुद्रा है जिसे RBI जारी करता है। यह UPI और भौतिक नकदी का पूरक है। जहाँ UPI बैंक बैलेंस से लेन-देन करता है (बैंक के पैसे), वहीं Digital Rupee RBI द्वारा जारी पैसा है (नकदी की तरह, लेकिन डिजिटल रूप में)। Digital Rupee India Stack के पेमेंट्स लेयर (UPI) का पूरक है और डिजिटल अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाएगा, खासकर क्रॉस-बॉर्डर भुगतान और वित्तीय समावेशन के क्षेत्रों में।

प्रश्न 10. भारत में Blockchain Policy के उद्देश्य, वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत टिप्पणी लिखिए।

उत्तर: Blockchain Policy से आशय उन नियमों, कानूनों, दिशानिर्देशों, मानकों और रणनीतियों से है जो Blockchain Technology के विकास, उपयोग, प्रबंधन और विनियमन को नियंत्रित करती हैं।

Blockchain Policy के उद्देश्य: (1) तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना — स्टार्टअप्स, उद्योगों, और शिक्षण संस्थानों को Blockchain अनुसंधान और विकास के लिए प्रोत्साहित करना। (2) डेटा सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करना — उपयोगकर्ताओं की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा के लिए नियम बनाना। (3) पारदर्शिता बढ़ाना और धोखाधड़ी कम करना — सरकारी सेवाओं (भूमि रिकॉर्ड, सब्सिडी) में Blockchain अपनाकर भ्रष्टाचार को कम करना। (4) डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करना — Digital Rupee के माध्यम से एक कुशल, सुरक्षित भुगतान प्रणाली बनाना। (5) अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना — वैश्विक Blockchain और CBDC समुदाय के साथ Interoperability सुनिश्चित करना।

वर्तमान स्थिति: अभी तक भारत में Blockchain Technology के लिए कोई एकल, सर्व-समावेशी कानून नहीं है। (1) NITI Aayog ने Blockchain Technology पर एक राष्ट्रीय रणनीति रिपोर्ट (National Strategy on Blockchain) का मसौदा तैयार किया है। (2) MeitY ने “Blockchain Technology Vision Document” (मसौदा) प्रकाशित किया है। (3) RBI ने CBDC — Digital Rupee (e₹) लॉन्च किया है (दिसंबर 2022 से पायलट)। (4) SEBI ने क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल एसेट्स को विनियमित करने के लिए एक समिति का गठन किया है। (5) Cryptocurrency Bill (“Cryptocurrency and Regulation of Official Digital Currency Bill, 2021”) का मसौदा तैयार है, लेकिन अभी संसद में पारित नहीं हुआ।

भविष्य की संभावनाएँ: (1) Digital Rupee का पूर्ण रोलआउट (2024-25 तक) — रिटेल उपयोगकर्ता Digital Rupee का उपयोग कर सकेंगे। (2) Blockchain आधारित लैंड रिकॉर्ड्स का राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार (तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र में पायलट के बाद)। (3) शैक्षणिक प्रमाणपत्रों का Blockchain पर जारी करना और सत्यापन — नकली डिग्री पर रोक। (4) स्वास्थ्य क्षेत्र में Electronic Health Records (EHR) Blockchain पर। (5) सप्लाई चेन में नकली दवाओं पर रोक के लिए Blockchain का उपयोग। (6) क्रॉस-बॉर्डर भुगतान के लिए Digital Rupee को अन्य देशों के CBDCs से जोड़ा जा सकता है। (7) UPI और Digital Rupee का इंटीग्रेशन — एक ही ऐप से दोनों भुगतान विधियाँ। (8) भारतीय Blockchain स्टार्टअप्स (Polygon, 5ire, CoinDCX, CoinSwitch) का विकास।


परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न (Most Important Questions for Exam)

प्रश्न 1. Blockchain क्या है? इसकी विशेषताओं, लाभों और चुनौतियों का वर्णन कीजिए।

प्रश्न 2. Distributed Ledger Technology (DLT) क्या है? Centralized Database और DLT के बीच तुलनात्मक अंतर स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 3. Blockchain की कार्यप्रणाली (Working) को चरणबद्ध रूप से समझाइए। Blocks, Hashing और Mining की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 4. Proof of Work (PoW) और Proof of Stake (PoS) में तुलनात्मक अंतर स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 5. Supply Chain Management में Blockchain के अनुप्रयोगों, लाभों और चुनौतियों का वर्णन कीजिए।

प्रश्न 6. Banking Sector में Blockchain के अनुप्रयोगों और लाभों का वर्णन कीजिए।

प्रश्न 7. Voting System में Blockchain के उपयोग, लाभ और चुनौतियों का वर्णन कीजिए।

प्रश्न 8. Digital Rupee (e₹) क्या है? इसकी विशेषताओं, लाभों और चुनौतियों का वर्णन कीजिए। Digital Rupee और Cryptocurrency में अंतर स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 9. भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वाली प्रमुख पहलों का वर्णन कीजिए। Digital Rupee इन पहलों में कहाँ फिट बैठता है?

प्रश्न 10. भारत में Blockchain Policy के उद्देश्य, वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत टिप्पणी लिखिए।


Model Question Paper

PGDCA / PG Program in Computer Applications

Next Generation Technologies: Blockchain Technology

Module – 5: Blockchain Technology

समय : 3 घंटे
पूर्णांक : 70

निर्देश: सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। खंड-अ में कोई 10, खंड-ब में कोई 5, खंड-स में कोई 3 प्रश्न हल कीजिए।


खंड – अ

(अति लघु उत्तरीय प्रश्न)

(कोई 10 प्रश्न हल कीजिए)
(10 × 2 = 20 अंक)

प्रश्न 1. Blockchain क्या है?

प्रश्न 2. Decentralization क्या है?

प्रश्न 3. DLT का पूर्ण रूप क्या है?

प्रश्न 4. Ledger क्या है?

प्रश्न 5. Node क्या है?

प्रश्न 6. Genesis Block क्या है?

प्रश्न 7. Hashing क्या है?

प्रश्न 8. SHA-256 क्या है?

प्रश्न 9. Mining क्या है?

प्रश्न 10. Nonce क्या है?

प्रश्न 11. Proof of Work (PoW) क्या है?

प्रश्न 12. Proof of Stake (PoS) क्या है?

प्रश्न 13. Smart Contract क्या है?

प्रश्न 14. Digital Rupee क्या है?

प्रश्न 15. CBDC का पूर्ण रूप क्या है?

प्रश्न 16. UPI का पूर्ण रूप क्या है?

प्रश्न 17. Immutability किसे कहते हैं?

प्रश्न 18. Double Spending क्या है?


खंड – ब

(लघु उत्तरीय प्रश्न)

(कोई 5 प्रश्न हल कीजिए)
(5 × 4 = 20 अंक)

प्रश्न 1. Blockchain की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

प्रश्न 2. Centralized और Decentralized System में अंतर स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 3. DLT और Traditional Database में अंतर लिखिए।

प्रश्न 4. Blockchain और DLT में क्या संबंध है? समझाइए।

प्रश्न 5. Block की संरचना (Structure) का वर्णन कीजिए।

प्रश्न 6. Hashing की विशेषताएँ लिखिए।

प्रश्न 7. Proof of Work (PoW) और Proof of Stake (PoS) में दो अंतर लिखिए।

प्रश्न 8. Blockchain में Hashing का क्या महत्व है?

प्रश्न 9. Smart Contract क्या है? इसके दो उपयोग लिखिए।

प्रश्न 10. Digital Rupee और Cryptocurrency में दो अंतर लिखिए।

प्रश्न 11. भारत में Blockchain के कोई चार संभावित अनुप्रयोग लिखिए।

प्रश्न 12. Supply Chain Management में Blockchain के दो लाभ लिखिए।

प्रश्न 13. Blockchain Voting System के दो लाभ लिखिए।


खंड – स

(दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)

(कोई 3 प्रश्न हल कीजिए)
(3 × 10 = 30 अंक)

प्रश्न 1. Blockchain क्या है? इसकी विशेषताओं, लाभों और चुनौतियों का विस्तार से वर्णन कीजिए।

प्रश्न 2. Distributed Ledger Technology (DLT) क्या है? Centralized Database और DLT के बीच तुलनात्मक अंतर स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 3. Blockchain की कार्यप्रणाली (Working) को चरणबद्ध रूप से समझाइए। Blocks, Hashing और Mining की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 4. Proof of Work (PoW) और Proof of Stake (PoS) की तुलनात्मक व्याख्या कीजिए।

प्रश्न 5. Supply Chain Management में Blockchain के अनुप्रयोगों, लाभों और चुनौतियों का वर्णन कीजिए।

प्रश्न 6. Banking Sector में Blockchain के अनुप्रयोगों और लाभों का वर्णन कीजिए।

प्रश्न 7. Voting System में Blockchain के उपयोग, लाभ और चुनौतियों का वर्णन कीजिए।

प्रश्न 8. Digital Rupee (e₹) क्या है? इसकी विशेषताओं, लाभों और चुनौतियों का वर्णन कीजिए। Digital Rupee और Cryptocurrency के बीच अंतर भी स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 9. भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वाली प्रमुख पहलों का वर्णन कीजिए। Digital Rupee इन पहलों में कहाँ फिट बैठता है?

प्रश्न 10. भारत में Blockchain Policy के उद्देश्य, वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत टिप्पणी लिखिए।


Module 5 – Important Questions समाप्त

Module 5 – पूर्ण (Complete)

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